TET अनिवार्यता पर बिजनौर में शिक्षकों का बड़ा आंदोलन: PM से अध्यादेश लाने की मांग, बोले—‘यह असंवैधानिक’
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📍 बिजनौर से उठी आवाज: TET अनिवार्यता के खिलाफ सड़कों पर उतरे शिक्षक
उत्तर प्रदेश के बिजनौर में टीचर्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (TFI) के बैनर तले सैकड़ों शिक्षकों ने टीईटी (Teacher Eligibility Test) की अनिवार्यता के विरोध में जोरदार प्रदर्शन किया। शिक्षकों ने जिला मुख्यालय स्थित बीएसए कार्यालय पर धरना दिया और कलेक्ट्रेट तक पैदल मार्च कर प्रधानमंत्री के नाम मांग पत्र सौंपा।
इस प्रदर्शन का मुख्य उद्देश्य था शिक्षा का अधिकार अधिनियम लागू होने से पहले नियुक्त शिक्षकों को TET की अनिवार्यता से छूट दिलाना।
क्या है पूरा विवाद? सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद बढ़ी चिंता
शिक्षकों के अनुसार, 1 सितंबर 2025 को आए सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद देश के सभी राज्यों में पूर्व में नियुक्त शिक्षकों के लिए भी पदोन्नति हेतु TET पास करना अनिवार्य कर दिया गया है।
जबकि शिक्षकों का कहना है:
- शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE) 27 जुलाई 2011 से लागू हुआ
- इसलिए इससे पहले नियुक्त शिक्षकों पर TET लागू करना न्यायसंगत नहीं
- यह फैसला संवैधानिक अधिकारों और सेवा शर्तों के विपरीत है
धरने में शिक्षकों का बड़ा बयान: ‘सरकार जबरन नियम थोप रही’
TFI के जिला संयोजक भूपेंद्र कुमार चौहान ने कहा:
“सभी शिक्षकों पर TET की अनिवार्यता थोपना पूरी तरह असंवैधानिक है। सरकार को पुराने शिक्षकों को इस नियम से छूट देनी चाहिए।”
वहीं, जूनियर हाई स्कूल शिक्षक संघ के जिला अध्यक्ष सुधीर कुमार यादव ने कहा:
“शिक्षकों के भविष्य को सुरक्षित रखने के लिए यह आंदोलन जरूरी है। जब तक समाधान नहीं होगा, आंदोलन जारी रहेगा।”
धरने से पैदल मार्च तक: प्रशासन तक पहुंची शिक्षकों की आवाज
- पहले शिक्षक बीएसए कार्यालय पर एकत्र हुए
- वहां धरना देकर सरकार के खिलाफ विरोध दर्ज कराया
- इसके बाद कलेक्ट्रेट तक पैदल मार्च किया
- अंत में जिलाधिकारी के माध्यम से प्रधानमंत्री को ज्ञापन भेजा
ज्ञापन में मांग की गई कि:
👉 संसद में अध्यादेश लाकर 2011 से पहले नियुक्त शिक्षकों को TET से छूट दी जाए
कई बड़े शिक्षक संगठनों ने दिया समर्थन
इस आंदोलन में कई प्रमुख शिक्षक संगठनों ने भाग लिया, जिनमें शामिल हैं:
- उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ
- उत्तर प्रदेशीय जूनियर हाई स्कूल शिक्षक संघ
- उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षक संघ
- सेवानिवृत्त शिक्षक संघ
- आदर्श विशिष्ट BTC वेलफेयर एसोसिएशन
- ऑल टीचर्स एंड एम्पलाई वेलफेयर एसोसिएशन
इन संगठनों ने एकजुट होकर आंदोलन को मजबूत करने का संकल्प लिया।
विश्लेषण: क्यों बड़ा मुद्दा बन गया है TET विवाद?
यह विवाद इसलिए गंभीर है क्योंकि:
- हजारों शिक्षक 2011 से पहले बिना TET के नियुक्त हुए थे
- अब प्रमोशन और सेवा सुरक्षा पर खतरा मंडरा रहा है
- कई शिक्षक सेवानिवृत्ति के करीब हैं, उनके लिए परीक्षा देना मुश्किल
- इससे शिक्षा व्यवस्था में अस्थिरता और असंतोष बढ़ सकता है
विशेषज्ञ मानते हैं कि यदि सरकार ने जल्द समाधान नहीं निकाला, तो यह आंदोलन राज्यव्यापी या राष्ट्रीय स्तर का रूप ले सकता है।
आगे क्या? सरकार के फैसले पर टिकी शिक्षकों की नजर
अब पूरा मामला केंद्र सरकार और संसद के संभावित फैसले पर निर्भर है। यदि सरकार अध्यादेश लाती है तो लाखों शिक्षकों को राहत मिल सकती है, अन्यथा आंदोलन और तेज होने की संभावना है।
- 👉 बिजनौर में TET के खिलाफ शिक्षकों का बड़ा प्रदर्शन
- 👉 PM से अध्यादेश लाकर छूट देने की मांग
- 👉 सुप्रीम कोर्ट के आदेश से बढ़ी शिक्षकों की चिंता
- 👉 बीएसए कार्यालय से कलेक्ट्रेट तक पैदल मार्च
- 👉 कई शिक्षक संगठनों ने दिया समर्थन
निष्कर्ष: शिक्षा व्यवस्था के लिए निर्णायक मोड़
TET अनिवार्यता का मुद्दा अब केवल एक परीक्षा का नहीं, बल्कि शिक्षकों के भविष्य, सम्मान और अधिकारों का सवाल बन गया है। बिजनौर से उठी यह आवाज आने वाले समय में शिक्षा नीति पर बड़ा प्रभाव डाल सकती है।













1 thought on “‘TET नहीं देंगे!’—Teachers Federation of India का ऐलान, बीएसए ऑफिस से कलेक्ट्रेट तक मार्च”
जोर जुल्म ki टक्कर pr sangharsh हमारा naara h,