किसान महापंचायत का बड़ा असर: अब जबरन नहीं लगेंगे स्मार्ट मीटर, 25 नवंबर तक मिलेगा गन्ने का बकाया!
डिजिटल डेस्क, TargetTvLive | रिपोर्ट: अवनीश त्यागी
बिजनौर (विकास भवन): 21 तारीख को नुमाइश ग्राउंड में हुई भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) की विशाल महापंचायत का असर आखिर दिखने लगा है। सोमवार, 2 नवंबर को विकास भवन सभागार में एडीएम (ADM) अंशिका दीक्षित की अध्यक्षता में प्रशासन और किसान नेताओं के बीच एक बड़ी बैठक हुई।
भाकियू के जिलाध्यक्ष सुनील प्रधान की अगुवाई में किसान नेताओं ने अपनी समस्याओं को बहुत मजबूती से अफसरशाही के सामने रखा। लंबी बातचीत के बाद प्रशासन ने किसानों की कई बड़ी मांगें तुरंत मान लीं।
बैठक में किसानों के हक में हुए 5 बड़े फैसले:
- स्मार्ट मीटर की जबरदस्ती पर रोक: अब किसी भी किसान के घर पर जबरन स्मार्ट मीटर नहीं लगाया जाएगा। इस पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है।
- गन्ना बकाये की तारीख तय:
- बिलाई चीनी मिल: 25 नवंबर तक किसानों का पूरा बकाया चुकाएगी।
- बजाज ग्रुप की मिलें: 5 दिसंबर तक शत-प्रतिशत भुगतान करेंगी।
- गन्ने के ‘सुखाने’ (सूख) के नाम पर नहीं होगी कटौती: भाकियू जिलाध्यक्ष सुनील प्रधान ने जिला गन्ना अधिकारी से साफ कराया कि इस बार शुरुआत से ही मिलों से मैली किसानों को मिलेगी। गन्ने में ‘सूख’ के नाम पर किसानों का नुकसान नहीं होने दिया जाएगा, इसका खर्च मिलें खुद उठाएंगी।
- दीपावली से पहले वापस होंगे मुकदमे: नगीना तहसील में किसानों पर दर्ज मुकदमे दीपावली से पहले वापस ले लिए जाएंगे। साथ ही वन विभाग द्वारा दर्ज फर्जी मुकदमों पर भी जल्द कार्रवाई का भरोसा मिला है।
- सड़क और धान खरीद पर राहत:
- जिले के सभी धान क्रय केंद्रों को तुरंत और बिना रुकावट चलाने के निर्देश दिए गए।
- गढ़ी गांव के लोगों के लिए चक्कर रोड से जल्द पक्की सड़क का निर्माण शुरू कराया जाएगा।
वार्ता में कौन-कौन किसान नेता शामिल रहे?
इस महत्वपूर्ण बैठक में जिलाध्यक्ष सुनील प्रधान के साथ प्रदेश महासचिव ठाकुर रामावतार सिंह, बाबूराम तोमर, कुलदीप सिंह, मुनींद्र सिंह, डॉ. विजय चौधरी, विकास कुमार, अजय बालियान, धर्मेंद्र सिंह, मुकेश जंगल, आशु चौधरी, संदीप त्यागी, रजनीश अहलावत, मोनू प्रधान, वीरेंद्र सिंह, राजेंद्र सिंह, राहुल चौधरी, अरुण चौधरी, अंकुर चौधरी, नीतू और विशाल डबास प्रमुख रूप से मौजूद रहे।
TargetTvLive की नज़र: यह बैठक किसानों की एकजुटता और संघर्ष की बड़ी जीत मानी जा रही है। चीनी मिलों के चालू होने, गन्ने का बकाया मिलने और स्मार्ट मीटर की टेंशन खत्म होने से किसानों ने राहत की सांस ली है। अब देखना यह होगा कि तय समयसीमा के भीतर प्रशासन और मिल मालिक अपने वादों पर कितना खरा उतरते हैं।
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