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अस्पतालों के औचक निरीक्षण का ऐलान! बिजनौर DM के इस एक फैसले से अफसरों में मची खलबली

कड़ा रुख: ‘काम नहीं हुआ तो एक्शन होगा’, बिजनौर DM उमेश प्रताप सिंह ने अफसरों को दी खुली चेतावनी; 1 अक्टूबर से संचारी रोग पर प्रहार

बिजनौर (targetTvLive/अवनीश त्यागी)। जिला प्रशासन अब जनस्वास्थ्य और शिक्षा को लेकर किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त करने के मूड में नहीं है। कलेक्ट्रेट स्थित महात्मा विदुर सभागार में आयोजित जिला स्वास्थ्य समिति की समीक्षा बैठक में जिलाधिकारी उमेश प्रताप सिंह ने अधिकारियों को सीधे शब्दों में सख्त संदेश दिया। डीएम ने साफ कहा कि सरकार स्वास्थ्य सेवाओं और कल्याणकारी योजनाओं के लिए पर्याप्त बजट उपलब्ध करा रही है, इसके बाद भी अगर धरातल पर नतीजे नहीं दिखे तो संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कड़ी दंडात्मक कार्रवाई तय है।

1 अक्टूबर से 31 अक्टूबर 2026 तक चलने वाले विशेष संचारी रोग नियंत्रण अभियान की पूर्व तैयारियों को परखते हुए जिलाधिकारी ने हर विभाग को सटीक माइक्रो प्लान बनाकर आपसी समन्वय के साथ धरातल पर उतरने के निर्देश दिए।

स्वास्थ्य व शिक्षा: ‘नेशनल बिल्डिंग’ के दो मजबूत पिलर

बैठक की अध्यक्षता करते हुए जिलाधिकारी उमेश प्रताप सिंह ने प्रशासनिक सोच को स्पष्ट करते हुए कहा कि शिक्षा और स्वास्थ्य किसी भी नागरिक के जीवन के सबसे अहम पहलू हैं। यही दोनों विषय ‘नेशनल बिल्डिंग’ (राष्ट्र निर्माण) के असली आधार हैं।

उन्होंने स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों और डॉक्टरों को ताकीद की कि वे केवल कागजी आंकड़ों तक सीमित न रहें, बल्कि सेवा भाव से काम करें। डीएम ने अस्पतालों में आने वाले मरीजों और उनके परिजनों के साथ सदव्यवहार और संवेदनशीलता बरतने पर विशेष जोर दिया।

“आगामी दिनों में जिला अस्पताल, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (CHC) और अन्य स्वास्थ्य सुविधाओं का औचक निरीक्षण करूंगा। जहां भी खामी मिली, वहां सीधी जवाबदेही तय होगी।” — उमेश प्रताप सिंह, जिलाधिकारी (बिजनौर)

अस्पतालों के औचक निरीक्षण का ऐलान और संस्थागत प्रसव पर कड़ाई

डीएम ने स्पष्ट किया कि वे जल्द ही जिला अस्पताल, सीएचसी और पीएचसी का औचक निरीक्षण करेंगे। जननी सुरक्षा योजना (JSY) की समीक्षा के दौरान संस्थागत प्रसव के ग्राफ में अपेक्षित सुधार न होने पर उन्होंने गहरी नाराजगी जताई और जल्द सुधार न दिखने पर कार्रवाई की चेतावनी दी।

स्वास्थ्य सेवाओं की दक्षता बढ़ाने के लिए डीएम द्वारा जारी प्रमुख निर्देश:

  • कुपोषण पर स्पष्ट रिपोर्ट कार्ड: अति कुपोषित (SAM) बच्चों को कुपोषित श्रेणी में लाने तथा कुपोषित बच्चों को सामान्य श्रेणी में लाने का स्पष्ट प्रगति चार्ट अगली बैठक में अनिवार्य रूप से प्रस्तुत किया जाए।
  • समयबद्ध संवेदीकरण: अभियान की सफलता के लिए सभी संबंधित अधिकारियों व कर्मचारियों की संवेदीकरण (Sensitization) कार्यशालाएं समय से पूरी की जाएं।
  • डिजिटल योजनाओं की बिंदुवार ट्रैकिंग: ई-संजीवनी ऐप, ई-कवच पोर्टल, आरसीएफ (RCF) पोर्टल, परिवार नियोजन, टीबी उन्मूलन और नियमित टीकाकरण अभियानों की प्रगति की गहन समीक्षा की गई।

त्रिस्तरीय रणनीति: पंचायती राज, नगर निकाय और स्वास्थ्य विभाग का साझा प्रहार

1 अक्टूबर से 31 अक्टूबर तक चलने वाले इस विशेष अभियान की सफलता के लिए पंचायती राज, नगर निकाय, बाल विकास और स्वास्थ्य विभाग को एक साथ मैदान में उतारा जा रहा है। जलभराव व मच्छरजनित स्थितियों पर काबू पाने के लिए ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में फॉगिंग, लार्विसाइडल छिड़काव तथा स्वच्छता अभियानों की रियल-टाइम निगरानी सीधे माइक्रो प्लान के तहत की जाएगी।

बैठक में मुख्य विकास अधिकारी (CDO) रण विजय सिंह, मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) डॉ. कौशलेंद्र सिंह, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक (CMS) जिला पुरुष व महिला अस्पताल सहित जिले के सभी एमओआईसी (MOIC) और संबंधित प्रशासनिक अधिकारी उपस्थित रहे।

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