“यूपी सरकार की बड़ी कार्रवाई की तैयारी? मान्यता प्राप्त पत्रकारों का 17 साल का रिकॉर्ड तलब, मुकदमों और निरस्त मान्यताओं का मांगा पूरा हिसाब”

2008 से 2025 तक मान्यता स्थानांतरण, पत्रकारों पर दर्ज मुकदमे और निरस्त मान्यताओं की मांगी गई विस्तृत रिपोर्ट
रिपोर्ट : अवनीश त्यागी | TargetTvLive
लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार ने प्रदेश के मान्यता प्राप्त पत्रकारों को लेकर एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। सूचना एवं जनसम्पर्क विभाग ने सभी मंडलीय और जिला सूचना अधिकारियों को निर्देश जारी करते हुए पिछले 17 वर्षों का विस्तृत रिकॉर्ड तत्काल उपलब्ध कराने को कहा है। इस आदेश के बाद पत्रकारिता जगत में कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं।
सरकार ने यह जानना चाहा है कि पिछले वर्षों में कितने पत्रकारों की मान्यता एक मीडिया संस्थान से दूसरे संस्थान में स्थानांतरित हुई, कितने मान्यता प्राप्त पत्रकारों के खिलाफ मुकदमे दर्ज हुए और मुकदमों के कारण कितनी पत्रकार मान्यताएं निरस्त की गईं।
सूचना विभाग ने इन सभी सूचनाओं को हर हाल में 28 जुलाई 2026 की शाम 5 बजे तक उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं।
सरकार ने मांगी कौन-कौन सी जानकारी?
सूचना एवं जनसम्पर्क विभाग ने जिला सूचना अधिकारियों से तीन महत्वपूर्ण बिंदुओं पर रिपोर्ट मांगी है—
1. पत्रकारों की मान्यता का स्थानांतरण
- वर्ष 2008 से वर्ष 2025 तक कितने मान्यता प्राप्त पत्रकारों की मान्यता एक मीडिया संस्थान से दूसरे संस्थान में स्थानांतरित की गई?
- इसकी वर्षवार जानकारी उपलब्ध करानी होगी।
2. पत्रकारों के खिलाफ दर्ज मुकदमे
- वर्ष 2009 से वर्ष 2025 तक मान्यता प्राप्त पत्रकारों के खिलाफ कितने मुकदमे दर्ज हुए?
- मुकदमों का वर्षवार पूरा ब्यौरा मांगा गया है।
3. कितनी मान्यताएं हुईं निरस्त?
- वर्ष 2016 से अब तक मुकदमा दर्ज होने के कारण कितने पत्रकारों की मान्यता समाप्त की गई?
- इसकी भी विस्तृत रिपोर्ट मांगी गई है।
क्यों महत्वपूर्ण है यह आदेश?
आमतौर पर इतनी लंबी अवधि का रिकॉर्ड एक साथ नहीं मांगा जाता। ऐसे में यह आदेश कई सवाल खड़े कर रहा है। माना जा रहा है कि प्रदेश सरकार पत्रकार मान्यता व्यवस्था की व्यापक समीक्षा करने की तैयारी में है।
संभावना यह भी जताई जा रही है कि भविष्य में पत्रकारों की मान्यता से जुड़े नियमों को और अधिक पारदर्शी एवं जवाबदेह बनाया जा सकता है। यदि ऐसा होता है तो पत्रकारों के लिए मान्यता प्राप्त करने और उसे बनाए रखने के नियमों में बदलाव देखने को मिल सकता है।
क्या बदल सकती है पत्रकार मान्यता नीति?
इस आदेश के बाद पत्रकारिता जगत में सबसे बड़ा सवाल यह है कि—
- क्या पत्रकार मान्यता के नियमों में संशोधन होने वाला है?
- क्या मुकदमों के आधार पर मान्यता को लेकर नई नीति बनाई जाएगी?
- क्या मान्यता स्थानांतरण की प्रक्रिया को और अधिक सख्त किया जाएगा?
- क्या पत्रकारों की जवाबदेही तय करने के लिए नए मानक लागू किए जाएंगे?
हालांकि, सरकार की ओर से अभी इस संबंध में कोई औपचारिक घोषणा नहीं की गई है, लेकिन जिस प्रकार से विस्तृत आंकड़े मांगे गए हैं, उससे भविष्य में किसी बड़े प्रशासनिक या नीतिगत निर्णय की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
TargetTvLive विश्लेषण
उत्तर प्रदेश सरकार का यह आदेश केवल आंकड़े जुटाने तक सीमित नहीं माना जा रहा है। पत्रकारों की मान्यता व्यवस्था को लेकर शासन स्तर पर गंभीर मंथन की आहट साफ दिखाई दे रही है। यदि इस डेटा के आधार पर नई नीति तैयार होती है, तो इसका प्रभाव प्रदेश भर के हजारों मान्यता प्राप्त पत्रकारों पर पड़ सकता है।
फिलहाल सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि सरकार इन आंकड़ों के विश्लेषण के बाद क्या कदम उठाती है।
एक नजर में
| विषय | अवधि |
|---|---|
| मान्यता स्थानांतरण | 2008 से 2025 |
| पत्रकारों पर दर्ज मुकदमे | 2009 से 2025 |
| निरस्त मान्यताएं | 2016 से वर्तमान तक |
| रिपोर्ट जमा करने की अंतिम समय सीमा | 28 जुलाई 2026, शाम 5 बजे |
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(लेखक : अवनीश त्यागी | TargetTvLive)












