Target Tv Live

बिजनौर में लागू हुई धारा 163: त्योहारों, चुनावों और बदलती सियासत के बीच प्रशासन की यह चाल कितनी कारगर?

बिजनौर में लागू हुई धारा 163: त्योहारों, चुनावों और बदलती सियासत के बीच प्रशासन की यह चाल कितनी कारगर?

विशेष विश्लेषण | अवनीश त्यागी (TargetTvLive – बिजनौर/लखनऊ)

बिजनौर। आगामी 30 नवंबर तक बिजनौर जनपद में शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए जिला प्रशासन ने पूरी ताकत झोंक दी है। अपर जिला मजिस्ट्रेट (प्रशासन) अंशिका दीक्षित की ओर से जारी आदेश के तहत पूरे जिले में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 (पूर्व में सीआरपीसी की धारा 144) प्रभाव में आ चुकी है।

लेकिन यह सवाल उठना लाजमी है कि लगातार दो महीनों के लिए पूरे जनपद में धारा 163 लागू करने के पीछे की असली वजह क्या है? क्या यह सिर्फ त्योहारों में सुरक्षा देने का प्रशासनिक रूटीन है, या फिर इसके पीछे जिले की गर्माती राजनीति को नियंत्रित करने का बड़ा ताना-बाना है? आइए, इस प्रशासनिक आदेश के हर पहलू का गहराई से विश्लेषण करते हैं।

1. त्योहारों का मेला और चुनावों का दबाव: दोहरे मोर्चे पर प्रशासन

अक्टूबर और नवंबर का महीना उत्तर प्रदेश में सांस्कृतिक और राजनीतिक दृष्टि से बेहद संवेदनशील माना जाता है। बिजनौर जिले में आगामी दो महीनों के दौरान:

  • पर्व और जयंतियां: शारदीय नवरात्रि, दशहरा, दीपावली, भैयादूज, छठ पूजा, गुरु नानक जयंती और कार्तिक पूर्णिमा जैसे प्रमुख धार्मिक त्योहार एक के बाद एक लाइन में हैं।
  • राजनीतिक सरगर्मी: उत्तर प्रदेश विधान परिषद के बरेली-मुरादाबाद खंड शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र (द्विवार्षिक निर्वाचन 2026) का चुनाव भी इसी अवधि में प्रस्तावित है।

शिक्षक चुनाव को लेकर जिले में विभिन्न राजनीतिक दलों और शिक्षक संघों की गतिविधियां तेजी से बढ़ रही हैं। जब राजनीतिक रैलियां और धार्मिक जुलूस एक साथ एक ही समय पर हों, तो कानून-व्यवस्था बनाए रखना प्रशासन के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन जाता है।

2. असामाजिक तत्वों पर नकेल और खुफिया इनपुट

प्रशासन को मिली खुफिया जानकारियों के अनुसार, त्यौहारों और राजनीतिक रैलियों की आड़ में कुछ असामाजिक या अवांछनीय तत्व क्षेत्र का सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने की फिराक में हो सकते हैं। पश्चिम उत्तर प्रदेश के संवेदनशील जिलों में शामिल बिजनौर में छोटी सी घटना भी बड़े विवाद का रूप ले सकती है।

यही वजह है कि प्रशासन ने किसी भी घटना का इंतजार करने के बजाय ‘प्रोएक्टिव अप्रोच’ अपनाते हुए धारा 163 की ढाल तैयार की है।

3. नए कानून की परीक्षा: BNSS धारा 163 बनाम BNS धारा 223

इस आदेश की सबसे अहम बात यह है कि यह कार्रवाई नए आपराधिक कानूनों के तहत की गई है:

  • BNSS की धारा 163: इसके तहत बिना अनुमति के सार्वजनिक स्थानों पर 5 से अधिक लोगों के इकट्ठा होने, जुलूस निकालने, हथियार या लाठी-डंडे लेकर चलने और तेज आवाज में डीजे बजाने पर पाबंदी है।
  • BNS की धारा 223 (उल्लंघन की सजा): यदि कोई व्यक्ति धारा 163 के नियमों की अवहेलना करता है, तो उसके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 223 के तहत सख्त दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।

4. आम जनता और राजनीतिक दलों पर इसका क्या पड़ेगा असर?

  • आम नागरिक: धार्मिक अनुष्ठानों और त्योहारों को शांतिपूर्वक मनाने पर कोई रोक नहीं है, बशर्ते भीड़ प्रबंधन और ध्वनि विस्तारक यंत्रों के नियमों का पालन किया जाए।
  • राजनीतिक दल और प्रत्याशी: चुनाव प्रचार या सभाओं के लिए अब स्थानीय पुलिस और प्रशासन से लिखित अनुमति लेना अनिवार्य होगा। बिना अनुमति के की गई जनसभा को सीधे कानून का उल्लंघन माना जाएगा।

TargetTvLive का निष्कर्ष

जिला प्रशासन की यह पहल बिजनौर में अमन-चैन बनाए रखने के लिए बेहद जरूरी कदम मानी जा रही है। हालांकि, सबसे बड़ी परीक्षा इस आदेश के सही क्रियान्वयन की होगी। प्रशासन को यह सुनिश्चित करना होगा कि आम जनता को त्योहारों में सहूलियत मिले और शरारती तत्वों पर कानून का शिकंजा कस सके।

TargetTvLive निष्पक्षता से इस पूरी व्यवस्था पर अपनी पैनी नजर बनाए रखेगा।

Leave a Comment

यह भी पढ़ें