लेखपाल से मारपीट के बाद बिजनौर में तहसील ठप! तमंचे से धमकाने के आरोप में गिरफ्तारी न होने पर धरने पर बैठे लेखपाल
बिजनौर | TargetTvLive | अवनीश त्यागी
सदर तहसील के लेखपाल सनातन धर्म के साथ कथित मारपीट और कनपटी पर तमंचा लगाकर धमकाने के मामले ने अब पुलिस कार्रवाई पर सवाल खड़े कर दिए हैं। 20 अगस्त की घटना के बाद मुकदमा दर्ज होने के बावजूद एक सप्ताह तक आरोपियों की गिरफ्तारी न होने से लेखपालों का आक्रोश गुरुवार, 27 अगस्त को खुलकर सामने आ गया। संपूर्ण लेखपाल संघ के आह्वान पर सदर तहसील के लेखपाल कार्य से विरत होकर तहसील परिसर में धरने पर बैठ गए।
मामला केवल एक कर्मचारी के साथ कथित मारपीट तक सीमित नहीं है। लेखपाल संघ इसे राजस्व कर्मियों की सुरक्षा और सरकारी कामकाज के दौरान कर्मचारियों पर दबाव से जोड़कर देख रहा है। यही वजह है कि गिरफ्तारी की मांग अब आंदोलन का प्रमुख मुद्दा बन गई है।
20 अगस्त को आखिर क्या हुआ था?
लेखपाल संघ के अनुसार 20 अगस्त को सदर तहसील में तैनात लेखपाल सनातन धर्म के साथ कुछ दबंग लोगों ने मारपीट की। आरोप है कि इस दौरान उनकी कनपटी पर तमंचा लगाकर उन्हें डराने-धमकाने का प्रयास भी किया गया।
घटना के बाद संपूर्ण लेखपाल संघ की ओर से थाना कोतवाली शहर, बिजनौर में अभियोग पंजीकृत कराया गया। उम्मीद थी कि पुलिस मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपियों को गिरफ्तार करेगी, लेकिन 27 अगस्त तक गिरफ्तारी नहीं होने से कर्मचारियों का धैर्य जवाब देने लगा।
मुकदमा दर्ज, लेकिन गिरफ्तारी नहीं—यहीं से बढ़ा आक्रोश
लेखपालों का सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब घटना को एक सप्ताह बीत चुका है और मुकदमा दर्ज हो चुका है तो गिरफ्तारी में देरी क्यों?
यही सवाल गुरुवार को सदर तहसील परिसर में चल रहे धरने के दौरान भी प्रमुखता से उठा। लेखपालों का कहना है कि सरकारी कर्मचारी यदि अपने कार्यक्षेत्र में ही सुरक्षित नहीं रहेगा तो वह दबावमुक्त होकर जनता से जुड़े राजस्व कार्य कैसे करेगा?
हालांकि, आरोपों की अंतिम पुष्टि और मामले में दोष तय होना पुलिस जांच तथा न्यायिक प्रक्रिया का विषय है।
तहसील में कामकाज पर पड़ा असर
लेखपालों के कार्य बहिष्कार और धरने का सीधा असर तहसील के राजस्व कार्यों पर पड़ने की स्थिति बन गई है। लेखपाल राजस्व विभाग की जमीनी व्यवस्था की महत्वपूर्ण कड़ी हैं। भूमि संबंधी मामलों, आय-जाति-निवास प्रमाणपत्रों से जुड़े सत्यापन, राजस्व निरीक्षण और अन्य प्रशासनिक कार्यों में उनकी भूमिका अहम होती है।
ऐसे में कर्मचारियों का सामूहिक कार्य बहिष्कार केवल विभागीय विरोध नहीं, बल्कि आम लोगों के लिए भी चिंता का विषय बन सकता है। यदि आंदोलन लंबा खिंचता है तो इसका असर तहसील से जुड़े दैनिक कार्यों पर दिखाई दे सकता है।
सवाल पुलिस की कार्रवाई पर भी
इस पूरे घटनाक्रम का सबसे संवेदनशील पहलू तमंचे से धमकाने के आरोप हैं। यदि किसी सरकारी कर्मचारी को उसके कार्य के दौरान हथियार के बल पर धमकाया गया है, तो मामला कानून-व्यवस्था के साथ-साथ सरकारी कर्मचारियों की सुरक्षा से भी जुड़ जाता है।
लेखपाल संघ की मांग साफ है—मामले में आरोपियों की गिरफ्तारी हो और ऐसी कार्रवाई हो जिससे कर्मचारियों में सुरक्षा का भरोसा कायम हो सके।
अब देखना महत्वपूर्ण होगा कि पुलिस इस मामले में आगे क्या कार्रवाई करती है और प्रशासन आंदोलनरत लेखपालों की मांगों पर किस तरह प्रतिक्रिया देता है।
आंदोलन के पीछे बड़ा संदेश
इस आंदोलन को केवल एक कर्मचारी और कुछ आरोपियों के बीच विवाद के रूप में देखना शायद पूरे घटनाक्रम को सीमित कर देना होगा। राजस्व व्यवस्था सीधे आम नागरिकों की जमीन, प्रमाणपत्र और सरकारी सेवाओं से जुड़ी है। ऐसे में राजस्व कर्मियों में असुरक्षा की भावना पैदा होना प्रशासनिक व्यवस्था के लिए गंभीर संकेत माना जा सकता है।
लेखपालों का धरना इस बात का संदेश भी है कि सरकारी कर्मचारियों पर कथित दबाव या हिंसा के मामलों में त्वरित और प्रभावी कार्रवाई की अपेक्षा की जा रही है।
अब निगाहें पुलिस की अगली कार्रवाई पर
27 अगस्त को शुरू हुए धरने के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या पुलिस आरोपियों को गिरफ्तार कर लेखपालों का आक्रोश शांत कर पाएगी या मामला आंदोलन के अगले चरण तक पहुंचेगा? फिलहाल लेखपाल गिरफ्तारी की मांग पर अड़े हैं और तहसील परिसर में धरना जारी है।
— अवनीश त्यागी | TargetTvLive












