“कोर्ट से मिला चार्ज, विकास भवन में ‘रिश्वत राज’!” बिजनौर के DPRO रिजवान अहमद 20 हजार लेते रंगे हाथ गिरफ्तार, जांच में बड़े खुलासे
रिपोर्ट: अवनीश त्यागी | TargetTvLive
📍 बिजनौर: अदालत के आदेश से मिली कुर्सी, अब भ्रष्टाचार के आरोपों में गिरफ्तारी
बिजनौर में भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़ी कार्रवाई में जिला पंचायत राज अधिकारी (DPRO) रिजवान अहमद को 20,000 रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया गया। चौंकाने वाली बात यह है कि उन्हें यह पदभार कोर्ट के आदेश पर मिला था, लेकिन कार्यकाल के दौरान उन पर गंभीर वित्तीय अनियमितताओं के आरोप लगते रहे।
विजिलेंस का ट्रैप: दूसरी किस्त लेते ही दबोचा
सूत्रों के मुताबिक:
- ग्राम विकास अधिकारी (VDO) शुभम (निवासी सुंदरपुर) से काम के एवज में रिश्वत मांगी गई थी।
- यह रकम ‘दूसरी किस्त’ के रूप में दी जा रही थी।
- शिकायत के बाद बरेली से आई विजिलेंस टीम ने जिलाधिकारी से संपर्क कर विकास भवन में जाल बिछाया।
- जैसे ही ₹20,000 की राशि दी गई, टीम ने DPRO को रंगे हाथ पकड़ लिया।
जांच के नाम पर ‘वसूली तंत्र’!
इस पूरे प्रकरण में सबसे बड़ा खुलासा यह सामने आ रहा है कि:
- कई ग्राम प्रधानों के खिलाफ जांच के नाम पर वसूली का खेल चलता रहा।
- सूत्रों के अनुसार, कुछ मामलों में 5 लाख रुपये तक की रिकवरी कर ली गई,
- लेकिन इसके बावजूद ग्राम प्रधानों और सचिवों पर समुचित वैधानिक कार्रवाई नहीं की गई।
👉 इससे यह संकेत मिलता है कि जांच प्रक्रिया का इस्तेमाल दबाव बनाकर पैसे वसूलने के लिए किया जा रहा था।
पोस्टिंग-ट्रांसफर में भी ‘रेट फिक्स’?
सूत्र यह भी बताते हैं कि:
- पंचायत सचिवों को ग्राम पंचायतों के क्लस्टर आवंटन के लिए
- लगभग ₹50,000 तक की रिश्वत ली जाती थी।
👉 यानी, विभाग के भीतर पोस्टिंग और कार्य आवंटन तक में भ्रष्टाचार की गहरी पैठ होने के संकेत मिल रहे हैं।
गिरफ्तारी के बाद क्या हुआ?
- विजिलेंस टीम आरोपी DPRO को अपने साथ बरेली ले गई
- उनके खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है
- अब इस पूरे नेटवर्क में शामिल अन्य लोगों की भूमिका भी खंगाली जा रही है
विश्लेषण: क्या खुलेगा बड़ा ‘पंचायत घोटाला’?
यह मामला सिर्फ एक गिरफ्तारी तक सीमित नहीं दिख रहा, बल्कि:
- पंचायत विभाग में संगठित भ्रष्टाचार नेटवर्क की आशंका
- जांच के नाम पर ब्लैकमेलिंग और सेटिंग सिस्टम
- पोस्टिंग/क्लस्टर आवंटन में पैसे का खेल
👉 अगर गहराई से जांच हुई, तो कई और बड़े नाम सामने आ सकते हैं।
जनता और सिस्टम में हलचल
इस कार्रवाई के बाद:
- विकास भवन में कर्मचारियों के बीच हड़कंप
- आम जनता में भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्ती की उम्मीद
- ईमानदार अधिकारियों के लिए सकारात्मक संदेश
निष्कर्ष
कोर्ट के आदेश से मिली जिम्मेदारी का दुरुपयोग कर अगर भ्रष्टाचार किया गया, तो यह मामला और भी गंभीर बन जाता है। बिजनौर का यह केस अब पूरे प्रदेश के पंचायत सिस्टम की कार्यशैली पर सवाल खड़ा कर रहा है।
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