गांधी-शास्त्री जयंती पर दिव्यांगजनों को मिला आत्मनिर्भरता का पहिया, डीएम उमेश प्रताप सिंह ने बांटे ट्राईसाइकिल-बैसाखी

कलेक्ट्रेट में सहायक उपकरण वितरण शिविर, डीएम बोले—पात्र दिव्यांगजन तक हर हाल में पहुंचे सरकारी योजनाओं का लाभ
बिजनौर, 02 अक्टूबर।
गांधी जयंती और पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की जयंती पर बिजनौर कलेक्ट्रेट परिसर में आयोजित सहायक उपकरण वितरण शिविर ने समारोह को सामाजिक सरोकार से जोड़ दिया। दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग की ओर से आयोजित शिविर में जिलाधिकारी उमेश प्रताप सिंह ने दिव्यांगजनों को ट्राईसाइकिल, बैसाखी सहित विभिन्न कृत्रिम एवं सहायक उपकरण वितरित किए।
उपकरण हाथों में आते ही लाभार्थियों के चेहरों पर दिखाई दी खुशी ने यह संदेश दिया कि किसी जरूरतमंद के लिए छोटी-सी सहायता भी उसके जीवन में बड़े बदलाव का माध्यम बन सकती है।
सहायक उपकरण से सुविधा, आत्मनिर्भरता को मिलेगी रफ्तार
जिलाधिकारी उमेश प्रताप सिंह ने कहा कि दिव्यांगजन समाज के महत्वपूर्ण और अभिन्न अंग हैं। उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ना और आत्मनिर्भर बनाने के लिए शासन की ओर से विभिन्न कल्याणकारी योजनाएं संचालित की जा रही हैं।
उन्होंने कहा कि दिव्यांगजनों को उनकी आवश्यकता के अनुरूप सहायक उपकरण उपलब्ध होने से दैनिक जीवन की गतिविधियां आसान होती हैं और आत्मविश्वास में भी वृद्धि होती है।
डीएम का संदेश स्पष्ट था कि दिव्यांगजन कल्याण केवल सहायता देने तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि उन्हें आत्मनिर्भर जीवन के लिए आवश्यक साधन और अवसर उपलब्ध कराना भी प्रशासन की जिम्मेदारी है।
कागजों से निकलकर जरूरतमंद तक पहुंचे योजनाओं का लाभ
जिलाधिकारी ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि जनपद के पात्र दिव्यांगजनों को शासन की योजनाओं और कार्यक्रमों का लाभ प्राथमिकता के आधार पर उपलब्ध कराया जाए।
उन्होंने विशेष रूप से ऐसे दिव्यांगजनों को चिन्हित करने के निर्देश दिए, जो पात्र होने के बावजूद अभी तक किसी सरकारी योजना का लाभ प्राप्त नहीं कर सके हैं। उनका कहना था कि कोई भी पात्र व्यक्ति जनकल्याणकारी योजनाओं से वंचित नहीं रहना चाहिए।
यानी प्रशासन की चुनौती अब केवल योजनाओं के संचालन तक नहीं, बल्कि उनकी वास्तविक पहुंच सुनिश्चित करने की भी है।
उपकरणों की गुणवत्ता और वितरण में पारदर्शिता जरूरी
डीएम ने विभागीय अधिकारियों को सहायक उपकरणों की गुणवत्ता पर विशेष ध्यान देने तथा वितरण प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखने के निर्देश दिए।
यह निर्देश इसलिए अहम है क्योंकि सरकारी सहायता का वास्तविक उद्देश्य तभी पूरा होता है, जब लाभार्थी को उसकी जरूरत के अनुरूप गुणवत्तापूर्ण उपकरण समय पर उपलब्ध हो और चयन से लेकर वितरण तक की प्रक्रिया स्पष्ट एवं पारदर्शी रहे।
लाभार्थियों को दी योजनाओं की जानकारी
शिविर के दौरान ट्राईसाइकिल, बैसाखी और अन्य सहायक उपकरण प्राप्त करने वाले दिव्यांगजनों ने प्रसन्नता व्यक्त की। विभागीय अधिकारियों ने उन्हें दिव्यांगजनों के लिए संचालित विभिन्न योजनाओं और सुविधाओं की जानकारी भी दी।
कलेक्ट्रेट के प्रशासनिक अधिकारी एवं कर्मचारी तथा दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग के अधिकारी-कर्मचारी इस अवसर पर मौजूद रहे।
गांधी-शास्त्री जयंती पर सेवा का संदेश
महात्मा गांधी और लाल बहादुर शास्त्री की जयंती पर आयोजित यह कार्यक्रम महज उपकरण वितरण तक सीमित नहीं रहा। इसने सामाजिक समावेशन और जरूरतमंद वर्गों को सम्मानजनक एवं आत्मनिर्भर जीवन उपलब्ध कराने के प्रशासनिक संकल्प को भी रेखांकित किया।
Target TV Live विश्लेषण:
दिव्यांगजन सशक्तिकरण की असली कसौटी केवल शिविर आयोजित करना नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि सरकारी सहायता की कतार में खड़ा अंतिम पात्र व्यक्ति भी सुविधा से वंचित न रहे। सहायक उपकरण किसी लाभार्थी के लिए महज सरकारी वितरण की वस्तु नहीं, बल्कि उसके लिए आगे बढ़ने की क्षमता और आत्मनिर्भरता का साधन बन सकते हैं।
— अवनीश त्यागी
Target TV Live, बिजनौर












