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नजीबाबाद जमीन कांड: फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाकर हड़प रहे थे 8.5 बीघा ज़मीन, ऐन मौके पर पुलिस ने बिगाड़ा खेल!

नजीबाबाद में करोड़ों की 2.156 हेक्टेयर कृषि भूमि हड़पने का पर्दाफाश: फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र और झूठी वसीयत के खेल में दो गिरफ्तार, लेखपाल समेत 4 पर गाज

बिजनौर / नजीबाबाद

कूटरचित (फर्जी) दस्तावेजों के बल पर दूसरे की कीमती जमीनों पर कब्जा करने वाले भू-माफिया और जालसाजों के खिलाफ नजीबाबाद पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। इंदौर निवासी पीड़ित की 2.1560 हेक्टेयर (लगभग 8.5 बीघा) कृषि भूमि को हड़पने की नीयत से फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र और मनगढ़ंत वसीयत बनाकर अदालत को गुमराह करने की साजिश का भंडाफोड़ हुआ है। मामले में तत्परता दिखाते हुए पुलिस ने दो मुख्य आरोपियों को धर दबोचा है, जबकि हल्का लेखपाल समेत अन्य नामजद आरोपियों की भूमिका की गहन जांच जारी है।

साजिश का सनसनीखेज खुलासा: इंदौर से जुड़ा बिजनौर का तार

पुलिस से प्राप्त जानकारी के अनुसार, मध्य प्रदेश के इंदौर निवासी कमलनाथ ने 30 सितंबर 2026 को थाना नजीबाबाद में एक गंभीर लिखित शिकायत दर्ज कराई। पीड़ित ने आरोप लगाया कि उनके स्वर्गीय पिता महेंद्रनाथ के नाम दर्ज गाटा संख्या 429 (रकबा 2.1560 हेक्टेयर) कृषि भूमि को हड़पने के लिए स्थानीय भू-माफियाओं और विभागीय तत्वों ने मिलकर एक बड़ा षड्यंत्र रचा।

जालसाजों ने जीवित रहते ही पीड़ित के पिता का फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र बनवा लिया और इसके आधार पर एक जाली वसीयत तैयार कर उसे अदालत में दाखिल कर दिया, ताकि जमीन का दाखिल-खारिज अपने नाम कराया जा सके।

BNS की संगीन धाराओं में मामला दर्ज, 24 घंटे में दो गिरफ्तार

मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए नजीबाबाद पुलिस ने तत्काल मु0अ0सं0 478/2026 दर्ज किया। पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 61(2) (आपराधिक षड्यंत्र), 318(4) (धोखाधड़ी), 338 (मूल्यवान प्रतिभूति का कूटकरण), 336(3) और 340(2) के तहत मुकदमा कायम किया।

1 अक्टूबर को मुखबिर की सटीक सूचना पर पुलिस टीम ने दबिश देकर दो प्रमुख आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया:

  1. धर्मपाल सिंह (पुत्र स्व. रतन सिंह) – निवासी महावतपुर-बिल्लौच, थाना नजीबाबाद।
  2. विजय शंकर (पुत्र स्व. उदयभान) – मूल निवासी ग्राम बरठी (देवरिया), वर्तमान निवासी मोहल्ला श्यामली स्टेट, नजीबाबाद।

हल्का लेखपाल समेत 4 पर नामजद एफआईआर

दर्ज एफआईआर के अनुसार, इस षड्यंत्र में चार लोग मुख्य रूप से नामजद हैं:

  • धर्मपाल सिंह (गिरफ्तार)
  • विजय शंकर (गिरफ्तार)
  • जसबिंदर सिंह (निवासी मोहल्ला अमीखानपुर, नजीबाबाद)
  • डेविड कुमार (हल्का लेखपाल, क्षेत्र मोहम्मद ताहरपुर, तहसील नजीबाबाद)

सरकारी तंत्र में शामिल हल्का लेखपाल का नाम सामने आने से इस बात की प्रबल संभावना है कि सरकारी अभिलेखों के साथ भी छेड़छाड़ करने का प्रयास किया गया था। पुलिस का कहना है कि शेष आरोपियों की भूमिका की जांच की जा रही है और जल्द ही उन पर भी कानूनी शिकंजा कसा जाएगा।

आरोपी धर्मपाल का पुराना आपराधिक इतिहास

गिरफ्तार आरोपी धर्मपाल सिंह का पुराना आपराधिक रिकॉर्ड भी सामने आया है। वर्ष 2016 में थाना कोतवाली शहर बिजनौर में उसके खिलाफ अपहरण, मारपीट और अवैध कब्जे जैसे गंभीर आरोपों में दो अलग-अलग मुकदमे (धारा 323/363/365/427/504 IPC एवं धारा 447/506 IPC) पहले से दर्ज हैं।

फोरेंसिक जांच और विभागीय प्रक्रिया पर टिकेगी आगे की कार्रवाई

यह मामला महज एक जमीन विवाद नहीं, बल्कि न्यायिक व प्रशासनिक व्यवस्था में फर्जी दस्तावेजों के सहारे सेंध लगाने की गंभीर कोशिश है। जांच अधिकारी अब इस बात की तहकीकात कर रहे हैं कि:

  • यह फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र किस विभाग से और किन दस्तावेजों के आधार पर जारी हुआ?
  • फर्जी वसीयत को सत्यापित कराने में किन-किन गवाहों और अधिकारियों की संलिप्तता रही?

संबंधित दस्तावेजों को फोरेंसिक जांच (हस्ताक्षर एवं अंगूठे के निशान का मिलान) के लिए भेजा जा रहा है।

सराहनीय पुलिस टीम

इस फर्जीवाड़े का त्वरित पर्दाफाश करने वाली टीम में प्रभारी निरीक्षक अमित कुमार, निरीक्षक वेदपाल सिंह पुंडीर, वरिष्ठ उपनिरीक्षक अमर सिंह राठौर, हेड कांस्टेबल अंकुश अहलावत और कांस्टेबल संदीप कुमार शामिल रहे।

संपादकीय टिप्पणी (Target TV Live): जमीन हड़पने के लिए मरे हुए व्यक्ति की फर्जी वसीयत और जीवित को मृत दिखाने का यह खेल प्रशासनिक लाचरता और भू-माफियाओं के दुस्साहस का परिचायक है। हालांकि, मामले में अंतिम फैसला अदालत साक्ष्यों के आधार पर करेगी, लेकिन पुलिस की इस त्वरित कार्रवाई से नजीबाबाद क्षेत्र में फर्जीवाड़ा करने वाले गिरोहों में हड़कंप मच गया है।

रिपोर्ट: अवनीश त्यागी (Target TV Live)

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