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मयंक मयूर स्मृति दौड़ प्रतियोगिता ने बच्चों में भरा जोश और जनून

      नन्हें कदमों की बड़ी उड़ान

 मयंक मयूर स्मृति दौड़ प्रतियोगिता ने बच्चों में भरा जोश और जनून

बिजनौर।  गढ़ी स्थित मदन लाल स्पोर्ट्स स्टेडियम रविवार को बच्चों की रफ्तार और उत्साह से गूंज उठा। अवसर था — तृतीय मयंक मयूर स्मृति दौड़ प्रतियोगिता का, जिसमें जिले के अलग-अलग स्कूलों से आए सैकड़ों खिलाड़ियों ने ट्रैक पर दमखम दिखाया।

बच्चों में जोश, मैदान में तालियां

10 वर्ष से कम और 15 वर्ष से कम आयु वर्ग के बालक व बालिकाओं के लिए 100, 200 और 400 मीटर की रेस आयोजित हुई। जैसे ही सीटी बजी, नन्हें धावकों ने पूरी ताकत से दौड़ लगाई और दर्शक दीर्घा तालियों से गूंज उठी।

परिवार और गणमान्यों की मौजूदगी

प्रतियोगिता में स्व. मयंक मयूर को याद करते हुए उनके परिजन — सरोज देवी, गिरवर पाल सिंह और फागेंद्र पाल सिंह शामिल रहे। मंच संचालन अरविंद अहलावत और विकास सेतिया ने किया। आयोजन में अमित, लक्ष्य स्पोर्ट्स के जितेंद्र, विनय तितोरिया, अनिल विश्वकर्मा, प्रदीप गर्ग समेत कई लोगों ने योगदान दिया।

कार्यक्रम की शोभा बढ़ाने पहुंचे भाजपा के पूर्व अध्यक्ष सुभाष वाल्मीकि, सभासद विकास लाठियां, नगर संघचालक एडवोकेट उत्तम कुमार, जिला क्रीड़ा अधिकारी राजकुमार, वरिष्ठ नेता विकास अग्रवाल, विदित चौधरी (एमडी, एमडी डिग्री कॉलेज), वरिष्ठ कबड्डी खिलाड़ी खड़ग सिंह और अंतरराष्ट्रीय मैराथन धावक देशराज सिंह

विजेता बच्चों की लिस्ट 

  • 100 मीटर (10 वर्ष से कम, बालक वर्ग): हर्ष (प्रथम), मौ जैल (द्वितीय), हमजा (तृतीय)
  • 100 मीटर (10 वर्ष से कम, बालिका वर्ग): हिमानी (प्रथम), गुंजन (द्वितीय), शीरजल (तृतीय)
  • 100 मीटर (15 वर्ष से कम, बालिका वर्ग): प्राची (प्रथम), रूमन (द्वितीय), नैना (तृतीय)
  • 100 मीटर (15 वर्ष से कम, बालक वर्ग): अनव (प्रथम), कुनाल (द्वितीय), आरुप (तृतीय)

विजेताओं को ट्रॉफी, टी-शर्ट और गिफ्ट देकर सम्मानित किया गया।

 विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण

बच्चों का जोश और भागीदारी यह संकेत देते हैं कि खेलकूद सिर्फ प्रतियोगिता नहीं, बल्कि ऊर्जा और आत्मविश्वास का स्रोत है। मयंक मयूर स्मृति दौड़ जैसे आयोजन ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों की प्रतिभाओं को पहचान दिलाने का मंच बन रहे हैं। सवाल यह है कि क्या इन नन्हीं प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने के लिए निरंतर अभ्यास सुविधाएं और पेशेवर मार्गदर्शन उपलब्ध हो पा रहा है? यदि हाँ, तो बिजनौर जैसे छोटे जिलों से भी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के धावक निकलना तय है।

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