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नरेगा घोटाला: आरक्षण की अनदेखी, मनमाने भुगतान और अब बिना कार्रवाई रिटायर होगा अधिकारी !

नरेगा घोटाला: आरक्षण की अनदेखी, मनमाने भुगतान और अब बिना कार्रवाई रिटायर होगा अधिकारी !
BIJNOR. मोहम्मदपुर देवमल ब्लॉक में नरेगा घोटाले से जुड़े मामलों में जहां दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की उम्मीद की जाती है, वहीं मोहम्मदपुर देवमल ब्लॉक में ठीक उल्टा हो रहा है। यहां नरेगा के तहत लाखों रुपये का मनमाना भुगतान किया गया, लाभार्थियों के चयन में आरक्षण नियमों को दरकिनार किया गया, और अब इस गड़बड़ी के मुख्य आरोपी कार्यक्रम अधिकारी को बिना किसी कार्रवाई के 31 मार्च को सेवा निवृत्त करने की तैयारी कर ली गई है। इस पूरे घटनाक्रम ने ग्राम्य विकास विभाग की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

भ्रष्टाचार और नियमों की अनदेखी की लंबी सूची

इस मामले में दो बड़े मुद्दे सामने आए हैं:

  1. भूसामतलीकरण कार्यों के लिए तय सीमा का उल्लंघन:
    नरेगा के नियमों के अनुसार अधिकतम दो लाख रुपये प्रति लाभार्थी दिए जा सकते हैं, लेकिन यहां कई लाभार्थियों को तीन से चार लाख रुपये तक दिए गए। ग्रामीणों का आरोप है कि यह पैसा कागजों पर ही खर्च किया गया और वास्तविक कार्य हुआ ही नहीं।
  2. आरक्षण नियमों की अनदेखी:
    व्यक्तिगत लाभार्थियों के चयन में अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के लिए आरक्षण लागू ही नहीं किया गया। इससे यह स्पष्ट होता है कि यह चयन पूरी तरह से मनमाने ढंग से हुआ और कुछ प्रभावशाली लोगों को फायदा पहुंचाया गया।

कार्यक्रम अधिकारी को ‘इनाम’ में समय पर रिटायरमेंट?

सबसे बड़ा सवाल यह है कि इस पूरे घोटाले में सबसे अहम भूमिका निभाने वाले कार्यक्रम अधिकारी पर कोई कार्रवाई क्यों नहीं की गई? बल्कि, ग्राम्य विकास विभाग ने बिना किसी जांच या दंडात्मक कार्रवाई के उन्हें 31 मार्च को सेवा निवृत्त करने की तैयारी कर ली है। क्या यह भ्रष्टाचारियों को संरक्षण देने की साजिश नहीं है?

ग्राम्य विकास विभाग के अधिकारियों की भूमिका संदिग्ध

अगर इतनी बड़ी अनियमितताएं सामने आ चुकी हैं, तो क्या विभागीय अधिकारियों को इसकी भनक नहीं थी? क्या यह संभव है कि एक कार्यक्रम अधिकारी इतनी बड़ी वित्तीय धांधली कर ले और उच्च अधिकारियों को इसकी खबर न हो? या फिर, यह घोटाला सिर्फ ब्लॉक स्तर पर नहीं, बल्कि ऊपर तक फैला हुआ है?

जांच की मांग, लेकिन क्या होगी कोई कार्रवाई ?

ग्रामीणों और सामाजिक संगठनों ने इस मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है। लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या ग्राम्य विकास विभाग इस पर कोई ठोस कदम उठाएगा, या फिर अधिकारी को रिटायर कर मामले को रफा-दफा कर दिया जाएगा?

अगर इस घोटाले की सही जांच नहीं होती, तो यह एक खतरनाक उदाहरण होगा कि भ्रष्टाचारियों को बिना किसी सजा के बच निकलने का रास्ता मिल जाता है। क्या सरकार इस मामले में हस्तक्षेप करेगी, या फिर गरीबों के हक का पैसा लूटने वाले यूं ही बचते रहेंगे?

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