गांधी-शास्त्री जयंती पर न्यायालय से बाल सुरक्षा का बड़ा संदेश, प्रभात फेरी में गूंजा POCSO जागरूकता का संकल्प
महापुरुषों को पुष्पांजलि के साथ बच्चों को अधिकारों की पाठशाला—न्यायिक अधिकारियों ने बताया POCSO कानून, हेल्पलाइन और कानूनी मदद का रास्ता
बिजनौर, 2 अक्टूबर। गांधी जयंती और पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की जयंती पर बिजनौर जनपद न्यायालय परिसर में शुक्रवार को श्रद्धा, राष्ट्रभावना और विधिक जागरूकता का अनूठा संगम दिखाई दिया। महात्मा गांधी और लाल बहादुर शास्त्री के चित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें नमन किया गया तो दूसरी ओर स्कूली बच्चों की प्रभात फेरी के जरिए बाल सुरक्षा और POCSO कानून के प्रति जागरूकता का संदेश समाज तक पहुंचाया गया।
Target TV Live के लिए अवनीश त्यागी की विशेष रिपोर्ट
पुष्पांजलि से शुरू हुआ कार्यक्रम, बाल अधिकारों के संदेश तक पहुंचा
जनपद न्यायालय परिसर में जनपद न्यायाधीश/अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकरण संजय कुमार-VII सहित न्यायिक अधिकारियों ने महात्मा गांधी और लाल बहादुर शास्त्री के चित्र पर पुष्प अर्पित किए।
प्रधान न्यायाधीश परिवार न्यायालय सुधीर कुमार, अपर जनपद न्यायाधीश प्रशान्त मित्तल, अपर जनपद न्यायाधीश सुनील कुमार-III, अपर जनपद न्यायाधीश/ईसी एक्ट लोकेश नागर सहित अन्य न्यायिक अधिकारी, जिला बार एसोसिएशन के अध्यक्ष और चीफ लीगल एड डिफेंस काउंसिल मौजूद रहे।
वक्ताओं ने गांधी और शास्त्री के जीवन दर्शन, सादगी, सत्य, अनुशासन और राष्ट्रसेवा के मूल्यों को याद करते हुए उनके आदर्शों को वर्तमान पीढ़ी के लिए प्रासंगिक बताया।
जब बच्चों के कदम बढ़े तो न्यायालय परिसर से निकला जागरूकता का संदेश
कार्यक्रम का अगला चरण सीधे बच्चों और समाज की सुरक्षा से जुड़ा था। जनपद न्यायाधीश, प्रधान न्यायाधीश परिवार न्यायालय और अपर जनपद न्यायाधीश प्रथम ने हरी झंडी दिखाकर प्रभात फेरी को रवाना किया।
जनपद न्यायालय के मुख्य द्वार से शुरू हुई प्रभात फेरी शक्ति चौक से होकर वापस न्यायालय परिसर पहुंची। हाथों में जागरूकता का संदेश और कदमों में अनुशासन लिए छात्र-छात्राओं ने बाल सुरक्षा को लेकर समाज का ध्यान आकर्षित किया।
राजकीय इंटर कॉलेज, राजकीय बालिका इंटर कॉलेज, केपीएस कन्या इंटर कॉलेज और आरजेपी इंटर कॉलेज के शिक्षक-शिक्षिकाओं तथा छात्र-छात्राओं के साथ जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के कर्मचारी और पराविधिक स्वयंसेवक भी अभियान में शामिल रहे।
POCSO कानून: बच्चों की सुरक्षा के लिए क्या जानना जरूरी?
कार्यक्रम में जनपद न्यायाधीश ने POCSO Act, 2012 को बच्चों के यौन अपराधों से संरक्षण से संबंधित महत्वपूर्ण कानून बताते हुए इसके प्रमुख प्रावधानों की जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि यह कानून 18 वर्ष से कम आयु के बच्चों को यौन अपराधों से सुरक्षा देने के लिए बनाया गया है। कानून बच्चों के खिलाफ यौन अपराधों से जुड़े मामलों की सुनवाई के लिए विशेष व्यवस्था और त्वरित न्याय की दिशा में प्रावधान करता है।
खास बात यह कि POCSO कानून जेंडर न्यूट्रल है। यानी इसके तहत लड़के और लड़कियां दोनों संरक्षण के दायरे में आते हैं।
25 सितंबर से 1 अक्टूबर तक स्कूलों में पहुंचा कानून का संदेश
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण ने केवल एक दिन का कार्यक्रम आयोजित करने के बजाय 25 सितंबर से 1 अक्टूबर 2026 तक विद्यालयों में POCSO जागरूकता अभियान चलाया।
राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के दिशा-निर्देशों के तहत जनपद के न्यायिक अधिकारियों ने विभिन्न विद्यालयों में पहुंचकर प्रार्थना सभा के दौरान बच्चों को POCSO अधिनियम के प्रावधानों की जानकारी दी।
इस अभियान का उद्देश्य बच्चों को केवल कानून का नाम बताना नहीं, बल्कि उन्हें यह समझाना था कि किसी भी असुरक्षित स्थिति में वे सहायता कैसे प्राप्त कर सकते हैं और कानून उनकी किस प्रकार मदद कर सकता है।
ADR सेंटर में भी बच्चों को दी गई कानूनी जानकारी
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के एडीआर सेंटर में आयोजित जागरूकता शिविर में सचिव स्वाति चन्द्रा, सिविल जज (जू.डी.) स्वाति वर्मा, सिविल जज (जू.डी.)/एफटीसी अंजलिका प्रियदर्शनी और पीठासीन अधिकारी किशोर न्याय बोर्ड हुमा ने बच्चों को POCSO अधिनियम के बारे में विस्तार से जानकारी दी।
बच्चों को समझाया गया कि 18 वर्ष से कम उम्र के बच्चे के साथ यौन अपराध होने की स्थिति में कानून के तहत कार्रवाई का प्रावधान है। साथ ही बच्चों की सुरक्षा, न्याय और पुनर्वास से जुड़े पहलुओं की जानकारी भी दी गई।
संकट की घड़ी में नंबर याद रखें—15100, 1098 और 112
जागरूकता कार्यक्रम में बच्चों को जरूरी हेल्पलाइन नंबर भी बताए गए।
NALSA हेल्पलाइन—15100
चाइल्ड हेल्पलाइन—1098
पुलिस हेल्पलाइन—112
इन नंबरों की जानकारी बच्चों और उनके आसपास मौजूद लोगों के लिए इसलिए महत्वपूर्ण है कि किसी आपात स्थिति में सहायता पाने के लिए उन्हें पता हो कि किस माध्यम से संपर्क करना है।
गांधी और शास्त्री की जयंती पर कानून और समाज के बीच सेतु
गांधी और शास्त्री की जयंती पर आयोजित यह कार्यक्रम केवल पुष्पांजलि और प्रभात फेरी तक सीमित नहीं रहा। न्यायालय परिसर से बच्चों तक कानून की जानकारी पहुंचाने की पहल ने कार्यक्रम को सामाजिक सरोकार से जोड़ दिया।
बाल यौन अपराधों के मामलों में कानून की जानकारी, समय पर सहायता और संस्थागत व्यवस्था की जानकारी बच्चों तथा अभिभावकों के लिए महत्वपूर्ण है। जागरूकता का उद्देश्य भय पैदा करना नहीं, बल्कि बच्चों को उनके अधिकारों और उपलब्ध सहायता तंत्र से परिचित कराना है।
Target TV Live विश्लेषण
महापुरुषों को याद करने का अर्थ केवल उनके चित्र पर फूल चढ़ाना नहीं, बल्कि उनके मूल्यों को समाज के व्यवहार में उतारना भी है। गांधी के सत्य और शास्त्री के अनुशासन के संदेश को बाल सुरक्षा और विधिक जागरूकता से जोड़ना इसी दिशा में एक प्रयास के रूप में देखा जा सकता है।
POCSO जैसे कानून की प्रभावशीलता केवल कानूनी प्रावधानों पर निर्भर नहीं करती। बच्चे, अभिभावक, शिक्षक और समाज यदि अपने अधिकार और जिम्मेदारियां समझें, तभी कानून की जानकारी वास्तविक सुरक्षा में बदल सकती है।
इसीलिए गांधी-शास्त्री जयंती पर न्यायालय परिसर से निकली यह प्रभात फेरी केवल रास्ते पर चलते बच्चों की रैली नहीं थी—यह बाल सुरक्षा के प्रति समाज को जागरूक करने की एक सार्वजनिक पहल थी।
— अवनीश त्यागी
Target TV Live | विशेष रिपोर्ट, बिजनौर












