80 करोड़ स्वामी, पद्मश्री संत की वृद्धाश्रम में मृत्यु, क्या है ये आधुनिक भारत का ‘पारिवारिक संस्कार’?
हाइलाइटर:
वाराणसी में एक ऐसी कहानी सामने आई है, जो सम्मान, धन और प्रतिष्ठा के मन पर बड़ा सवाल खड़ा करती है। करोड़ों की संपत्ति, राष्ट्रीय सम्मान और सैकड़ों शहीद के लेखक – लेकिन पिछले समय में न बेटा साथ था, न बेटी, न अपना… बस बुजुर्गश्रम की चारदीवारी और समाजसेवियों का सहारा।
मुख्य बिंदु
- 80 करोड़ और पद्मश्री भी न बचे अकेलेपन:
काशी के प्रमुख आध्यात्मिक साझीदार श्रीनाथ खंडेलवाल – 2023 में पद्मश्री से प्रतिष्ठित, सौ से अधिक करोड़ की संपत्ति के मालिक, 80 करोड़ की संपत्ति के मालिक…लेकिन आखिरी बार एक बाबा बुजुर्ग।
❓ बुजुर्ग माता-पिता के लिए आज सम्मान और धन भी क्या कम हो गए हैं? - जायदाद हवेली, सड़क पर फेंक दिया गया:
दो बेटों और सुप्रीम कोर्ट के वकील की बेटी ने कथित तौर पर संपत्ति अपने नाम कर ली और बीमार हालत में पिता को सड़क पर छोड़ दिया।
❓आधुनिक भारत में बच्चों का ‘कर्तव्य धर्म’ क्या है? - वृद्धाश्रम में अंतिम व्याख्यान:
समाजसेवियों ने उन्हें काशी कुष्ठ वृद्धाश्रम में शरण दी, जहां उनकी निःशुल्क देखभाल होती थी। लेकिन बेटे-बेटी ने एक बार भी हाल ही में प्लांट की बेरोजगारी को समझा नहीं।
❓ क्या विकल्प अब केवल विरासत बनना तक ही सीमित है? - अंतिम समय भी तन्हा: ईसा मसीह, बौद्ध भिक्षुओं
में हुई भर्ती और 80 साल की उम्र में दुनिया में कहा गया। फैमिली को दी खबर, बेटे ने बनाई सहभागीता की छुट्टी, बेटी ने भी आने से मना कर दिया।
❓ एक बेटे का कंधा भी अब सबसे भारी हो गया है? - समाज सेवकों ने अपने पुत्रों का धर्म परिवर्तन कर दिया:
समाज सेवकों ने पूरे विधान सभा में चंदा को मिलाकर उनका अंतिम संस्कार कर दिया।
❤️ खून के राज़ ने छोड़ दिया, पर अजनबियों ने छोड़ दिया।
🖋️साइंटिफिक पंचलाइन:
“80 करोड़ की संपत्ति, पद्मश्री का गौरव…खंडे का अंतिम संस्कार हुआ।”













