अंगूठा लगवाया, फिर राशन भी नहीं दिया? मौजमपुर में डीलर पर गंभीर आरोप, डीएम से जांच की मांग
जुलाई-अगस्त के राशन को लेकर ग्रामीणों का बड़ा दावा—ई-पॉस मशीन पर अंगूठा लगवाने के बाद वितरण नहीं होने का आरोप; 5 किलो की जगह 4 किलो राशन देने की शिकायत ने उठाए सवाल
बिजनौर। TargetTvLive | विशेष : अवनीश त्यागी
सरकारी राशन व्यवस्था में ई-पॉस मशीन पर अंगूठा लगना राशन वितरण की प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा है। ऐसे में यदि अंगूठा लगवाने के बाद भी लाभार्थी को राशन न मिलने का दावा सामने आए तो सवाल उठना स्वाभाविक है कि मशीन में वितरण दर्ज हुआ या नहीं और यदि हुआ तो खाद्यान्न वास्तव में किसे मिला?
नजीबाबाद तहसील क्षेत्र के ग्राम पंचायत मौजमपुर सादात से सामने आई एक सामूहिक शिकायत ने इसी सवाल को केंद्र में ला दिया है। ग्रामीणों ने जिलाधिकारी को दिए प्रार्थना पत्र में राशन डीलर सीमा देवी पत्नी अरुण कुमार पर जुलाई और अगस्त माह का राशन देने के नाम पर ई-पॉस मशीन पर अंगूठा लगवाने के बाद राशन उपलब्ध नहीं कराने का आरोप लगाया है।
ग्रामीणों ने मामले की जांच कर कार्रवाई तथा राशन की दुकान हटाने की मांग की है।
महत्वपूर्ण: ये आरोप ग्रामीणों की लिखित शिकायत पर आधारित हैं। आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। राशन डीलर अथवा संबंधित विभाग का पक्ष सामने आने पर उसे भी समाचार में शामिल किया जाना आवश्यक होगा।
अंगूठा मशीन पर लगा, लेकिन राशन हाथ में क्यों नहीं आया?
ग्रामीणों के अनुसार जुलाई और अगस्त माह के राशन वितरण के लिए उनसे राशन वितरण मशीन पर अंगूठा लगवाया गया। शिकायत में कहा गया है कि उस समय उन्हें बताया गया कि कांवड़ के कारण राशन नहीं आया है, राशन आने के बाद उन्हें राशन दे दिया जाएगा।
ग्रामीणों का दावा है कि राशन डीलर की ओर से एक पर्ची भी दी गई थी, जिसे उन्होंने अपने पास सुरक्षित रखा है।
इसके बाद भी शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि दोनों महीनों का राशन उन्हें नहीं मिला।
यहीं से मामला महज राशन न मिलने की शिकायत से आगे बढ़कर ई-पॉस रिकॉर्ड और वास्तविक वितरण के मिलान का विषय बन जाता है।
डीलर का दावा अलग, ग्रामीणों की कहानी अलग
शिकायत में ग्रामीणों ने कहा है कि जब उन्होंने जुलाई और अगस्त का राशन मांगा तो उन्हें कथित तौर पर बताया गया कि राशन पहले ही वितरित किया जा चुका है।
दूसरी ओर, ग्रामीण स्वयं राशन प्राप्त नहीं करने का दावा कर रहे हैं।
यदि प्रशासन इस शिकायत की जांच करता है तो सबसे पहले ई-पॉस मशीन का डिजिटल रिकॉर्ड, राशन उठान का विवरण और लाभार्थियों के बयान आपस में मिलाए जा सकते हैं। इससे यह पता लगाने में मदद मिलेगी कि मशीन पर अंगूठा लगाने के बाद वास्तविक वितरण हुआ था या नहीं।
5 किलो की जगह 4 किलो राशन देने का आरोप
शिकायत में ग्रामीणों ने एक और गंभीर आरोप लगाया है। उनका दावा है कि राशन डीलर द्वारा पहले से ही 5 किलो के स्थान पर 4 किलो राशन दिया जाता रहा है।
यदि जांच में निर्धारित मात्रा से कम खाद्यान्न वितरण की पुष्टि होती है तो यह सार्वजनिक वितरण प्रणाली की पारदर्शिता से जुड़ा महत्वपूर्ण मामला होगा। हालांकि, फिलहाल यह भी शिकायतकर्ताओं का आरोप है और इसकी पुष्टि सक्षम अधिकारी की जांच के बाद ही मानी जा सकती है।
राशन मांगने पर विवाद और धमकी के आरोप
ग्रामीणों ने अपने प्रार्थना पत्र में राशन मांगने पर राशन डीलर और उसके पति पर गाली-गलौज तथा मारपीट पर उतारू होने का आरोप भी लगाया है।
शिकायत में कथित तौर पर यह भी कहा गया है कि ग्रामीणों को यह जवाब दिया जाता है कि वे जो करना चाहें कर लें और उनका कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता।
ये आरोप गंभीर प्रकृति के हैं। इसलिए इनकी सत्यता की जांच शिकायतकर्ता ग्रामीणों के बयान, उपलब्ध साक्ष्य और अन्य तथ्यों के आधार पर की जानी चाहिए।
सवाल सिर्फ दो महीने के राशन का नहीं, सिस्टम की पारदर्शिता का भी
इस शिकायत का सबसे अहम पहलू यही है कि ई-पॉस मशीन में दर्ज लेनदेन और लाभार्थी के हाथ में पहुंचे राशन का हिसाब एक होना चाहिए।
अगर मशीन में किसी लाभार्थी का अंगूठा लगा हुआ है और रिकॉर्ड में राशन वितरण दर्ज है, लेकिन वही लाभार्थी राशन प्राप्त नहीं करने की बात कहता है, तो यह अंतर जांच का विषय बनता है।
ऐसे में प्रशासन के सामने कुछ सीधे सवाल होंगे—
क्या जुलाई और अगस्त का राशन वास्तव में उठाया गया था?
कितने लाभार्थियों के अंगूठे मशीन पर लगे?
मशीन में प्रत्येक लाभार्थी के नाम कितनी मात्रा दर्ज है?
वास्तविक रूप से कितनी मात्रा वितरित हुई?
क्या ग्रामीणों द्वारा बताई गई पर्ची विभागीय रिकॉर्ड से मेल खाती है?
क्या 5 किलो के बजाय 4 किलो राशन देने की शिकायत में तथ्य है?
इन सवालों का जवाब रिकॉर्ड की जांच से ही सामने आ सकता है।
सामूहिक हस्ताक्षर—शिकायत को मिला ग्रामीणों का समर्थन
15 सितंबर 2026 को दिए गए प्रार्थना पत्र के साथ बड़ी संख्या में ग्रामीणों के हस्ताक्षर और अंगूठे के निशान दिखाई दे रहे हैं। इससे शिकायत सामूहिक रूप से प्रशासन के समक्ष रखे जाने का संकेत मिलता है।
ग्रामीणों ने जिलाधिकारी से मांग की है कि पूरे मामले की जांच कर दोष सिद्ध होने पर उचित कानूनी एवं विभागीय कार्रवाई की जाए तथा राशन की दुकान हटाने पर भी विचार किया जाए।
अब प्रशासन की जांच पर टिकी नजर
मौजमपुर सादात की शिकायत ने राशन वितरण व्यवस्था की निगरानी को लेकर एक महत्वपूर्ण सवाल सामने रखा है। यदि शिकायत गलत है तो जांच से स्थिति साफ हो सकती है और यदि आरोपों में तथ्य मिलता है तो कार्रवाई से पात्र लाभार्थियों के अधिकारों की रक्षा का रास्ता खुलेगा।
इसलिए इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण होगा—शिकायत नहीं, बल्कि शिकायत और सरकारी डिजिटल रिकॉर्ड का आमना-सामना।
ई-पॉस मशीन का रिकॉर्ड, राशन उठान का विवरण, स्टॉक रजिस्टर और लाभार्थियों के बयान यदि एक साथ जांचे जाएं तो वास्तविक स्थिति सामने आने की संभावना है।
TargetTvLive इस मामले में आरोपों को अंतिम सत्य के रूप में प्रस्तुत नहीं करता। हमारा सवाल सीधा है—यदि अंगूठा राशन के लिए लगा था, तो राशन वास्तव में कहां गया?
कानूनी सावधानी: समाचार में लगाए गए आरोप शिकायतकर्ताओं के लिखित प्रार्थना पत्र पर आधारित हैं। आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है; इसलिए प्रशासनिक जांच/संबंधित पक्ष के जवाब को तथ्य के रूप मे प्रकाशित किया जाएगा।












