EXPOSED: बिजनौर बैराज तटबंध टूटने की 100 मीटर वाली खबर निकली सरासर झूठ, ACBM तकनीक ने बचाई गंगा नगरी!

बिजनौर बैराज का तटबंध सुरक्षित है। 100 मीटर कंक्रीट ब्लॉक बहने की खबर अफवाह। सिंचाई विभाग ने किया बड़ा खुलासा।
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[TARGETTVLIVE FACT CHECK] बिजनौर बैराज पर 100 मीटर कंक्रीट ब्लॉक बहने की खबर निकली 100% फेक! पर्दाफाश – टूटा नहीं, बल्कि ‘लॉन्च’ हुआ था सुरक्षा कवच, जानिए क्या है ACBM का ब्रह्मास्त्र
बिजनौर में हड़कंप मचाने वाली खबर की असलियत क्या है? क्या गंगा खतरे में है? पढ़िए इस वायरल झूठ का पूरा पोस्टमार्टम।
By: अवनीश त्यागी | TargetTvLive Network
बिजनौर | 23 अगस्त
बिजनौर में पिछले 24 घंटे से एक खबर ने लोगों की नींद उड़ा रखी थी – “बिजनौर बैराज का तटबंध टूट गया, 100 मीटर का कंक्रीट ब्लॉक गंगा में समा गया, कभी भी आ सकती है बाढ़!”
सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल, व्हाट्सएप ग्रुप में हड़कंप और लोगों में दहशत। लेकिन TargetTvLive अब इस सनसनीखेज झूठ का पर्दाफाश कर रहा है।
सिंचाई विभाग, मध्य गंगा नहर निर्माण खंड-5 के अधिशासी अभियंता कार्यालय ने आधिकारिक प्रेस नोट जारी कर इन सभी खबरों को पूर्णतः असत्य, भ्रामक और तथ्यात्मक रूप से गलत करार दिया है।
तो फिर सच क्या है? नदी में गया क्या था?
VIRAL vs REALITY – TargetTvLive का फैक्ट चेक मीटर
| वायरल दावा (झूठ) | ग्राउंड रियलिटी (सच) |
| तटबंध टूट गया और कटान शुरू हो गया। | तटबंध 100% सुरक्षित है, कहीं कोई कटान नहीं। |
| 100 मीटर कंक्रीट ब्लॉक नदी में बह गया, करोड़ों का नुकसान। | कोई ब्लॉक नहीं बहा। ACBM एप्रन अपनी तकनीक के अनुसार ‘लॉन्च’ हुआ है। यह नुकसान नहीं, बचाव है। |
FACT CHECK RESULT: FAKE NEWS ALERT
असली हीरो – ACBM तकनीक: जो टूटती नहीं, बल्कि दुश्मन की तरह लड़ती है
सच्चाई ये है कि इस बार बिजनौर बैराज को बचाने के लिए सिंचाई विभाग ने कोई पुराना जुगाड़ नहीं, बल्कि एक अंतरराष्ट्रीय तकनीक का इस्तेमाल किया है – ACBM यानी Articulating Concrete Base Mattress.
इसे ऐसे समझिए:
गंगा के बाएं तटबंध पर लगभग 1 किलोमीटर तक एक ऐसा आधुनिक कवच बिछाया गया है। तटबंध की ढलान पर 8 से 10 मीटर और नदी की तरफ 24 से 26 मीटर तक यह कंक्रीट की चटाई जैसी बिछी है। इसे एप्रन कहते हैं।
इस एप्रन का काम ही यही है – जब गंगा का रौद्र रूप, तेज बहाव तटबंध से टकराएगा, तो यह एप्रन अपनी जगह से खिसक कर, लुढ़क कर नदी के सामने एक मजबूत दीवार बनकर खड़ा हो जाएगा। अंग्रेजी में इसे ‘लॉन्च होना’ कहते हैं।
जो चीज मीडिया में “बह गया” बताकर दिखाई जा रही है, वो असल में इसी तकनीक का सफल परीक्षण है। नदी का पानी बढ़ा, एप्रन ने अपना काम किया और तटबंध को बचा लिया। यह फेलियर नहीं, इंजीनियरिंग की जीत है।
मौके पर क्या है तैयारी? – सिंचाई विभाग का वॉर रूम एक्टिव
अफवाहों के बीच विभाग सोया नहीं है। अधिशासी अभियंता ने बताया कि सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम हैं:
1. 24×7 पहरा: तटबंध पर दिन-रात इंजीनियरों की टीम निगरानी कर रही है।
2. दोहरी सुरक्षा: नदी के वेग को तोड़ने के लिए बल्ला कटर और मिट्टी भरे नायलॉन क्रेट लगाए जा रहे हैं।
3. हाई अलर्ट: किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए पूरी टीम संसाधनों के साथ तैयार है।
TargetTvLive का अंतिम निष्कर्ष
बिजनौर वासियों को डरने की कोई जरूरत नहीं है। बैराज का तटबंध पूरी तरह महफूज है। कुछ TRP भूखे चैनलों द्वारा बिना तकनीकी जानकारी के दिखाई गई खबरें सिर्फ दहशत फैलाने वाली हैं।
TargetTvLive और अवनीश त्यागी की आप सभी से अपील है – अफवाहों पर नहीं, सिर्फ आधिकारिक पुष्टि पर भरोसा करें।
इस खबर को हर बिजनौर वाले तक शेयर करें ताकि झूठ की जगह सच पहुंचे।
स्रोत: कार्यालय अधिशासी अभियंता, म.गं.न. निर्माण खंड-5, सिंचाई विभाग, बिजनौर
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