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बिजनौर में कुपोषण पर डीएम का बड़ा एक्शन! अब एक भी बच्चा और गर्भवती महिला सरकारी मदद से नहीं रहेगी वंचित

बिजनौर में कुपोषण के खिलाफ बड़ा अभियान, DM सख्त—’कोई बच्चा और गर्भवती महिला सरकारी मदद से वंचित न रहे’

Bijnor News | आंगनबाड़ी केंद्रों की होगी पड़ताल, बिना केंद्र वाले गांवों की बनेगी सूची, सीमावर्ती क्षेत्रों को भी मिलेंगी बेहतर सुविधाएं
बिजनौर | TargetTvLive
रिपोर्ट: अवनीश त्यागी

बिजनौर में कुपोषण और एनीमिया के खिलाफ जिला प्रशासन ने अब सख्त रुख अपना लिया है। जिलाधिकारी जसजीत कौर ने साफ शब्दों में कहा है कि जनपद का कोई भी कुपोषित बच्चा, अति कुपोषित (SAM/MAM) शिशु, गर्भवती या धात्री महिला सरकारी योजनाओं के लाभ से वंचित नहीं रहनी चाहिए। उन्होंने अधिकारियों को घर-घर तक पहुंचकर जरूरतमंदों की पहचान करने और समय पर उपचार व पोषण सहायता उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।

मंगलवार को कलेक्ट्रेट सभागार में आयोजित जिला पोषण समिति की समीक्षा बैठक में डीएम ने कहा कि पोषण अभियान की सफलता केवल बैठकों से नहीं, बल्कि गांव-गांव तक दिखने वाले परिणामों से तय होगी। उन्होंने सभी विभागों को आपसी समन्वय के साथ तेजी से काम करने के निर्देश दिए।

हर बच्चे की होगी निगरानी, पोषण ट्रैकर पर रहेगा पूरा रिकॉर्ड

डीएम ने निर्देश दिए कि सभी आंगनबाड़ी केंद्रों पर बच्चों का नियमित वजन और लंबाई मापी जाए। हर पात्र बच्चे और महिला का विवरण समय से पोषण ट्रैकर पर दर्ज किया जाए, ताकि किसी भी जरूरतमंद तक सहायता पहुंचाने में देरी न हो।

उन्होंने सभी सीडीपीओ को माइक्रो प्लान के अनुसार क्षेत्रवार कार्ययोजना बनाकर अभियान को गति देने और तय समय सीमा में लक्ष्य पूरे करने के निर्देश दिए।

SAM और MAM बच्चों के इलाज पर रहेगा विशेष फोकस

बैठक में गंभीर कुपोषित (SAM) और मध्यम कुपोषित (MAM) बच्चों की पहचान, उपचार, नियमित स्वास्थ्य जांच, फॉलोअप और पोषण पुनर्वास को सर्वोच्च प्राथमिकता देने के निर्देश दिए गए। डीएम ने कहा कि ऐसे बच्चों की हर स्तर पर लगातार निगरानी की जाए, ताकि वे जल्द सामान्य स्वास्थ्य की श्रेणी में आ सकें।

जहां आंगनबाड़ी केंद्र नहीं, वहां जल्द शुरू होगी कार्रवाई

जिलाधिकारी ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि जिन गांवों में अभी तक आंगनबाड़ी केंद्र नहीं हैं, उनकी ग्रामवार सूची तत्काल तैयार की जाए। इन क्षेत्रों को प्राथमिकता के आधार पर आंगनबाड़ी सेवाओं से जोड़ने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी, ताकि कोई भी बच्चा पोषण सेवाओं से वंचित न रहे।

उत्तराखंड सीमा से लगे गांवों पर प्रशासन की विशेष नजर

बैठक में उत्तराखंड सीमा से लगे गांवों के आंगनबाड़ी केंद्रों की स्थिति की भी समीक्षा की गई। डीएम ने कहा कि जिन केंद्रों पर फर्नीचर या अन्य जरूरी संसाधनों की कमी है, वहां प्राथमिकता के आधार पर सभी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं, जिससे बच्चों और महिलाओं को बेहतर वातावरण मिल सके।

सभी विभागों की तय हुई जिम्मेदारी

स्वास्थ्य, बाल विकास एवं पुष्टाहार, शिक्षा, पंचायती राज सहित सभी संबंधित विभागों को स्पष्ट निर्देश दिए गए कि वे आपसी समन्वय के साथ काम करें और पोषण अभियान के सभी लक्ष्यों को समय पर पूरा करें। बैठक में मुख्य विकास अधिकारी रणविजय सिंह, मुख्य चिकित्सा अधिकारी, जिला कार्यक्रम अधिकारी, जिला पंचायत राज अधिकारी सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।

TargetTvLive Analysis

बिजनौर में कुपोषण के खिलाफ प्रशासन की यह पहल केवल औपचारिक समीक्षा नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर बदलाव लाने की तैयारी है। यदि हर गांव में सही समय पर बच्चों की जांच, गर्भवती महिलाओं की निगरानी, पोषण ट्रैकर का प्रभावी उपयोग और विभागों के बीच बेहतर समन्वय सुनिश्चित हुआ, तो आने वाले समय में जिले में कुपोषण और एनीमिया के मामलों में उल्लेखनीय कमी देखी जा सकती है। खास बात यह है कि पहली बार बिना आंगनबाड़ी केंद्र वाले गांवों की अलग सूची तैयार कर उन्हें भी सेवाओं से जोड़ने पर विशेष जोर दिया गया है।

: बिजनौर में कुपोषण के खिलाफ डीएम जसजीत कौर का बड़ा एक्शन। कुपोषित बच्चों और एनीमिया प्रभावित महिलाओं की समयबद्ध पहचान, आंगनबाड़ी केंद्रों की समीक्षा और बिना केंद्र वाले गांवों में नई व्यवस्था की तैयारी। पढ़ें TargetTvLive की विशेष रिपोर्ट।

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