Bijnor Land Scam:
कूटचित दस्तावेजों पर करोड़ों की सरकारी जमीन का सौदा! जानिए कैसे रचा गया 1.265 हेक्टेयर का भू-माफिया खेल; हरेवली से आरोपी दंपति गिरफ्तार
By अवनीश त्यागी (Avnish Tyagi) | targetTvLive.com बिजनौर (उत्तर प्रदेश) | अपडेटेड: 27 सितंबर 2026
बिजनौर (शेरकोट)। उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले में सरकारी (ग्राम समाज) संपत्तियों पर नजर गड़ाए भू-माफियाओं के एक बड़े सिंडिकेट का पर्दाफाश हुआ है। धामपुर तहसील के मौजा रघुनाथपुर स्थित 1.265 हेक्टेयर (खसरा संख्या 103) पट्टेशुदा सरकारी जमीन को फर्जी कागजात तैयार कर हड़पने और उसका अवैध क्रय-विक्रय करने के मामले में शेरकोट पुलिस ने बड़ी सफलता हासिल की है। पुलिस ने लंबे समय से कानून की गिरफ्त से दूर चल रहे वांछित आरोपी दंपति को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया है।
गहराई से पड़ताल: कैसे रचा गया 1.265 हेक्टेयर जमीन का षड्यंत्र?
1. सरकारी अभिलेखों में कूटरचना (Document Tampering): अनुसंधान से पता चलता है कि यह फर्जीवाड़ा रातों-रात नहीं हुआ, बल्कि इसके पीछे एक सुव्यवस्थित आपराधिक षड्यंत्र (120B IPC) काम कर रहा था। आरोपियों ने तहसील और राजस्व अभिलेखों की आड़ लेकर फर्जी और जाली कागजात (467/468 IPC) तैयार किए।
2. पट्टे की जमीन को निजी संपत्ति दर्शाना: ग्राम समाज की पट्टेशुदा भूमि नियमतः गैर-हस्तांतरणीय (Non-transferable) होती है। लेकिन भू-माफियाओं ने फर्जी हस्तांतरण पत्र और कूटचित दस्तावेज दिखाकर इस जमीन को अपनी निजी संपत्ति के रूप में पेश किया और बाजार में ऊंचे दामों पर बेचने का जाल बिछाया।
3. लेखपाल की मुस्तैदी से भंडाफोड़: 16 जुलाई 2025 को जब क्षेत्रीय लेखपाल (नागरपुर खड़कसैन) यशवीर सिंह ने राजस्व रिकॉर्ड का भौतिक सत्यापन किया, तब फर्जीवाड़े की परतें खुलीं। इसके बाद उन्होंने तत्काल थाना शेरकोट में तहरीर देकर मु0अ0सं0 122/2025 दर्ज कराया।
विवेचना का दायरा: कैसे कसता गया शिकंजा?
प्रारंभिक प्राथमिकी में राकेश पुत्र मथुरा, शबा रहमान और अन्य के नाम सामने आए थे। लेकिन जब शेरकोट पुलिस ने कड़ियों को जोड़ना शुरू किया, तो इस नेक्सस का असली चेहरा सामने आया।
- पुलिस कार्रवाई का पहला चरण: शेरकोट पुलिस ने त्वरित कानूनी कार्रवाई करते हुए पूर्व में नामजद आरोपियों—शबा परवीन, नगमा परवीन, बुशरा परवीन, मन्तशा परवीन, अमित और समशुद्दीन के खिलाफ विधिक प्रक्रिया पूरी की।
- विवेचना में नए नाम प्रकाश में आना: गहन जांच और वित्तीय/दस्तावेजी साक्ष्यों के आधार पर ग्राम हरेवली निवासी अजीमुद्दीन, उसकी पत्नी आसमा खातून और फहीम के नाम इस घोटाले के मुख्य सूत्रधारों के रूप में उजागर हुए।
गिरफ्तारी का विवरण: हरेवली में घेराबंदी कर दबोचा
रविवार (27 सितंबर 2026) को थानाध्यक्ष रामप्रताप सिंह के कुशल नेतृत्व में शेरकोट पुलिस ने सटीक इनपुट के आधार पर ग्राम हरेवली में दबिश दी। पुलिस टीम ने मौके से दोनों मुख्य अभियुक्तों को गिरफ्तार कर लिया:
- अजीमुद्दीन पुत्र अहतसामुद्दीन (निवासी: ग्राम हरेवली, थाना शेरकोट)
- आसमा खातून पत्नी अजीमुद्दीन (निवासी: ग्राम हरेवली, थाना शेरकोट)
दोनों आरोपियों के खिलाफ वैधानिक औपचारिकताएं पूर्ण कर उन्हें संबंधित न्यायालय में पेश किया गया, जहाँ से उन्हें जेल भेज दिया गया है।
मुख्य पुलिस टीम:
- रामप्रताप सिंह (थानाध्यक्ष, थाना शेरकोट)
- मोहित चौधरी (उपनिरीक्षक)
- चैन सिंह (हेड कांस्टेबल – 652)
- यशवीर राठी (हेड कांस्टेबल – 647)
- आशु (महिला आरक्षी – 761)
कानूनी विश्लेषण: किन धाराओं में फंसा है आरोपी ग्रुप?
आईपीसी धाराअपराध का विवरणसंभावित सजाधारा 420धोखाधड़ी और संपत्ति के लिए बेईमानी से प्रेरित करना7 साल तक की कैद और जुर्मानाधारा 467मूल्यवान प्रतिभूति/दस्तावेज की कूटरचना (फर्जीवाड़ा)आजीवन कारावास या 10 साल तक की कैदधारा 468धोखाधड़ी के उद्देश्य से फर्जी दस्तावेज तैयार करना7 साल तक की कैदधारा 471कूटरचित (जाली) दस्तावेज का असली के रूप में इस्तेमालमूल अपराध के समान धारा 120Bआपराधिक षड्यंत्र रचनामूल अपराध के अनुसार
targetTvLive विशेष सलाह: प्रॉपर्टी फ्रॉड से बचने के 3 अचूक नियम
- ‘UP Bhulekh’ पर 1359 फसली का मिलान करें: किसी भी ग्रामीण जमीन को खरीदने से पहले यह जांचें कि जमीन का मूल खाता ‘श्रेणी 1-क’ (संक्रमणीय भूमिधर) है या ‘ग्राम समाज/पट्टा’।
- तहसीलदार कार्यालय से ‘143/144’ की स्थिति जांचें: गैर-कृषि या पट्टे की जमीन का लैंड यूज़ बदले बिना बैनामा कराना गैर-कानूनी है।
- सार्वजनिक सूचना (Public Notice): जमीन की अंतिम रजिस्ट्री से पहले स्थानीय समाचार पत्रों में आपत्ति आमंत्रण (Public Notice) जरूर प्रकाशित करवाएं।
क्षेत्र की हर प्रशासनिक, कानूनी और इन-डेप्थ खबरों की विस्तृत कवरेज के लिए देखते रहिए targetTvLive.com












