बालिकाओं के आत्मनिर्भर भविष्य की दिशा में महत्वपूर्ण कदम

मुरादाबाद: जनपद के विकास खंड डिलारी में आयोजित दो दिवसीय सेल्फ एस्टीम प्रशिक्षण ने बालिकाओं के सशक्तिकरण की दिशा में एक प्रभावी प्रयास किया। यह कार्यक्रम स्पेशल प्रोजेक्ट फॉर इक्विटी के तहत जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी विमलेश कुमार के निर्देशन एवं खंड शिक्षाधिकारी भूपेश दिनकर व जिला समन्वयक रजत भटनागर के नेतृत्व में संपन्न हुआ। प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य बालिकाओं में आत्मनिर्भरता, आत्मरक्षा कौशल, नेतृत्व क्षमता एवं लैंगिक समानता के प्रति जागरूकता बढ़ाना था।
प्रशिक्षण की विशेषताएँ
इस प्रशिक्षण में विकास क्षेत्र के उच्च प्राथमिक, कंपोजिट विद्यालय एवं कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय की 69 मीना सुगमकर्ताओं ने भाग लिया। मास्टर ट्रेनर जितेंद्र कुमार चौहान एवं नवनीत विश्नोई ने प्रगति के पंख, आधा फुल कॉमिक सीरीज, अरमान मॉड्यूल, आत्मरक्षा, पर्यावरण संरक्षण, स्वास्थ्य शिक्षा एवं जेंडर स्टीरियोटाइप जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की।
मीना मंच की नवीन गठन प्रक्रिया एवं आत्मरक्षा क्लब सुगमकर्ता की भूमिका पर विशेष सत्र आयोजित किए गए। इस प्रशिक्षण के उपरांत प्रत्येक सुगमकर्ता अपने-अपने विद्यालयों में दो अन्य शिक्षकों को प्रशिक्षित कर, टीम वर्क के माध्यम से बालिकाओं के सशक्तिकरण हेतु कार्य करेगा।
सशक्तिकरण की दिशा में एक सकारात्मक पहल
यह कार्यक्रम केवल प्रशिक्षण तक सीमित न रहकर एक व्यापक परिवर्तन का हिस्सा है। प्रशिक्षित सुगमकर्ता अब विद्यालयों में जाकर अन्य शिक्षकों एवं छात्राओं को प्रशिक्षित करेंगे, जिससे यह कार्यक्रम जमीनी स्तर पर प्रभावी होगा। बालिकाओं को आत्मरक्षा के गुर सिखाने के साथ-साथ उनके मानसिक एवं सामाजिक विकास को भी प्रोत्साहित किया गया।
यूनिसेफ प्रतिनिधि मौ. मुशाहिद ने इस प्रशिक्षण की सराहना करते हुए सभी प्रतिभागियों का उत्साहवर्धन किया। बेहतर प्रदर्शन करने वाले प्रशिक्षकों एवं प्रतिभागियों को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया, जिससे उनमें आत्मविश्वास बढ़ेगा और वे अपने दायित्व को और प्रभावी ढंग से निभा सकेंगी।
इस प्रकार, यह प्रशिक्षण सिर्फ एक कार्यक्रम न होकर बालिकाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक ठोस प्रयास है। इस तरह के प्रयास समाज में लैंगिक समानता की अवधारणा को मजबूत करने और बालिकाओं को सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। यदि यह कार्यक्रम सतत रूप से चलता रहा, तो निश्चित ही यह समाज में एक सकारात्मक बदलाव लाने में सफल होगा।












