बिजनौर DM जसजीत कौर का ताबड़तोड़ एक्शन: IGRS में ‘C’ ग्रेड मिला तो अफसरों पर गिरेगी गाज, पौधरोपण में फर्जीवाड़ा रोकने के लिए Geo-Tagging अनिवार्य
बिजनौर | 25 अगस्त 2026 एक्सक्लूसिव रिपोर्ट: अवनीश त्यागी, TargetTvLive
जनसमस्याओं के निस्तारण में ‘कागजी लीपापोती’ करने वाले अधिकारियों की अब खैर नहीं है। कलेक्ट्रेट के महात्मा विदुर सभागार में आयोजित समीक्षा बैठक के दौरान जिलाधिकारी (DM) जसजीत कौर का बेहद तल्ख और आक्रामक अंदाज देखने को मिला। जनसुनवाई पोर्टल (IGRS) की सुस्त रफ्तार और ढुलमुल कार्यशैली पर नाराजगी जताते हुए डीएम ने दो टूक चेतावनी दी कि आईजीआरएस मामलों में ‘Default’ या ‘C’ ग्रेड किसी भी कीमत पर स्वीकार्य नहीं होगा। लापरवाही बरतने वाले अफसरों की सीधी जवाबदेही तय की जाएगी।
कागजी खानापूर्ति बंद करें अफसर: समाधान ‘ऑन-पेपर’ नहीं, ‘ऑन-ग्राउंड’ दिखना चाहिए
जिलाधिकारी ने सख्त तेवर दिखाते हुए स्पष्ट किया कि शिकायतों को केवल पोर्टल पर ‘निस्तारित’ दिखा देना ही प्रशासनिक सफलता नहीं है। शासन स्तर से सीधे शिकायतकर्ताओं से फीडबैक लिया जा रहा है, जिसमें थोड़ी सी भी लापरवाही जिला प्रशासन की साख पर बट्टा लगा सकती है।
- सीधी वार्ता का आदेश: अधिकारी खुद शिकायतकर्ता से फोन पर बात करें या आमने-सामने बैठकर उसकी वास्तविक समस्या समझें।
- पारदर्शी व्यवस्था: जिन मामलों का नियमानुसार समाधान संभव न हो, उनमें आवेदक को कारण की लिखित व स्पष्ट जानकारी दी जाए।
- औपचारिकता पर रोक: शिकायतों को जबरन या फर्जी तरीके से बंद करने वाले अफसरों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई होगी।
पौधरोपण अभियान की खुली पोल? जियो-टैगिंग के दिए कड़े निर्देश
आईजीआरएस बैठक के तुरंत बाद डीएम ने जिला गंगा समिति, जिला पर्यावरण समिति और जिला वृक्षारोपण समिति की संयुक्त मैराथन बैठक ली। पूर्व में चलाए गए पौधरोपण अभियान की वास्तविक स्थिति जांचने के लिए डीएम ने तकनीकी चाबुक चलाया है।
- डिजिटल निगरानी: पूर्व में लगाए गए सभी पौधों की जियो-टैगिंग (Geo-Tagging) तत्काल पूरी करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि पौधों की जीवित रहने की दर और संरक्षण की ऑनलाइन मॉनिटरिंग की जा सके।
- जीरो टॉलरेंस: जियो-टैगिंग के काम में किसी भी स्तर पर ढिलाई या लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी। तय समय सीमा के भीतर शत-प्रतिशत काम पूरा करना अनिवार्य है।
TargetTvLive का ग्राउंड एनालीसिस: अवनीश त्यागी का नज़रिया
TargetTvLive के लिए वरिष्ठ पत्रकार अवनीश त्यागी की विशेष रिपोर्ट के अनुसार, बिजनौर प्रशासन का यह कड़ा रुख केवल एक रूटीन बैठक का हिस्सा नहीं है, बल्कि निचले नौकरशाही ढांचे पर कसा गया एक बड़ा प्रशासनिक शिकंजा है।
अक्सर सरकारी महकमों में IGRS शिकायतों को सिर्फ आंकड़े पूरे करने के लिए बंद कर दिया जाता है और पौधरोपण के नाम पर लगाए गए पौधे कागजों तक सीमित रह जाते हैं। लेकिन डीएम जसजीत कौर का “C ग्रेड नो-टॉलरेंस” का फरमान और “जियो-टैगिंग” का डिजिटल सुरक्षा कवच, बिजनौर में सुशासन की एक नई इबारत लिख रहा है। अब देखना यह होगा कि इस अल्टीमेटम के बाद धरातल पर अफसरों की कार्यशैली में कितना बदलाव आता है।












