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स्योहारा में ‘पुलिस की पाठशाला’: छात्राओं को बताया साइबर ठगी से बचने का ‘सुरक्षा मंत्र’, मिशन शक्ति पर भी बड़ा संदेश

स्योहारा में पुलिस की ‘पाठशाला’ ने खोली साइबर ठगों की पोल, छात्राओं को बताया—एक क्लिक की गलती पड़ सकती है भारी

TargetTvLive के लिए अवनीश त्यागी की रिपोर्ट।

बिजनौर। साइबर अपराध का जाल लगातार फैल रहा है और मोबाइल की स्क्रीन पर आने वाला एक संदिग्ध लिंक, कॉल या मैसेज कभी भी बड़ी ठगी का कारण बन सकता है। ऐसे दौर में पुलिस ने अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई के साथ-साथ जागरूकता को भी सुरक्षा की पहली दीवार बनाने की पहल तेज कर दी है।

इसी उद्देश्य से 27 अगस्त 2026 को स्योहारा के मैरी एंड जीसस कॉन्वेंट सीनियर सेकेंडरी स्कूल में ‘पुलिस की पाठशाला’ का आयोजन किया गया। क्षेत्राधिकारी धामपुर एवं थाना प्रभारी निरीक्षक स्योहारा के नेतृत्व में आयोजित कार्यक्रम में छात्राओं को साइबर अपराध से बचाव, डिजिटल सुरक्षा और मिशन शक्ति अभियान से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारियां दी गईं।

‘क्लिक’ करने से पहले सोचें, वरना खाते से उड़ सकता है पैसा

कार्यक्रम का सबसे अहम संदेश यही रहा कि डिजिटल दुनिया में लापरवाही की कीमत भारी हो सकती है। पुलिस ने छात्राओं को साइबर अपराध के संभावित खतरों को पहचानने और ऑनलाइन गतिविधियों में सावधानी बरतने के लिए जागरूक किया।

आज पढ़ाई से लेकर सोशल मीडिया और ऑनलाइन लेनदेन तक, युवाओं की जिंदगी इंटरनेट से जुड़ चुकी है। इसी बढ़ती डिजिटल निर्भरता के बीच साइबर अपराधी भी नए-नए तरीकों से लोगों को अपने जाल में फंसाने की कोशिश करते हैं। ऐसे में जागरूकता और सतर्कता साइबर अपराध से बचाव का सबसे मजबूत हथियार बनकर सामने आती है।

साइबर सुरक्षा सिर्फ पुलिस की जिम्मेदारी नहीं

‘पुलिस की पाठशाला’ की खासियत यह रही कि यहां साइबर सुरक्षा को केवल पुलिसिंग का विषय नहीं, बल्कि हर डिजिटल यूजर की व्यक्तिगत जिम्मेदारी के रूप में सामने रखा गया।

छात्राओं को यह समझाने का प्रयास किया गया कि किसी भी संदिग्ध ऑनलाइन गतिविधि को नजरअंदाज करने के बजाय सतर्क रहना जरूरी है। परिवार और मित्रों को भी साइबर अपराध के प्रति जागरूक करने में युवा महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

मिशन शक्ति से जुड़ा सुरक्षा और आत्मविश्वास का संदेश

कार्यक्रम में मिशन शक्ति अभियान के बारे में भी छात्राओं को जानकारी दी गई। महिला एवं बालिका सुरक्षा, सम्मान और जागरूकता से जुड़े विषयों पर पुलिस की ओर से संवाद किया गया।

दरअसल, स्कूलों में इस तरह के कार्यक्रम केवल जानकारी देने तक सीमित नहीं हैं। इनका व्यापक उद्देश्य बालिकाओं में सुरक्षा के प्रति सजगता, अधिकारों की समझ और आत्मविश्वास पैदा करना भी है।

बदलती पुलिसिंग की तस्वीर—अपराध के बाद नहीं, अपराध से पहले रोकथाम

स्योहारा का यह कार्यक्रम पुलिसिंग के बदलते स्वरूप की ओर भी संकेत करता है। पहले पुलिस की भूमिका मुख्यतः अपराध होने के बाद कार्रवाई तक देखी जाती थी, लेकिन साइबर अपराध जैसे तेजी से बदलते अपराधों ने प्रिवेंटिव पुलिसिंग यानी अपराध होने से पहले रोकथाम की जरूरत बढ़ा दी है।

‘पुलिस की पाठशाला’ इसी सोच का हिस्सा है। यदि स्कूल स्तर पर ही छात्र-छात्राओं को डिजिटल खतरे पहचानने और महिला सुरक्षा से जुड़े अधिकारों की जानकारी मिलती है, तो इसका असर केवल एक विद्यालय तक सीमित नहीं रहता, बल्कि जागरूकता परिवार और समाज तक पहुंचती है।

संदेश स्पष्ट—साइबर दुनिया में सतर्क रहें, सुरक्षित रहें

स्योहारा में आयोजित ‘पुलिस की पाठशाला’ ने छात्राओं को यह संदेश दिया कि डिजिटल सुविधा के साथ डिजिटल सावधानी भी जरूरी है। पुलिस की यह पहल साइबर अपराध के खिलाफ जागरूकता अभियान को जमीनी स्तर तक पहुंचाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा सकता है।

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