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“10 महीने से नहीं मिला वेतन, अब आर-पार की लड़ाई! मनरेगा कर्मियों ने दी अनिश्चितकालीन हड़ताल की चेतावनी”

“10 महीने से नहीं मिला वेतन! अब फूटा मनरेगा कर्मियों का गुस्सा, डीएम से बोले- एक सप्ताह में भुगतान नहीं तो होगी अनिश्चितकालीन हड़ताल”

 

TargetTvLive | विशेष रिपोर्ट
रिपोर्ट: अवनीश त्यागी

बिजनौर में मनरेगा के तहत गांवों के विकास कार्यों को जमीन पर उतारने वाले कर्मचारी आज खुद आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं। पिछले 8 से 10 महीनों से मानदेय नहीं मिलने और करीब 85 माह से ईपीएफ अंशदान लंबित होने से कर्मचारियों का धैर्य अब जवाब देने लगा है। मजबूर होकर उन्होंने जिलाधिकारी से न्याय की गुहार लगाई है और साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि एक सप्ताह के भीतर उनकी समस्याओं का समाधान नहीं हुआ तो वे अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले जाएंगे।

मनरेगा कर्मियों का कहना है कि वे सरकार की महत्वाकांक्षी ग्रामीण विकास योजनाओं को सफल बनाने के लिए दिन-रात मेहनत कर रहे हैं, लेकिन उनकी मेहनत का भुगतान महीनों से नहीं किया गया है। ऐसे में उनके सामने परिवार चलाना तक मुश्किल हो गया है।

आखिर क्या है पूरा मामला?

मनरेगा के तहत कार्यरत तकनीकी सहायक और रोजगार सेवकों ने जिलाधिकारी को दिए ज्ञापन में बताया कि उन्हें पिछले 8 से 10 महीनों से मानदेय नहीं मिला है। इतना ही नहीं, उनका 85 माह का ईपीएफ अंशदान भी संबंधित खातों में जमा नहीं कराया गया है।

कर्मचारियों का कहना है कि वे लगातार अपने दायित्वों का निर्वहन कर रहे हैं, लेकिन आर्थिक समस्याओं के कारण अब उनका जीवन प्रभावित होने लगा है।

घर चलाना हुआ मुश्किल

मानदेय नहीं मिलने के कारण कर्मचारियों के सामने कई तरह की परेशानियां खड़ी हो गई हैं। उन्होंने बताया कि—

  • बच्चों की स्कूल फीस जमा करने में परेशानी हो रही है।
  • घर का मासिक बजट पूरी तरह बिगड़ चुका है।
  • बैंक की किस्तें और अन्य जरूरी खर्च पूरे करना मुश्किल हो गया है।
  • मानसिक तनाव लगातार बढ़ रहा है।
  • आर्थिक तंगी का असर उनके कार्य प्रदर्शन पर भी पड़ रहा है।

कर्मियों का कहना है कि जिन लोगों के भरोसे सरकार गांवों का विकास कर रही है, आज वही लोग अपनी बुनियादी जरूरतों को पूरा करने के लिए संघर्ष कर रहे हैं।

एक सप्ताह का अल्टीमेटम

मनरेगा कर्मियों ने प्रशासन से मांग की है कि—

  • 8 से 10 माह का लंबित मानदेय तत्काल जारी किया जाए।
  • 85 माह का लंबित ईपीएफ अंशदान कर्मचारियों के यूएएन खातों में जमा कराया जाए।
  • भविष्य में मानदेय भुगतान की नियमित व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।

ज्ञापन में स्पष्ट कहा गया है कि यदि एक सप्ताह के भीतर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई, तो जिले के सभी मनरेगा कर्मचारी अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले जाएंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।

हड़ताल हुई तो प्रभावित होंगे ग्रामीण विकास कार्य

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि मनरेगा कर्मी हड़ताल पर जाते हैं, तो जिले में चल रहे ग्रामीण विकास कार्यों पर सीधा असर पड़ेगा। गांवों में रोजगार सृजन, विकास परियोजनाओं की निगरानी और प्रशासनिक कार्यों की गति धीमी पड़ सकती है।

यह केवल कर्मचारियों के भुगतान का मामला नहीं है, बल्कि ग्रामीण विकास व्यवस्था से जुड़ा एक महत्वपूर्ण मुद्दा है।

TargetTvLive का विश्लेषण

सरकार की योजनाओं को गांव-गांव तक पहुंचाने वाले मनरेगा कर्मी यदि महीनों तक अपने मानदेय के लिए संघर्ष करने को मजबूर हों, तो यह प्रशासनिक व्यवस्था के लिए गंभीर चिंता का विषय है। सवाल यह भी है कि जब कर्मचारी आर्थिक संकट में होंगे, तो वे पूरी क्षमता और मनोबल के साथ जनहित की योजनाओं का क्रियान्वयन कैसे कर पाएंगे?

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या जिला प्रशासन समय रहते कर्मचारियों की मांगों पर कार्रवाई करेगा या फिर बिजनौर में मनरेगा व्यवस्था को अनिश्चितकालीन हड़ताल का सामना करना पड़ेगा?

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(रिपोर्ट : अवनीश त्यागी | TargetTvLive)

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