बिजली निजीकरण पर गरजी संघर्ष समिति , सांसद-विधायकों को भेजा पत्र, आगरा-ग्रेटर नोएडा की व्यवस्था सरकारी टेकओवर की मांग
मुख्य बिंदु (Key Highlights)
- सांसद-विधायकों को सीधी अपील –
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश ने सभी जनप्रतिनिधियों को पत्र भेजकर निजीकरण के “विफल प्रयोग” को प्रदेश पर न थोपने की मांग की। - ग्रेटर नोएडा और आगरा पर फोकस –
समिति का दावा: पावर कॉरपोरेशन को इन दोनों क्षेत्रों के निजीकरण से हजारों करोड़ का नुकसान, तत्काल सरकारी टेकओवर की ज़रूरत। - आगरा का घाटे का गणित –
- 2010 से 2024 तक हर साल महंगी बिजली खरीदकर टोरेंट पावर को सस्ती दर पर बेचने से ₹2,434 करोड़ का नुकसान।
- समिति के अनुसार वास्तविक घाटा करीब ₹10,000 करोड़ तक पहुंच चुका है।
- 2023-24 में ही ₹274 करोड़ का सीधा घाटा, जबकि टोरेंट पावर ने लगभग ₹800 करोड़ का मुनाफा कमाया।
- बकाया वसूली पर सवाल –
2010 में आगरा के ₹2,200 करोड़ बिजली बकाया की वसूली का वादा अब तक अधूरा, टोरेंट पावर ने एक पैसा भी नहीं लौटाया। - ग्रेटर नोएडा की स्थिति –
नोएडा पावर कंपनी पर आरोप: घाटे वाले घरेलू और कृषि क्षेत्रों में शेड्यूल के अनुसार बिजली नहीं देती, सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में लाइसेंस रद्द करने का मुकदमा किया। - राष्ट्रीय और अन्य राज्यों के उदाहरण –
- उड़ीसा में तीसरी बार निजीकरण विफल, टाटा पावर पर जनसुनवाई की तैयारी।
- उज्जैन, सागर, ग्वालियर, रांची, जमशेदपुर, औरंगाबाद, नागपुर, जलगांव, मुजफ्फरपुर, भागलपुर, गया जैसे शहरों में फ्रेंचाइजी मॉडल रद्द।
- राजनीतिक अपील और आंदोलन –
समिति ने सांसदों-विधायकों से कहा कि वे अपने पद का उपयोग करके पूर्वांचल व दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण का फैसला निरस्त करवाएं।
निजीकरण विरोधी आंदोलन के 257वें दिन भी सभी जिलों में बिजली कर्मचारियों का विरोध प्रदर्शन जारी।
विश्लेषण (Analytical View)
यह प्रेस विज्ञप्ति केवल तकनीकी या वित्तीय नुकसान की बात नहीं कर रही, बल्कि एक राजनीतिक और जनहित आधारित दबाव अभियान भी है। समिति ने आंकड़ों, उदाहरणों और कानूनी कार्रवाइयों का सहारा लेकर यह सिद्ध करने की कोशिश की है कि निजीकरण न केवल घाटे का सौदा है, बल्कि उपभोक्ताओं के हितों के खिलाफ भी है।
आगरा-ग्रेटर नोएडा का केस टेस्ट केस बनकर उभरा है, जहां सरकारी टेकओवर की मांग से प्रदेश में बिजली निजीकरण नीति पर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है।












