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मध्य गंगा बैराज पुल पर खतरे की दस्तक: दरारों से हिला प्रशासन, DM जसजीत कौर ने संभाली कमान

 मध्य गंगा बैराज पुल पर खतरे की दस्तक: दरारों से हिला प्रशासन, DM जसजीत कौर ने संभाली कमान

स्थान: बिजनौर – मध्य गंगा बैराज पुल। घटना तिथि: 11 अगस्त 2025, शाम | 

लीड स्टोरी

बिजनौर के मध्य गंगा बैराज पुल पर गंभीर दरारों के पाए जाने के बाद जिला प्रशासन अलर्ट मोड में आ गया है। जिलाधिकारी जसजीत कौर ने स्वयं मौके पर पहुंचकर विस्तृत निरीक्षण किया और तत्काल तकनीकी जांच, भारी वाहनों पर रोक तथा चौबीसों घंटे निगरानी के सख्त निर्देश जारी किए। पुल की संरचना में गेट नंबर 15-16 और 23-24 के सिलेब्स पर आई ये दरारें न केवल यातायात बल्कि गंगा बैराज की कार्यप्रणाली और क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए भी खतरे की घंटी मानी जा रही हैं।

निरीक्षण के दौरान मौजूद प्रशासनिक टीम

  • जसजीत कौर – जिलाधिकारी, बिजनौर
  • विनय कुमार सिंह – अपर जिलाधिकारी प्रशासन
  • वान्या सिंह – अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व
  • एनएचआई और सिंचाई विभाग – वरिष्ठ इंजीनियर और तकनीकी विशेषज्ञ

जिलाधिकारी के निर्देश

  • दरारों की तत्काल तकनीकी जांच और रिपोर्ट।
  • भारी वाहनों का आवागमन पूर्णतः बंद जब तक संरचना सुरक्षित न घोषित हो।
  • सिंचाई विभाग द्वारा सभी गेटों के सिलेब्स की 24×7 निगरानी
  • किसी भी नए क्रैक या संरचनात्मक बदलाव पर तत्काल रिपोर्टिंग।

संभावित तकनीकी कारण (विशेष विश्लेषण)

  1. अत्यधिक भार (Extreme Load): भारी वाहनों और बढ़े जल दबाव के कारण पुल की संरचना पर असमान तनाव।
  2. सामग्री का क्षरण (Material Degradation): समय के साथ कंक्रीट और स्टील की मजबूती में कमी।
  3. नींव का अस्थिर होना (Settlement/Scour): नदी प्रवाह द्वारा मिट्टी का बहना और नींव का कमजोर होना।
  4. थकावट (Fatigue): वर्षों के निरंतर उपयोग से संरचना पर जमा हुआ तनाव।

तकनीकी जांच और सुधारात्मक कदम

  • नॉन-डिस्ट्रक्टिव टेस्टिंग (NDT): अल्ट्रासोनिक टेस्ट, रिबाउंड हैमर टेस्ट, ग्राउंड-पेनेट्रेटिंग रडार।
  • क्रैक सीलिंग और ग्राउटिंग: सतही और मध्यम दरारों की तत्काल मरम्मत।
  • रिइन्फोर्समेंट: प्रभावित हिस्सों को स्टील बार या फाइबर रिइन्फोर्स्ड कॉन्क्रीट से मजबूत करना।
  • नींव स्थिरीकरण: स्कोरिंग वाले क्षेत्रों में पाइलिंग और बैकफिलिंग।
  • रेट्रोफिटिंग: दीर्घकालीन संरचनात्मक मजबूती के लिए पुल का पुनः सुदृढ़ीकरण।

प्रभाव और महत्व

मध्य गंगा बैराज पुल बिजनौर, हरिद्वार और आसपास के ज़िलों के यातायात और सिंचाई व्यवस्था का मुख्य आधार है। इस पर आई दरारें न केवल आर्थिक और यातायात व्यवधान पैदा कर सकती हैं, बल्कि क्षेत्र के जल प्रबंधन और किसानों की फसल सिंचाई पर भी असर डाल सकती हैं।

संपादकीय टिप्पणी

प्रशासन का प्रो-एक्टिव रुख—भारी वाहनों पर रोक, तकनीकी जांच और 24 घंटे निगरानी—यह दर्शाता है कि स्थिति को हल्के में नहीं लिया जा रहा। लेकिन तकनीकी मरम्मत में देरी या लापरवाही क्षेत्र के लिए गंभीर खतरा बन सकती है। समय पर कार्रवाई ही बड़ी दुर्घटना को रोकने की गारंटी है।

 

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