बिजनौर में अब नहीं चलेगा नशे और ओवरलोडिंग का खेल! गौतम शर्मा ने अधिकारियों को दिया आर-पार का अल्टीमेटम
खेत से समाज तक — भाकियू जमींदार ने क्यों खोले एक साथ दो मोर्चे?
रिपोर्ट अवनीश त्यागी। TargetTvLive
बिजनौर । भारतीय किसान यूनियन जमींदार का सोमवार का शक्ति प्रदर्शन महज एक ज्ञापन कार्यक्रम नहीं था। यह किसान राजनीति के बदलते चरित्र का संकेत है। राष्ट्रीय अध्यक्ष गौतम शर्मा ने एक ही दिन में दो ऐसे मुद्दे उठाए जो सीधे तौर पर आम जनमानस से जुड़े हैं — युवाओं में नशा और सड़कों पर मौत बनकर दौड़ता ओवरलोड गन्ना।
पहला मोर्चा: नशे के खिलाफ सामाजिक युद्ध
पृष्ठभूमि: ग्रामीण क्षेत्रों में मेडिकल स्टोर प्रतिबंधित दवाओं की बिक्री का आसान जरिया बनते जा रहे हैं। युवा नशे की गिरफ्त में आ रहे हैं, परिवार टूट रहे हैं।
संगठन की रणनीति: गौतम शर्मा ने ड्रग इंस्पेक्टर पियूष शर्मा से मिलकर सिर्फ मांग नहीं रखी, बल्कि कार्रवाई का रोडमैप दिया — सघन जांच, दोषी स्टोर का लाइसेंस रद्द, कठोर कानूनी कार्रवाई। उनका बयान — “नशे के सौदागरों के लिए बिजनौर की धरती सुरक्षित नहीं होनी चाहिए” — सीधे जनभावनाओं को छूता है।
विश्लेषण: किसान संगठन द्वारा नशे जैसे सामाजिक मुद्दे को उठाना उसे केवल किसानों का संगठन नहीं, बल्कि सामाजिक आंदोलन के रूप में स्थापित करता है। इससे संगठन का जनाधार गांवों के हर घर तक पहुंचेगा।
दूसरा मोर्चा: गन्ना ओवरलोडिंग — हर साल की मौत की सड़क
पृष्ठभूमि: बिजनौर शुगर बेल्ट है। हर पेराई सत्र में मिलों द्वारा अवैध ट्रैक्टर-ट्रॉलों से ओवरलोड गन्ना ढुलाई कराई जाती है। इससे सड़क हादसे, जाम और सड़कों का टूटना आम है। प्रशासनिक मिलीभगत के आरोप लगते रहे हैं।
संगठन की रणनीति: इस बार भाकियू जमींदार ने सत्र शुरू होने का इंतजार नहीं किया। जिला गन्ना अधिकारी को अभी से निगरानी तंत्र सक्रिय करने की चेतावनी दी गई। तर्क साफ है — सत्र शुरू होने के बाद मिलें बहानेबाजी करेंगी, इसलिए घेराबंदी पहले से हो।
विश्लेषण: यह प्रो-एक्टिव पॉलिटिक्स है। संगठन ने मिल मालिकों और प्रशासन, दोनों पर दबाव बना दिया है। यदि हादसा हुआ तो जिम्मेदारी प्रशासन की होगी, क्योंकि चेतावनी पहले दी जा चुकी है।
नेतृत्व और एकता का संदेश
काफिले में राष्ट्रीय महासचिव राहुल पंडित, प्रदेश उपाध्यक्ष रविंद्र सिंह चौहान सहित शहजाद सलीम अंसारी, जमाल शेख, रशीद मंसूरी, भूरा शेख, असम अहमद, खुर्शीद, शौकत अली, इमरान अली, शोएब, शाकिर, जाकिर, अशोक उपाध्याय, जसविंदर सिंह की मौजूदगी महत्वपूर्ण है। हिंदू-मुस्लिम किसानों की संयुक्त भागीदारी इस आंदोलन को सांप्रदायिक राजनीति से ऊपर उठाकर सर्वसमाज का आंदोलन बनाती है।
आगे का रास्ता: क्या होगा?
प्रशासन पर दबाव: ड्रग विभाग को अब दिखावटी जांच से आगे बढ़कर कार्रवाई दिखानी होगी।
मिलों पर नकेल: गन्ना विभाग यदि अभी से सख्त हुआ तो सत्र में अव्यवस्था रुकेगी।
आंदोलन की जमीन तैयार: दोनों ही मांगें न मानी गईं तो भाकियू जमींदार को बड़ा आंदोलन छेड़ने का नैतिक आधार मिल चुका है।
निष्कर्ष: गौतम शर्मा ने एक तीर से दो निशाने साधे हैं — युवाओं के अभिभावकों का भरोसा और किसानों का हक। अब देखना होगा कि प्रशासन चेतावनी को गंभीरता से लेता है या बिजनौर एक बड़े आंदोलन की ओर बढ़ेगा।
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