खेल मैदान पर कब्जे का आरोप, कोर्ट के आदेश के बाद भी कार्रवाई नहीं… आखिर कौन रोक रहा है?
ग्रामसभा की जमीन पर कथित अतिक्रमण को लेकर हिंदू राष्ट्र सेना ने डीएम से की सख्त कार्रवाई की मांग, कहा— आदेश लागू नहीं हुए तो बच्चों का भविष्य होगा प्रभावित
रिपोर्ट: अवनीश त्यागी | TargetTvLive
बिजनौर। सरकारी जमीन पर कब्जे के मामलों को लेकर प्रशासन अक्सर कार्रवाई का दावा करता है, लेकिन जब न्यायालय और राजस्व विभाग के आदेशों के बाद भी जमीन कब्जामुक्त न हो, तो कई सवाल खड़े हो जाते हैं। ऐसा ही एक मामला बिजनौर जिले की चांदपुर तहसील के ग्राम पथरावरी से सामने आया है, जहां ग्रामसभा के खेल मैदान पर कथित अवैध कब्जे को लेकर हिंदू राष्ट्र सेना ने जिलाधिकारी को प्रार्थना पत्र सौंपकर तत्काल कार्रवाई की मांग की है।
संगठन का कहना है कि जिस भूमि को राजस्व रिकॉर्ड में वर्षों पहले से खेल-कूद के मैदान के रूप में दर्ज किया गया है, वह आज भी कथित रूप से अवैध कब्जे की गिरफ्त में है। सबसे अहम बात यह बताई गई है कि इस मामले में राजस्व न्यायालय द्वारा बेदखली का आदेश पारित हो चुका है और संबंधित न्यायिक प्रक्रिया भी पूरी हो चुकी है। इसके बावजूद आदेश का पालन नहीं होने का आरोप लगाया गया है।
क्या है पूरा मामला?
हिंदू राष्ट्र सेना के जिला अध्यक्ष रविन्द्र कुमार द्वारा जिलाधिकारी को दिए गए प्रार्थना पत्र के अनुसार ग्राम पथरावरी, परगना बुढ़पुर, तहसील चांदपुर स्थित खसरा संख्या-109, रकबा 0.2020 हेक्टेयर राजस्व अभिलेखों में खेल मैदान के रूप में दर्ज है।
पत्र में कहा गया है कि इस भूमि पर कथित अवैध कब्जे के खिलाफ उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता-2006 की धारा-67 के अंतर्गत कार्रवाई की गई थी और बेदखली का आदेश भी पारित किया गया। साथ ही यह भी उल्लेख किया गया है कि मामले में उच्च न्यायालय तक की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और अब आदेश लागू करने में कोई कानूनी बाधा नहीं है।
‘खेल का मैदान नहीं मिलेगा तो बच्चे कहां खेलेंगे?’
प्रार्थना पत्र में कहा गया है कि खेल मैदान पर कब्जा बने रहने से गांव के बच्चों और युवाओं को सार्वजनिक खेल मैदान का लाभ नहीं मिल पा रहा है। संगठन का कहना है कि यह केवल जमीन का विवाद नहीं, बल्कि ग्रामीण बच्चों के खेल और विकास से जुड़ा मुद्दा भी है।
डीएम से की गईं पांच प्रमुख मांगें
हिंदू राष्ट्र सेना ने जिलाधिकारी से मांग की है कि—
- खेल मैदान से तत्काल कथित अवैध कब्जा हटाया जाए।
- धारा-67 के तहत पारित आदेश का तत्काल पालन कराया जाए।
- जमीन को कब्जामुक्त कर ग्रामसभा को सौंपा जाए और खेल मैदान के रूप में सुरक्षित रखा जाए।
- यदि किसी अधिकारी या कर्मचारी की लापरवाही सामने आती है तो उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
- पूरी कार्रवाई की जानकारी संगठन को लिखित रूप में उपलब्ध कराई जाए।
मामला सिर्फ एक गांव का नहीं, सरकारी व्यवस्था की परीक्षा भी
ग्रामसभा की जमीनें गांव की साझा संपत्ति होती हैं। यदि ऐसी जमीनों पर कब्जे के आरोप लगते हैं और उन्हें हटाने के लिए आदेश भी जारी हो जाते हैं, तो उनका समय पर पालन होना प्रशासनिक व्यवस्था की विश्वसनीयता से भी जुड़ा विषय बन जाता है।
हालांकि, इस मामले में अभी जिला प्रशासन का आधिकारिक पक्ष सामने नहीं आया है। इसलिए यह स्पष्ट नहीं है कि कार्रवाई में देरी के पीछे प्रशासनिक, तकनीकी या अन्य कोई कारण है। प्रशासन की प्रतिक्रिया आने के बाद स्थिति और स्पष्ट हो सकेगी।
अब निगाहें प्रशासन पर
हिंदू राष्ट्र सेना के इस प्रार्थना पत्र के बाद अब लोगों की नजर जिला प्रशासन की अगली कार्रवाई पर है। यदि शिकायत में लगाए गए आरोप सही पाए जाते हैं, तो खेल मैदान को कब्जामुक्त कराना न केवल सरकारी आदेशों का पालन होगा, बल्कि गांव के बच्चों और ग्रामीणों के सार्वजनिक अधिकारों की भी रक्षा करेगा।
TargetTvLive विश्लेषण
सरकारी जमीनों पर अतिक्रमण से जुड़े मामलों में सबसे बड़ा सवाल केवल कब्जा हटाने का नहीं, बल्कि आदेशों के समयबद्ध पालन का होता है। यदि किसी मामले में सभी कानूनी प्रक्रियाएं पूरी हो चुकी हैं, तो कार्रवाई में देरी के कारणों का स्पष्ट होना भी उतना ही जरूरी है। TargetTvLive इस पूरे प्रकरण में जिला प्रशासन का पक्ष भी प्रमुखता से प्रकाशित करेगा, ताकि पाठकों तक तथ्यात्मक और संतुलित जानकारी पहुंचे।
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