किसानों के आंदोलन पर दमन और मुक्त व्यापार समझौतों के खिलाफ राष्ट्रपति को सौंपा गया ज्ञापन

नई दिल्ली/बिजनौर। किसानों के विरोध प्रदर्शनों पर हो रही पुलिसिया कार्रवाई और केंद्र सरकार द्वारा अमेरिका, यूरोपीय संघ तथा न्यूजीलैंड के साथ किए जा रहे मुक्त व्यापार समझौतों के खिलाफ संयुक्त किसान मोर्चा एवं अन्य न्यायप्रिय संगठनों ने राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू को एक मांग पत्र सौंपा। इसके साथ ही, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को भी एक ज्ञापन दिया गया, जिसमें राज्य स्तर की मांगें उठाई गईं।
पंजाब में किसान आंदोलन पर बढ़ता दमन
ज्ञापन में उल्लेख किया गया है कि पंजाब में किसान संगठनों द्वारा किए जा रहे लोकतांत्रिक विरोध प्रदर्शनों को पुलिस बलपूर्वक दबा रही है। आरोप लगाया गया है कि केंद्र सरकार और पंजाब सरकार मिलकर किसानों की आवाज को कुचलने का प्रयास कर रही हैं।
संयुक्त किसान मोर्चा ने दावा किया कि 5 मार्च से चंडीगढ़ में प्रस्तावित सात दिवसीय धरने को बलपूर्वक समाप्त कर दिया गया। 19 मार्च को सरकार के साथ वार्ता से लौट रहे किसान नेताओं की गिरफ्तारी की गई। वहीं, शंभू और खनौरी में धरनास्थलों को बुलडोजर से तोड़ा गया, किसानों के ट्रैक्टर-ट्रॉलियों और अन्य उपकरणों को जब्त कर लिया गया, और बड़े पैमाने पर चोरी की घटनाएं सामने आईं।
इसके अलावा, कर्नल पुष्पिंदर सिंह बाठ के खिलाफ हुई पुलिस बर्बरता और लोगों के घरों को बुलडोजर से ध्वस्त करने की घटनाओं का भी हवाला दिया गया। किसान संगठनों का कहना है कि यह देश के लोकतांत्रिक मूल्यों के विरुद्ध है और सरकार को तत्काल इस दमन को रोकना चाहिए।
मुक्त व्यापार समझौतों पर आपत्ति
संयुक्त किसान मोर्चा ने ज्ञापन में इस बात पर भी चिंता जताई कि केंद्र सरकार अमेरिका, यूरोपीय संघ और न्यूजीलैंड के साथ मुक्त व्यापार समझौतों (FTA) पर चर्चा कर रही है। उनका मानना है कि इन समझौतों से देश के किसानों, डेयरी उद्योग और छोटे व्यवसायों को भारी नुकसान होगा।
संयुक्त किसान मोर्चा का कहना है कि मुक्त व्यापार समझौतों के कारण विदेशी उत्पादों की भारत में आमद बढ़ेगी, जिससे भारतीय किसानों और छोटे व्यापारियों की आजीविका खतरे में पड़ जाएगी। उन्होंने राष्ट्रपति से अनुरोध किया कि इन समझौतों को रोकने के लिए केंद्र सरकार को निर्देश दिए जाएं।
संयुक्त किसान मोर्चा की प्रमुख मांगे:
- पुलिस द्वारा किया जा रहा दमन बंद किया जाए और जनता के लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा की जाए।
- गिरफ्तार किसानों को बिना शर्त रिहा किया जाए।
- किसानों के जब्त किए गए ट्रैक्टर-ट्रॉलियों और उपकरणों को वापस किया जाए।
- पंजाब सरकार किसानों के चोरी या नष्ट किए गए सामान की भरपाई करे।
- राष्ट्रीय हितों के खिलाफ मुक्त व्यापार समझौतों पर बातचीत को तत्काल रोका जाए।
उत्तर प्रदेश में किसानों की मांगें
बिजनौर में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नाम दिए गए ज्ञापन में किसानों ने पांच प्रमुख मांगें उठाईं:
- ग्रामीण क्षेत्रों में नलकूपों को 10 घंटे तक लगातार बिजली आपूर्ति दी जाए।
- नेहरों में तेल तक पानी पहुंचाने की व्यवस्था की जाए।
- बजाज ग्रुप की चीनी मिलों से गन्ने का भुगतान जल्द किया जाए।
- बिजनौर जिले को गुलदार और अन्य जंगली जानवरों से मुक्त किया जाए।
- किसानों की सभी समस्याओं का समाधान तत्काल किया जाए।
ज्ञापन देने वालों में ठाकुर रामावतार सिंह, सुनील प्रधान, उपमा चौहान, कवराज सिंह, डॉक्टर विजय सिंह, आम सिंह, मनप्रीत सिंह, वीरेंद्र सिंह, संदीप त्यागी, मुकुल शेरावत, कीरत बालियां, अवनीश कुमार, अमरपाल सिंह, अंकुर चौधरी, ऋषि पाल सिंह, अजय बालियां, प्रीतम सिंह, दिनेश कुमार सहित कई किसान नेता मौजूद रहे।
क्या कहती है सरकार?
सरकार की ओर से अभी तक कोई औपचारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन माना जा रहा है कि मुक्त व्यापार समझौतों पर वार्ता जारी रहेगी। वहीं, पंजाब में किसान आंदोलन पर की जा रही कार्रवाई को लेकर सरकार का कहना है कि यह कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक कदम हैं।
कृषि संकट और बढ़ता असंतोष
कृषि क्षेत्र में गहराते संकट के बीच किसानों की ये मांगें यह दर्शाती हैं कि उन्हें सरकार की नीतियों पर भरोसा नहीं रहा। हाल के वर्षों में किसानों और सरकार के बीच कई बार टकराव देखने को मिला है, खासकर कृषि कानूनों के खिलाफ हुए लंबे आंदोलन के बाद।
आगे की राह
संयुक्त किसान मोर्चा ने चेतावनी दी है कि अगर उनकी मांगें नहीं मानी गईं, तो वे अपने आंदोलन को और तेज करेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि देशभर के किसान एकजुट होकर सरकार की जनविरोधी नीतियों के खिलाफ संघर्ष जारी रखेंगे।
अब यह देखना होगा कि सरकार इन मांगों पर क्या प्रतिक्रिया देती है और क्या किसानों के आंदोलन को शांत करने के लिए कोई ठोस कदम उठाए जाते हैं या नहीं।












