Target Tv Live

“सांसों पर संकट और बिलों का जंजाल: ऑनलाइन के फेर में फंसे बुजुर्ग पेंशनर्स, बिजनौर से अमरोहा तक सड़कों पर फूटा गुस्सा!”

“सांसों पर संकट और बिलों का जंजाल: ऑनलाइन के फेर में फंसे बुजुर्ग पेंशनर्स, बिजनौर से अमरोहा तक सड़कों पर फूटा गुस्सा!”

मुख्य हाइलाइट्स (Quick Highlights):
  • 1 अक्टूबर 2026 से नया फरमान: ऑफलाइन बिल बंद, सिर्फ ऑनलाइन प्रक्रिया ने बढ़ाई बुजुर्गों की मुसीबत।
  • सड़कों पर उतरे अन्नदाता (सेवाप्रद): प्रांतीय आह्वान पर बिजनौर और अमरोहा समेत पूरे यूपी में पेंशनर्स का महा-धरना।
  • आर-पार का अल्टीमेटम: अगर सरकार ने जल्द राहत नहीं दी, तो पूरे प्रदेश में होगा बड़ा आंदोलन।

जब डिजिटल व्यवस्था बुजुर्गों के लिए बन जाए ‘सज़ा’

आज के डिजिटल दौर में सरकारें कागजी काम खत्म करने और व्यवस्था को आसान बनाने के दावे तो खूब करती हैं, लेकिन जमीनी हकीकत इन दावों की पोल खोल देती है। उत्तर प्रदेश में इन दिनों कुछ ऐसा ही हाल है, जहां उम्र के आखिरी पड़ाव पर पहुंच चुके बुजुर्ग सेवानिवृत्त कर्मचारियों के लिए ‘ऑनलाइन चिकित्सा प्रतिपूर्ति’ किसी बड़े अभिशाप से कम नहीं बन गई है।

प्रांतीय आह्वान पर जनपद बिजनौर और अमरोहा समेत पूरे प्रदेश में पेंशनर्स एसोसिएशन के बैनर तले बुजुर्गों ने जो हुंकार भरी है, उसने साफ कर दिया है कि शासन के अव्यवहारिक फैसले अब बर्दाश्त से बाहर हो चुके हैं।

बिजनौर: इंदिरा बाल भवन में गूंजी बुजुर्गों की दहाड़

बिजनौर के इंदिरा बाल भवन में आयोजित एक दिवसीय विशाल धरने की अध्यक्षता जिलाध्यक्ष शिवध्यान सिंह ने की और संचालन जिला मंत्री योगेश्वर ने बेहद आक्रामक अंदाज में किया।

धरने को संबोधित करते हुए जिलाध्यक्ष शिवध्यान सिंह ने सरकार को आईना दिखाते हुए कहा, “जिन्होंने अपनी जवानी देश और प्रदेश की सेवा में गुजार दी, आज बुढ़ापे में उन्हें इलाज के पैसे पाने के लिए कंप्यूटर और इंटरनेट के पचड़ों में फंसाया जा रहा है। बुजुर्गों को क्या पता ऑनलाइन पोर्टल कैसे चलते हैं? सरकार तुंरत पुरानी ऑफलाइन व्यवस्था को बहाल करे।”

वरिष्ठ उपाध्यक्ष दिग्गी सिंह और संप्रेक्षक शशिकांत मिश्रा ने सरकार की खिंचाई करते हुए कहा कि 1 अक्टूबर 2026 से चिकित्सा विभाग द्वारा अचानक ऑफलाइन बिल लेना बंद किए जाने से कई बुजुर्गों के इलाज के पैसे फंस गए हैं। पैसे के अभाव में गंभीर रूप से बीमार पेंशनर्स का इलाज तक रुक गया है—क्या यही सुशासन है?

धरने के अंत में मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश सरकार के नाम एक सूत्रीय ज्ञापन अतिरिक्त मजिस्ट्रेट वंदना कुशवाहा को सौंपा गया। इस दौरान प्रीतम सिंह, ओमवीर सिंह मलिक, रामपाल सिंह अहलावत, बीके मित्तल, ऋषिपाल सिंह, शिवसिंह धनगर, बलजीत सिंह, मेहर सिंह समेत भारी संख्या में बुजुर्ग महिला व पुरुष उपस्थित रहे।

अमरोहा: शहीद पार्क कलेक्ट्रेट पर उमड़ा पेंशनर्स का सैलाब

उधर, जनपद अमरोहा में भी शहीद पार्क कलेक्ट्रेट पर पेंशनर्स का गुस्सा फूट पड़ा। जिलाध्यक्ष अनूप सिंह पैसल और जिला मंत्री राजेंद्र सिंह राणा के नेतृत्व में हुए इस प्रदर्शन के दौरान दोपहर में जिलाधिकारी के प्रतिनिधि के रूप में उप जिलाधिकारी कर्मेंद्र सिंह धरना स्थल पर पहुंचे और बुजुर्गों का ज्ञापन स्वीकार किया।

अमरोहा के अध्यक्ष अनूप सिंह पैसल ने दो टूक शब्दों में कहा कि “हमारी मांग बिल्कुल साफ है—चिकित्सा प्रतिपूर्ति बिल ऑनलाइन के साथ-साथ ऑफलाइन भी जमा किए जाएं। यदि सरकार ऑनलाइन पर अड़ी है, तो कम से कम ऑफलाइन आए बिलों को संबंधित विभाग खुद ऑनलाइन चढ़ाए, ताकि बुजुर्गों को साइबर कैफे के धक्के न खाने पड़ें।” इस दौरान कोषाध्यक्ष शिशुपाल सिंह, उपाध्यक्ष अमीपाल सिंह, योगेंद्र मोहन शर्मा, मास्टर जयपाल सिंह समेत तमाम लोग मौजूद रहे।

TargetTvLive की सीधी बात: संवेदनहीनता की इंतहा या प्रशासनिक लापरवाही?

विश्लेषणात्मक टिप्पणी: डिजिटलाइजेशन का मतलब जनता की सुविधा बढ़ाना होना चाहिए, न कि उन्हें तकनीकी जाल में उलझाकर प्रताड़ित करना। जिन लोगों ने अपने जीवन के सबसे बेहतरीन साल सरकारी व्यवस्था को संवारने में लगा दिए, आज उन्हें अपने ही हक के इलाज के पैसे के लिए बाबूओं और पोर्टलों के चक्कर काटने पड़ें, यह बेहद शर्मनाक है।

अगर सरकार ने जिद नहीं छोड़ी और ऑनलाइन के साथ ऑफलाइन का ‘विकल्प’ (Dual System) फिर से शुरू नहीं किया, तो यह नाराजगी आने वाले दिनों में एक बड़े प्रांतीय जन-आंदोलन का रूप ले लेगी, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।

  • रिपोर्ट : अवनीश त्यागी TargetTvLive
  • स्थान: बिजनौर / अमरोहा (उत्तर प्रदेश)

Leave a Comment

यह भी पढ़ें