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फोनपे का पिन बदलकर ठगी करने वाले गिरोह का पर्दाफाश, दो गिरफ्तार; दुकानदारों को बनाते थे निशाना

बिजनौर में फोनपे का पिन बदलकर ठगी करने वाले गिरोह का पर्दाफाश, दो गिरफ्तार; दुकानदारों को बनाते थे निशाना

फोनपे की गोपनीय जानकारी से छेड़छाड़ कर खातों से उड़ाते थे रकम, 20 हजार रुपये नकद, दो मोबाइल और वारदात में इस्तेमाल बाइक बरामद
अवनीश त्यागी | TargetTvLive

बिजनौर। डिजिटल भुगतान की सुविधा को ठगी का हथियार बनाने वाले एक शातिर गिरोह का बिजनौर पुलिस ने पर्दाफाश किया है। थाना कोतवाली शहर पुलिस ने फोनपे के जरिए दुकानदारों को निशाना बनाकर ठगी करने के आरोप में दो युवकों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार, आरोपी दुकानों पर पहुंचकर डिजिटल भुगतान के दौरान चालाकी से यूपीआई पिन बदलने की प्रक्रिया का दुरुपयोग करते थे और फिर खातों से रकम ट्रांसफर कर लेते थे। आरोपियों के कब्जे से 20 हजार रुपये नकद, दो स्मार्टफोन और वारदात में इस्तेमाल की गई मोटरसाइकिल बरामद हुई है।

पांच हजार की शिकायत से खुला ठगी का बड़ा तरीका

पुलिस के मुताबिक, मामले की शुरुआत 6 नवंबर 2026 को हुई। मोहल्ला बाजदारान निवासी दिनेश कुमार ने शिकायत की थी कि अज्ञात लोगों ने प्रतिरूपण और धोखाधड़ी के जरिए उनके मोबाइल फोन से जुड़े बैंक खाते से पांच हजार रुपये ट्रांसफर कर लिए। शिकायत के आधार पर 7 नवंबर को थाना कोतवाली शहर में मुकदमा अपराध संख्या 920/2026, धारा 318(4)/317(2) बीएनएस के तहत मुकदमा दर्ज किया गया।

मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने तकनीकी साक्ष्यों और जांच के आधार पर आरोपियों की पहचान करने का प्रयास किया। विवेचना में दो युवकों के नाम सामने आने के बाद पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया।

दुकानों पर पहुंचकर बदलते थे फोनपे का पिन

पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार आरोपियों की पहचान सूर्य प्रताप त्यागी पुत्र पंकज त्यागी निवासी नई बस्ती, थाना कोतवाली शहर, बिजनौर और कुनाल गुप्ता पुत्र विमलेश गुप्ता निवासी 25 फुटा रोड, जी ब्लॉक, थाना सोनिया विहार, दिल्ली के रूप में हुई है।

पुलिस का दावा है कि पूछताछ में आरोपियों ने डीके इलेक्ट्रिकल्स, सिविल लाइन बिजनौर और राकेश सिंह की बिरयानी की दुकान पर जाकर फोनपे के माध्यम से पिन बदलने की प्रक्रिया का दुरुपयोग कर ठगी करने की बात स्वीकार की। इसके अलावा राह चलते अन्य लोगों को भी निशाना बनाने की जानकारी सामने आई है। पुलिस के अनुसार, इस तरीके से आरोपियों ने कुल 20 हजार रुपये की ठगी की थी।

नकदी, दो मोबाइल और मोटरसाइकिल बरामद

पुलिस ने आरोपियों की निशानदेही और कब्जे से एक ग्लैमर मोटरसाइकिल (नंबर DL5SCS9744), 20 हजार रुपये नकद तथा दो स्मार्टफोन बरामद किए हैं। इनमें एक स्काई ब्लू रंग का रेडमी मोबाइल और दूसरा हल्के बैंगनी रंग का आईफोन शामिल है।

पुलिस ने बरामदगी के आधार पर मुकदमे में धारा 317(2) बीएनएस की वृद्धि की है। वहीं, घटना में इस्तेमाल मोटरसाइकिल को धारा 207 मोटर वाहन अधिनियम के तहत सीज किया गया है।

इन पुलिसकर्मियों की रही कार्रवाई में भूमिका

इस कार्रवाई को अंजाम देने वाली पुलिस टीम में उपनिरीक्षक अंकुर कुमार, कांस्टेबल योगेश, कांस्टेबल राजू कुमार, कांस्टेबल मोहित कुमार और चालक कांस्टेबल वकील अहमद शामिल रहे।

डिजिटल भुगतान करते समय बरतें सावधानी

इस घटना ने एक बार फिर डिजिटल भुगतान की सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े किए हैं। फोनपे, गूगल पे और अन्य यूपीआई एप के इस्तेमाल के दौरान थोड़ी सी लापरवाही भी आर्थिक नुकसान का कारण बन सकती है।

आम लोगों के लिए जरूरी सावधानियां:

  • अपना यूपीआई पिन किसी दुकानदार या अनजान व्यक्ति को न बताएं।
  • भुगतान करते समय मोबाइल की स्क्रीन स्वयं देखें और किसी दूसरे को फोन न सौंपें।
  • किसी के कहने पर अपना यूपीआई पिन बदलने या दर्ज करने से पहले पूरी प्रक्रिया समझें।
  • पैसे प्राप्त करने के लिए यूपीआई पिन डालने की जरूरत नहीं होती।
  • खाते से अनधिकृत रकम निकलने पर तत्काल बैंक और साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत करें।

TargetTvLive विश्लेषण: डिजिटल भुगतान ने आम आदमी की जिंदगी आसान बनाई है, लेकिन इसी सुविधा का दुरुपयोग करने वाले ठग नए-नए तरीके अपना रहे हैं। बिजनौर में सामने आया मामला बताता है कि साइबर ठगी अब केवल फर्जी लिंक या ओटीपी तक सीमित नहीं है। दुकानों पर होने वाले सामान्य डिजिटल लेन-देन के दौरान भी सतर्कता जरूरी है। पुलिस की कार्रवाई के साथ-साथ लोगों में डिजिटल सुरक्षा को लेकर जागरूकता बढ़ाना भी उतना ही आवश्यक है।

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