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22 में से सिर्फ 2 शिकायतों का समाधान: बिजनौर तहसील में ‘संपूर्ण समाधान दिवस’ बना रस्म अदायगी!

22 में से सिर्फ 2 शिकायतों का समाधान: बिजनौर तहसील में ‘संपूर्ण समाधान दिवस’ बना रस्म अदायगी!

बिजनौर | टारगेट टीवी लाइव (targetTvLive) | अवनीश त्यागी की विशेष रिपोर्ट 19 सितंबर 2026

बिजनौर (उत्तर प्रदेश): जब फरियादी इस उम्मीद के साथ दूर-दराज के गांवों से सरकारी दफ्तरों तक पहुंचते हैं कि ‘संपूर्ण समाधान दिवस’ में उनकी सुनवाई होगी, तब कागजी आंकड़ों की हकीकत उनके अरमानों पर पानी फेर देती है। शनिवार को तहसील बिजनौर में जिलाधिकारी जसजीत कौर की अध्यक्षता में आयोजित समाधान दिवस की प्रशासनिक रिपोर्ट खुद अफसरों की कार्यशैली पर बड़ा सवालिया निशान खड़ा कर रही है।

शनिवार को आयोजित इस समाधान दिवस में कुल 22 शिकायती पत्र आए, लेकिन पूरे अमले की मौजूदगी के बावजूद मौके पर मात्र 2 शिकायतों का ही निस्तारण हो सका। आखिर बाकी 20 फरियादी किस आस में घर लौटे? यह आंकड़ा अपने आप में एक बड़ा प्रश्नचिह्न है कि क्या समाधान दिवस वाकई जनता के समाधान के लिए है या केवल एक प्रशासनिक खानापूर्ति बन चुका है।

20 मामलों में फिर मिला ‘तारीख’ का आश्वासन

तहसील परिसर में शनिवार को जब फरियादी अपनी अर्जियां लेकर पहुंचे, तो दो भाग्यशाली मामलों को छोड़कर बाकी 20 मामलों को संबंधित विभागों के सुपुर्द कर दिया गया।

स्थानीय लोगों और फरियादियों का दबी जुबान में कहना है कि विभागों को शिकायतें सौंपने के बाद मामले फिर फाइलों में धूल फांकने लगते हैं। अगर उच्च अधिकारियों की मौजूदगी के बाद भी 90% से अधिक मामले लंबित रह जाएं, तो फिर ‘त्वरित समाधान’ का दावा कितना हकीकत है और कितना फसाना?

डीएम की सख्त हिदायत: कागजों पर नहीं, जमीन पर दिखे निस्तारण

मामले की गंभीरता और पेंडेंसी को देखते हुए जिलाधिकारी जसजीत कौर ने अधिकारियों की ढिलाई पर कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने मौके पर मौजूद आलाधिकारियों को सख्त लहजे में चेताया:

“जनसामान्य की शिकायतों का त्वरित और गुणवत्तापूर्ण समाधान शासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। यदि शिकायतों के निस्तारण में किसी भी स्तर पर लापरवाही या हीला-हवाली पाई गई, तो संबंधित अधिकारी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी।”

डीएम ने स्पष्ट किया कि केवल दफ्तरों में बैठकर फाइलों का निस्तारण न दिखाया जाए, बल्कि अधिकारी खुद मौके पर जाकर (स्थलीय सत्यापन) पारदर्शी जांच करें और शिकायतकर्ता को समाधान से अवगत कराएं।

अफसरशाही का भारी-भरकम अमला, फिर भी परिणाम सिफर?

समाधान दिवस के नाम पर तहसील परिसर में उप जिलाधिकारी (SDM) सदर, तहसीलदार सदर सहित लगभग सभी प्रमुख विभागों के विभागाध्यक्ष, अधिकारी और कर्मचारी मौजूद थे। जनता का सवाल सीधा है—जब एक ही छत के नीचे पूरा प्रशासनिक ढांचा मौजूद था, तब भी महज 9% शिकायतों का ही मौके पर समाधान क्यों हो पाया? क्या फरियादी इसी तरह बार-बार दफ्तरों के चक्कर लगाने को मजबूर रहेंगे?

जनता की उम्मीद और प्रशासनिक इम्तिहान

जिलाधिकारी के कड़े निर्देशों के बाद अब गेंद निचले अधिकारियों के पाले में है। देखना यह होगा कि जिन 20 शिकायतों को विभागों को सौंपा गया है, उन पर वास्तव में जमीनी कार्रवाई होती है या फरियादियों को अगले ‘समाधान दिवस’ में फिर से अपनी अर्जी लगानी पड़ेगी।

बिजनौर और आसपास की हर प्रशासनिक और जनहित से जुड़ी खबरों के विश्लेषणात्मक कवरेज के लिए देखते रहिए टारगेट टीवी लाइव (targetTvLive)।

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