विश्लेषणात्मक समाचार:
बिजनौर में सरकारी भूमि पर अतिक्रमण का मामला, 15 दिन में खाली करने के आदेश
वर्तमान में सपा कार्यालय और आदर्श शिक्षा पब्लिक जूनियर हाई स्कूल बिजनौर संचालित हो रहे हैं।

BIJNOR. जिलाधिकारी अंकित कुमार अग्रवाल ने सरकारी भूमि के सत्यापन की प्रक्रिया को लेकर एक अहम जानकारी दी है, जिसमें तहसील बिजनौर के एक सरकारी भूमि पर अवैध अतिक्रमण का मामला सामने आया है। यह भूमि ग्राम फरीदपुर खेमा के गाटा संख्या 58/0.734 हे0 श्रेणी 6-2 अहाता कोठी में स्थित है, जो सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार सरकारी भूमि के रूप में दर्ज है।
इस भूमि का अनुमानित मूल्यांकन 71.19 करोड़ रुपये के करीब किया गया है, और इस पर वर्तमान में समाजवादी पार्टी कार्यालय और आदर्श शिक्षा पब्लिक जूनियर हाई स्कूल बिजनौर संचालित हो रहे हैं। इसके अलावा, इस भूमि पर लगभग 20 रिहायशी आवास भी बनाए गए हैं। इन आवासों के मालिकों को तहसीलदार सदर बिजनौर द्वारा नोटिस भेजा गया था, लेकिन स्वामित्व के संबंध में कोई संतोषजनक जवाब प्राप्त नहीं हुआ।
समाजवादी पार्टी ने अपनी प्रतिक्रिया में कहा था कि यह भूमि उनके पूर्वजों की है और 1934 में वक्फ के तहत मुहैया कराई गई थी। इसके बाद, पार्टी ने 1994 में इसे रेंट पर लिया था। हालांकि, प्रशासनिक जांच में यह पाया गया कि भूमि पर अतिक्रमण किया गया है और यह भूमि सरकारी योजनाओं और कार्यों के लिए आवश्यक है।
स्थलीय निरीक्षण और अभिलेखीय सत्यापन के दौरान यह स्पष्ट हुआ कि भूमि पर वर्तमान में अवैध कब्जा किया गया है। समाजवादी पार्टी के प्रस्तुत दस्तावेजों में प्रशासन द्वारा मांगे गए दस्तावेजों से भिन्नताएं पाई गईं। इस स्थिति को लेकर जिलाधिकारी ने सख्त कदम उठाते हुए उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता 2006 की धारा 136 के तहत संबंधित पक्षों को 15 दिन के भीतर भूमि खाली करने का नोटिस जारी किया है।
यदि निर्धारित समय में कब्जेधारी भूमि खाली नहीं करते हैं, तो प्रशासन कानून के अनुसार कड़ी कार्रवाई करेगा। यह कार्रवाई यह दर्शाती है कि प्रशासन सरकारी संपत्तियों के संरक्षण और उनके सही उपयोग के लिए प्रतिबद्ध है। साथ ही यह एक संकेत भी है कि सरकारी योजनाओं के लिए आवश्यक भूमि को अतिक्रमण से मुक्त किया जाएगा, ताकि योजनाओं के सफल क्रियान्वयन में कोई रुकावट न आए।
इस पूरे प्रकरण में प्रशासन का यह कदम सरकारी संपत्ति की सुरक्षा और उसके उचित उपयोग के लिए एक महत्वपूर्ण संदेश है, जो अतिक्रमण की समस्या से निपटने के लिए और अधिक कड़ी कार्रवाई की आवश्यकता को रेखांकित करता है।












