Target Tv Live

हस्तिनापुर वन्य जीव विहार: अतिक्रमण हटाने की कानूनी मुहर

हस्तिनापुर वन्य जीव विहार: अतिक्रमण हटाने की कानूनी मुहर, उच्च न्यायालय का ऐतिहासिक निर्णय

बिजनौर । उत्तर प्रदेश के बिजनौर और मुज़फ्फरनगर जिलों की अंतर्जनपदीय सीमा पर स्थित मोहनपुर वन खंड में वर्षों से जारी अवैध अतिक्रमण के खिलाफ एक बड़ा कदम उठाया गया है। वन विभाग और राजस्व विभाग की संयुक्त कार्यवाही को इलाहाबाद उच्च न्यायालय की स्वीकृति मिल गई है, जिससे अतिक्रमण हटाने की प्रक्रिया को कानूनी समर्थन प्राप्त हुआ है।

अतिक्रमण की पृष्ठभूमि

मोहनपुर वन खंड, हस्तिनापुर वन्य जीव विहार का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जो वन्यजीव संरक्षण के दृष्टिकोण से अत्यंत संवेदनशील क्षेत्र है। यह इलाका भारतीय वन अधिनियम 1927 के तहत संरक्षित घोषित किया गया था, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में अवैध रूप से लोगों द्वारा इस भूमि पर कब्जा कर लिया गया था।

बिजनौर के जिलाधिकारी के निर्देश पर वन विभाग, राजस्व विभाग और बंदोबस्त विभाग की संयुक्त टीम द्वारा विस्तृत सर्वेक्षण किया गया, जिसमें अतिक्रमण की पुष्टि हुई। इस सर्वे के खिलाफ अतिक्रमणकारियों ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय में रिट याचिका (संख्या 283/2025) दायर की।

न्यायालय का फैसला और प्रभाव

शौकत अली एवं 13 अन्य बनाम सरकार नामक इस याचिका में अतिक्रमणकारियों ने यह तर्क दिया कि उनके मकान पूर्व से बने हुए हैं और उन्हें हटाना अन्यायपूर्ण होगा। इसके समर्थन में उन्होंने मकानों के फोटोग्राफ भी प्रस्तुत किए। हालांकि, न्यायालय ने वन एवं राजस्व विभाग द्वारा प्रस्तुत साक्ष्यों को अधिक महत्वपूर्ण मानते हुए अतिक्रमणकारियों की याचिका को आधारहीन घोषित कर दिया और इसे खारिज कर दिया।

  • यह निर्णय वन्यजीव संरक्षण और सरकारी भूमि को अवैध कब्जों से मुक्त कराने के प्रयासों को एक बड़ी कानूनी जीत के रूप में देखा जा रहा है। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि भारतीय वन अधिनियम 1927 के तहत वन भूमि पर किसी भी प्रकार का अवैध कब्जा गैरकानूनी है, और सरकार को इसे हटाने का पूर्ण अधिकार है।
वन विभाग की अपील

अब जब उच्च न्यायालय ने वन विभाग की कार्यवाही को वैध ठहराया है, तो विभाग ने सभी अतिक्रमणकारियों से 15 दिनों के भीतर स्वेच्छा से भूमि खाली करने की अपील की है। यदि इस समय सीमा के भीतर अतिक्रमण नहीं हटाया जाता, तो वन विभाग और जिला प्रशासन कड़ी कार्रवाई करते हुए अतिक्रमण हटाने के लिए बाध्य होगा।

  • यह निर्णय न केवल वन संरक्षण के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि बिजनौर जिले में मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने की दिशा में भी एक अहम कदम माना जा रहा है। वन विभाग का मानना है कि इस भूमि को पुनः वन्यजीवों के अनुकूल बनाने से स्थानीय वन्यजीवों, विशेष रूप से बारहसिंगा और अन्य प्रजातियों को प्राकृतिक आवास मिलेगा, जिससे जैव विविधता को भी बढ़ावा मिलेगा।

इलाहाबाद उच्च न्यायालय का यह फैसला एक मील का पत्थर साबित हो सकता है, जो पूरे प्रदेश में वन भूमि से अतिक्रमण हटाने की मुहिम को गति देगा। यह मामला दर्शाता है कि सरकारी भूमि पर अवैध कब्जे को अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा, और पर्यावरण संरक्षण को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी। अब देखना होगा कि अतिक्रमणकारी खुद इस आदेश का पालन करते हैं या प्रशासन को बलपूर्वक कार्रवाई करनी पड़ेगी।

 

Leave a Comment

यह भी पढ़ें