बुजुर्गों के अधिकारों की आवाज बनेगी कानून की जानकारी: बिजनौर में बताया—बच्चों से भरण-पोषण मांगने का भी है कानूनी अधिकार

अंतर्राष्ट्रीय वृद्धजन दिवस पर विदुर कोठी वृद्धाश्रम में विधिक जागरूकता शिविर; निरीक्षण में मिली कमियों को दूर करने के निर्देश, मेडिकल कैंप में वरिष्ठजनों का स्वास्थ्य परीक्षण
बिजनौर। TargetTvLive
उम्र का पड़ाव बढ़ने के साथ जरूरतें बदलती हैं, लेकिन सम्मान, सुरक्षा और अधिकारों की जरूरत कभी कम नहीं होती। अंतर्राष्ट्रीय वृद्धजन दिवस के अवसर पर बिजनौर में वरिष्ठ नागरिकों को उनके इन्हीं अधिकारों से परिचित कराने की पहल की गई। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, बिजनौर की ओर से 1 अक्टूबर 2026 को वृद्धाश्रम, विदुर कोठी में विधिक जागरूकता शिविर आयोजित कर वरिष्ठजनों को उनके कानूनी अधिकारों और उपलब्ध विधिक उपायों की जानकारी दी गई।
यह कार्यक्रम माननीय जनपद न्यायाधीश श्री संजय कुमार के मार्गदर्शन में आयोजित हुआ। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव स्वाति चंद्रा और नायब तहसीलदार हिमांशु शर्मा ने वरिष्ठजनों से संवाद किया और ‘माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों का भरण-पोषण तथा कल्याण अधिनियम, 2007’ के प्रमुख प्रावधानों की जानकारी दी।
जब सहारे की जरूरत हो, कानून बन सकता है सहारा
शिविर का सबसे महत्वपूर्ण पक्ष वरिष्ठजनों को उनके भरण-पोषण संबंधी कानूनी अधिकार से अवगत कराना रहा। सचिव स्वाति चंद्रा ने बताया कि अधिनियम के माध्यम से वरिष्ठ नागरिक अपने बच्चों से भरण-पोषण की मांग के लिए आवेदन कर सकते हैं।
वरिष्ठजनों को यह भी समझाया गया कि किसी समस्या के समाधान के लिए केवल अधिकार की जानकारी होना पर्याप्त नहीं है, बल्कि सही फोरम के समक्ष सही तरीके से आवेदन करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। इस दौरान उन्हें उपलब्ध विधिक प्रक्रिया के संबंध में आवश्यक जानकारी दी गई।
यानी संदेश स्पष्ट था—उम्र बढ़ने के साथ व्यक्ति की आवाज कमजोर नहीं होती; जरूरत पड़ने पर कानून उसके अधिकारों की रक्षा का माध्यम बन सकता है।
कागज से निकलकर व्यवस्था तक पहुंची पड़ताल
जागरूकता कार्यक्रम केवल भाषण और कानूनी जानकारी तक सीमित नहीं रहा। सचिव स्वाति चंद्रा और नायब तहसीलदार हिमांशु शर्मा ने वृद्धाश्रम का निरीक्षण भी किया।
निरीक्षण के दौरान सामने आई कमियों को दुरुस्त करने के लिए सचिव ने वृद्धाश्रम के प्रबंधक को आवश्यक निर्देश दिए। इससे कार्यक्रम का एक महत्वपूर्ण पहलू सामने आया—वरिष्ठ नागरिकों के अधिकारों की चर्चा के साथ उनके रहने की व्यवस्था और उपलब्ध सुविधाओं की स्थिति को भी मौके पर देखा गया।
कानूनी अधिकारों के साथ स्वास्थ्य की भी चिंता
वृद्धजनों के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए कार्यक्रम के दौरान मेडिकल कैंप का आयोजन किया गया। वृद्धाश्रम में रहने वाले वरिष्ठजनों ने चिकित्सकीय परीक्षण कराया और अपने स्वास्थ्य की जांच कराई।
वरिष्ठ नागरिकों के लिए कानूनी जागरूकता और स्वास्थ्य परीक्षण को एक ही मंच पर लाना कार्यक्रम को व्यावहारिक स्वरूप देता है। एक ओर जहां उन्हें अपने अधिकारों की जानकारी मिली, वहीं दूसरी ओर स्वास्थ्य संबंधी जांच की सुविधा भी उपलब्ध कराई गई।
सवाल सिर्फ अधिकार जानने का नहीं, उन्हें पाने का भी है
वरिष्ठ नागरिकों के अधिकारों से जुड़े कानूनों की जानकारी तभी सार्थक है, जब जरूरत पड़ने पर संबंधित व्यक्ति यह जानता हो कि शिकायत या आवेदन कहां और किस प्रक्रिया के तहत करना है। शिविर में इसी पहलू पर विशेष रूप से जानकारी दी गई।
विधिक जागरूकता का यही पक्ष महत्वपूर्ण है—कानून किताबों तक सीमित न रहे, बल्कि जरूरतमंद व्यक्ति को यह पता हो कि उसके अधिकार क्या हैं और उनके लिए उचित मंच तक कैसे पहुंचा जा सकता है।
कार्यक्रम में वृद्धाश्रम के सभी वृद्धजन, प्रबंधक, स्टाफ तथा जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के कर्मचारी उपस्थित रहे।
TargetTvLive की नजर में
अंतर्राष्ट्रीय वृद्धजन दिवस पर आयोजित यह कार्यक्रम एक महत्वपूर्ण संदेश छोड़ता है—वरिष्ठ नागरिकों की देखभाल केवल सामाजिक जिम्मेदारी नहीं, उनके विधिक अधिकारों का सम्मान भी है। जागरूकता, निरीक्षण और स्वास्थ्य परीक्षण को एक साथ जोड़कर आयोजित किया गया यह कार्यक्रम वरिष्ठजनों को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करने की दिशा में एक व्यावहारिक कदम रहा।
— अवनीश त्यागी
TargetTvLive डेस्क












