2027 की जंग का ट्रेलर या शिक्षक MLC चुनाव? बिजनौर में सपा का बड़ा शक्ति प्रदर्शन, नेता प्रतिपक्ष लाल बिहारी यादव का बड़ा दावा

बिजनौर में समाजवादी पार्टी के शिक्षक-प्रबंधक सम्मेलन में नेता प्रतिपक्ष लाल बिहारी यादव ने शिक्षक एमएलसी चुनाव को 2027 विधानसभा चुनाव का सेमीफाइनल बताया। वित्तविहीन शिक्षकों के मानदेय और चुनावी रणनीति पर साधा निशाना।
रिपोर्ट: अवनीश त्यागी | TargetTvLive
बिजनौर। बरेली–मुरादाबाद शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के शिक्षक एमएलसी चुनाव को लेकर समाजवादी पार्टी ने बिजनौर से चुनावी माहौल गरमा दिया है। शहर के राज मिलन बैंक्वेट हॉल में आयोजित शिक्षक, प्रबंधक एवं समन्वय सम्मेलन में पार्टी के नेताओं ने इसे सिर्फ एक विधान परिषद का चुनाव नहीं, बल्कि वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव की दिशा तय करने वाला महत्वपूर्ण मुकाबला बताया।
उत्तर प्रदेश विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष लाल बिहारी यादव ने सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि शिक्षक एमएलसी चुनाव वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव का “सेमीफाइनल” है। उन्होंने समाजवादी पार्टी समर्थित प्रत्याशी मोहम्मद दानिश अख्तर के पक्ष में शिक्षकों से एकजुट होकर मतदान करने की अपील की और विश्वास जताया कि इस चुनाव में समाजवादी पार्टी को जीत मिलेगी।
शिक्षकों के मानदेय का मुद्दा फिर उठाया
अपने संबोधन में लाल बिहारी यादव ने वित्तविहीन विद्यालयों के शिक्षकों का मुद्दा प्रमुखता से उठाया। उन्होंने कहा कि समाजवादी सरकार के समय ऐसे शिक्षकों को मानदेय मिलता था, लेकिन वर्तमान सरकार ने यह व्यवस्था बंद कर दी। उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव पहले ही घोषणा कर चुके हैं कि प्रदेश में सरकार बनने पर वित्तविहीन शिक्षकों का मानदेय फिर से शुरू किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि शिक्षक और कर्मचारी वर्ग बदलाव चाहता है और इस चुनाव में उसका समर्थन समाजवादी पार्टी को मिलेगा।
सम्मेलन में दिखी संगठन की ताकत
कार्यक्रम में जिलाध्यक्ष हनी फैसल के नेतृत्व में नेता प्रतिपक्ष का जोरदार स्वागत किया गया। सम्मेलन में सांसद रुचि वीरा, विधायक स्वामी ओमवेश, तसलीम अहमद, रामअवतार सैनी, डॉ. रमेश तोमर सहित पार्टी के कई वरिष्ठ नेता, शिक्षक, विद्यालय प्रबंधक और बड़ी संख्या में कार्यकर्ता मौजूद रहे। कार्यक्रम का संचालन जिला महासचिव धनंजय सिंह यादव ने किया।
राजनीतिक मायने
शिक्षक एमएलसी चुनाव में मतदाताओं की संख्या सीमित होती है, लेकिन इसका राजनीतिक महत्व काफी बड़ा माना जाता है। यह चुनाव शिक्षकों और शिक्षित वर्ग के बीच राजनीतिक दलों की पकड़ का संकेत भी देता है। ऐसे में समाजवादी पार्टी का इसे 2027 के विधानसभा चुनाव का “सेमीफाइनल” बताना साफ संकेत है कि पार्टी इस चुनाव को अपनी राजनीतिक ताकत और जनसमर्थन की परीक्षा के रूप में देख रही है।
वहीं, वित्तविहीन शिक्षकों के मानदेय का मुद्दा उठाकर सपा ने शिक्षक समुदाय को अपने पक्ष में जोड़ने की कोशिश भी तेज कर दी है। अब सभी की नजर इस बात पर रहेगी कि यह रणनीति चुनावी नतीजों में कितना असर दिखाती है।
(नोट: समाचार में व्यक्त चुनावी दावे और घोषणाएं सम्मेलन के दौरान समाजवादी पार्टी के नेताओं द्वारा दिए गए बयानों पर आधारित हैं।)
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