नजीबाबाद से देहरादून तक कथित मांस सप्लाई की कहानी: जंगल में वारदात से सीमा पार नेटवर्क तक, पुलिस जांच में खुलती परतें
TargetTvLive | विशेष खोजपरक रिपोर्ट
रिपोर्ट: अवनीश त्यागी | बिजनौर
नजीबाबाद के मौज्जमपुर तुलसी में गोवंश के अवशेष मिलने से शुरू हुई जांच अब केवल एक स्थानीय वारदात के खुलासे तक सीमित नहीं दिख रही। पुलिस के अनुसार गिरफ्तार किए गए दो आरोपियों से पूछताछ में एक ऐसे कथित नेटवर्क के संकेत मिले हैं, जिसमें गोवंश को पकड़ने, जंगल में हत्या करने, वाहन से मांस ले जाने और दूसरे राज्य में उसे बेचने की कड़ी जुड़ती है।
31 अगस्त को मौज्जमपुर तुलसी में गोवंश के अवशेष मिलने के बाद ग्रामीणों में आक्रोश और तनाव की स्थिति बनी थी। मौके पर पहुंची नजीबाबाद पुलिस ने जांच शुरू की थी। अब पुलिस द्वारा किए गए खुलासे ने इस मामले को स्थानीय अपराध से आगे अंतरराज्यीय सप्लाई चैन की संभावित जांच का विषय बना दिया है।
30 अगस्त की रात से शुरू हुई कहानी
पुलिस की जांच के मुताबिक 30 अगस्त की शाम इदरीश नामक आरोपी देहरादून से ईको कार लेकर बिजनौर आया। आरोप है कि इसके बाद उसने नजीबाबाद निवासी शहनवाज और तीन अन्य साथियों के साथ मिलकर एक बेसहारा गोवंश को पकड़ा।
पुलिस के अनुसार गोवंश को मौज्जमपुर तुलसीगढ़ी के जंगल में ले जाया गया, जहां धारदार हथियारों से उसकी हत्या की गई। इसके बाद मांस को ईको कार में लादकर देहरादून ले जाने और कारगी चौक क्षेत्र में एक मीट विक्रेता को बेचने की बात पूछताछ में सामने आई है।
यहीं से मामला गंभीर हो जाता है।
यदि पुलिस की यह कहानी साक्ष्यों से पुष्ट होती है, तो सवाल सिर्फ यह नहीं रहेगा कि जंगल में हत्या किसने की। असली सवाल यह होगा कि मांस की कथित खपत और बिक्री के लिए पहले से कौन-सा संपर्क तंत्र मौजूद था?
ईको कार बनी जांच की अहम कड़ी
पुलिस ने आरोपियों की निशानदेही पर UK07TD4210 नंबर की ईको कार बरामद करने की बात कही है। इसके साथ दो धारदार छुरियां, भारी चापड़, लकड़ी का गुटखा, रस्सा और प्लास्टिक का कट्टा भी बरामद बताया गया है।
जांच की दृष्टि से वाहन सबसे महत्वपूर्ण कड़ियों में से एक हो सकता है। वाहन की पिछली आवाजाही, मोबाइल लोकेशन, सीसीटीवी फुटेज, टोल/सीमा क्षेत्र की निगरानी और संभावित खरीदारों से संपर्क की जांच यह स्पष्ट कर सकती है कि यह घटना पहली थी या इसके पीछे पहले से कोई पैटर्न मौजूद था।
मामले का सबसे बड़ा अनुत्तरित सवाल: देहरादून कनेक्शन
पुलिस पूछताछ में कथित तौर पर मांस को देहरादून के कारगी चौक तक ले जाने की बात सामने आई है। लेकिन किसी कथित खरीदार का नाम सामने आना और उसकी भूमिका कानूनी रूप से साबित होना दो अलग बातें हैं।
इसलिए जांच का अगला चरण बेहद महत्वपूर्ण है।
क्या कथित खरीदार की पहचान हो चुकी है?
क्या उससे पूछताछ हुई?
क्या पूर्व में भी इसी माध्यम से सप्लाई हुई थी?
क्या वाहन पहले भी बिजनौर से देहरादून गया था?
इन सवालों के जवाब सामने आने पर ही यह तय होगा कि मामला दो-चार लोगों की कथित आपराधिक हरकत तक सीमित है या इसके पीछे व्यापक नेटवर्क सक्रिय था।
दो गिरफ्तार, तीन अभी पुलिस की पकड़ से बाहर
पुलिस ने इदरीश और शहनवाज को गिरफ्तार किया है, जबकि पूछताछ में सामने आए तीन अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी अभी बाकी बताई गई है।
यही वजह है कि फिलहाल पुलिस कार्रवाई को अंतिम निष्कर्ष मानना जल्दबाजी होगी। फरार आरोपियों की गिरफ्तारी से घटना की वास्तविक योजना, भूमिका का बंटवारा और कथित बिक्री नेटवर्क के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी सामने आ सकती है।
पुराने मुकदमों ने बढ़ाई पुलिस जांच की गंभीरता
पुलिस के अनुसार दोनों गिरफ्तार आरोपियों के खिलाफ पहले भी विभिन्न आपराधिक मुकदमे दर्ज रहे हैं। इदरीश के खिलाफ गौवध निवारण अधिनियम के साथ गंभीर धाराओं में मामले बताए गए हैं, जबकि शहनवाज के खिलाफ गौवध निवारण अधिनियम, चोरी/बरामदगी और आर्म्स एक्ट से जुड़े मुकदमों का उल्लेख किया गया है।
हालांकि पूर्व में दर्ज मुकदमे किसी आरोपी को वर्तमान मामले में दोषी सिद्ध नहीं करते। मौजूदा प्रकरण में दोष का अंतिम निर्धारण न्यायालय ही करेगा।
TargetTvLive विश्लेषण: असली जांच जंगल से आगे जानी चाहिए
इस मामले की सबसे महत्वपूर्ण बात सिर्फ गिरफ्तारी और बरामदगी नहीं है। असली सफलता तब मानी जाएगी जब पुलिस कथित अपराध की पूरी श्रृंखला को प्रमाणित कर सके।
एक संभावित अपराध श्रृंखला को चार हिस्सों में देखा जा सकता है—
गोवंश की पहचान/पकड़ → जंगल में कथित हत्या → वाहन से परिवहन → कथित खरीदार तक पहुंच।
इन चारों कड़ियों में से यदि किसी एक की भी स्वतंत्र साक्ष्यों से पुष्टि होती है तो जांच मजबूत होगी। इसके लिए मोबाइल डेटा, सीसीटीवी, वाहन की आवाजाही, बरामदगी की फोरेंसिक जांच और आरोपियों के बयानों की स्वतंत्र पुष्टि महत्वपूर्ण होगी।
और सबसे अहम—कथित खरीदार और अन्य फरार आरोपियों तक पहुंचना।
क्योंकि यदि देहरादून तक सप्लाई की बात जांच में प्रमाणित होती है, तो यह मामला केवल नजीबाबाद के एक जंगल की वारदात नहीं रहेगा; यह दो राज्यों के बीच संभावित अवैध मांस परिवहन की जांच का विषय बन जाएगा।
पहले भी नजीबाबाद में सामने आ चुके हैं ऐसे मामले
नजीबाबाद क्षेत्र में गौकशी से जुड़े मामले पहले भी पुलिस कार्रवाई का विषय रहे हैं। मई 2026 में पुलिस ने गौकशी के एक मामले में दो आरोपियों की गिरफ्तारी और गौकशी के उपकरण बरामद करने की जानकारी दी थी।
इस पृष्ठभूमि में मौज्जमपुर तुलसी का नया मामला पुलिस के लिए महज एक और एफआईआर नहीं, बल्कि यह जांचने का अवसर भी है कि क्या क्षेत्र में ऐसे अपराधों का कोई दोहराता हुआ पैटर्न मौजूद है।
TargetTvLive की पड़ताल में फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है—क्या पुलिस की कार्रवाई केवल दो आरोपियों की गिरफ्तारी तक सीमित रहेगी, या जांच उस कथित नेटवर्क के अंतिम छोर तक पहुंचेगी जहां से इस पूरे कारोबार को बाजार मिलता है?
रिपोर्ट: अवनीश त्यागी
स्पेशल डेस्क, TargetTvLive | बिजनौर












