बिजनौर में DM के आदेश की 24 घंटे में उड़ीं धज्जियां! ‘नो-प्रोटेस्ट ज़ोन’ बने कलेक्ट्रेट में गूंजा भारतीय किसान संघ का प्रदर्शन; CM को भेजीं 12 मांगें
विशेष ग्राउंड रिपोर्ट: अवनीश त्यागी | TargetTvLive
बिजनौर (25 सितंबर)। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में प्रशासनिक फरमानों और किसान आंदोलनों के बीच का टकराव अब सीधे शक्ति-परीक्षण के मोड़ पर आ पहुंचा है। जिला मजिस्ट्रेट उमेश प्रताप सिंह द्वारा कलेक्ट्रेट परिसर को ‘नो-प्रोटेस्ट ज़ोन’ (निषिद्ध क्षेत्र) घोषित कर केवल ‘इंदिरा बाल भवन’ में प्रदर्शन की अनुमति देने के आदेश के अभी 24 घंटे भी पूरे नहीं हुए थे कि भारतीय किसान संघ ने इस प्रतिबंध को दरकिनार करते हुए कलेक्ट्रेट परिसर के भीतर ही ज़ोरदार धरना-प्रदर्शन कर दिया।
आदेश की अनदेखी: कलेक्ट्रेट में ही जमाया डेरा
कल ही भीम आर्मी और आजाद समाज पार्टी (ASP) के ताज़ा आंदोलनों के बाद जिला प्रशासन ने सुप्रीम कोर्ट की नज़ीरों और 2018 के शासनादेश का हवाला देकर कलेक्ट्रेट में प्रदर्शन पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया था। हालांकि, आज भारतीय किसान संघ के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने प्रशासनिक बंदिशों को ठेंगा दिखाते हुए कलेक्ट्रेट परिसर में ही अपनी आवाज़ बुलंद की।
किसान नेताओं का सीधा रुख रहा कि कलेक्ट्रेट किसानों और फरियादियों का मुख्य प्रशासनिक केंद्र है, इसलिए वे इंदिरा बाल भवन जैसे सीमित दायरे में जाकर अपनी मांगों को दबाने नहीं देंगे।
गन्ने के ₹500 दाम से लेकर सम्मान निधि तक: CM के नाम 12 सूत्रीय ज्ञापन
धरना-प्रदर्शन के बाद भारतीय किसान संघ ने जिला प्रशासन के माध्यम से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नाम 12 प्रमुख मांगों का ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में उठाई गईं मुख्य मांगें निम्नलिखित हैं:
- किसान सम्मान निधि व गन्ना मूल्य: किसान सम्मान निधि को ₹6,000 से बढ़ाकर ₹12,000 वार्षिक करने और गन्ने का मूल्य ₹500 प्रति क्विंटल घोषित करने की मांग।
- वित्तीय व भूमि सुधार: किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) को पूरी तरह ब्याजमुक्त करने, खतौनी में दर्ज लिपिकीय त्रुटियों को दूर करने और भूमि अधिग्रहण में किसानों के अधिकारों की रक्षा करने की अपील।
- सुरक्षा व क्षेत्रीय मुद्दे: बिजनौर में गुलदार (लेपर्ड) के जानलेवा हमलों से किसानों की सुरक्षा के लिए स्थायी इंतज़ाम करने, रावली तटबंध निर्माण में हुई अनियमितताओं की जांच कराने और बंगाली क्षेत्र की भूमि श्रेणी को ‘ख’ से ‘क’ में परिवर्तित करने की पुरज़ोर मांग।
- अन्य मांगें: सभी किसानों के आयुष्मान कार्ड बनाने, मंडियों का आधुनिकीकरण करने तथा नकली खाद-बीज और दवाओं की बिक्री पर पूरी तरह रोक लगाने की मांग शामिल रही।
प्रदर्शन में उत्तर प्रदेश संगठन मंत्री शिवकांत जी, प्रांत अध्यक्ष संजीव जी, प्रांत संगठन मंत्री सुनील जी, जिला अध्यक्ष राजकुमार जी, और जिला महिला प्रमुख सीमा त्यागी सहित सैकड़ों कार्यकर्ता मौजूद रहे।
इतिहास ने खुद को दोहराया: पूर्व DM अंकित अग्रवाल के कार्यकाल की याद ताज़ा
बिजनौर कलेक्ट्रेट को नो-प्रोटेस्ट ज़ोन बनाने की राह हमेशा से चुनौतीपूर्ण रही है। इससे पूर्व तत्कालीन डीएम अंकित अग्रवाल ने भी कलेक्ट्रेट को प्रदर्शन-मुक्त कराने के लिए सख्त कदम उठाए थे। लेकिन उस समय भी किसान यूनियनों के अभूतपूर्व विरोध और लामबंदी के आगे प्रशासन को बैकफुट पर आना पड़ा था।
आज 24 घंटे के भीतर भारतीय किसान संघ द्वारा दिए गए इस धरने ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि बिजनौर में प्रशासनिक आदेशों पर किसान संगठनों की ताकत भारी पड़ती रही है।
TargetTvLive विश्लेषण: अब क्या करेंगे डीएम उमेश प्रताप सिंह?
भीम आर्मी व ASP के प्रदर्शन के बाद जारी किए गए इस कड़े आदेश के टूटने से प्रशासनिक साख पर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। अब देखना यह होगा कि कलेक्ट्रेट की सुरक्षा और सुप्रीम कोर्ट की नज़ीरों का हवाला देने वाले डीएम उमेश प्रताप सिंह इस आदेश उल्लंघन पर क्या कड़ा प्रशासनिक या कानूनी कदम उठाते हैं, या फिर इतिहास दोहराते हुए प्रशासन एक बार फिर खामोशी अख्तियार करेगा।
TargetTvLive के लिए बिजनौर से अवनीश त्यागी की विशेष ग्राउंड रिपोर्ट।












