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मनरेगा में ‘परिवार घोटाला’! 4.67 लाख डकार गया रोजगार सेवक, DM जसजीत कौर का बड़ा एक्शन

मनरेगा में 4.67 लाख का ‘परिवार घोटाला’! बिजनौर में रोजगार सेवक बर्खास्ती के आदेश, FIR से मचा हड़कंप

📍 बिजनौर | डिजिटल डेस्क के लिए                              अवनीश त्यागी की रिपोर्ट 

उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले में मनरेगा योजना के तहत लाखों रुपये के कथित घोटाले ने प्रशासनिक तंत्र को झकझोर दिया है। जिलाधिकारी जसजीत कौर ने गंभीर वित्तीय अनियमितता और पद के दुरुपयोग के मामले में ग्राम रोजगार सेवक की सेवा समाप्त करने और FIR दर्ज कराने के सख्त निर्देश दिए हैं। जांच में जो खुलासे हुए हैं, वे न केवल चौंकाने वाले हैं बल्कि ग्रामीण रोजगार योजनाओं की पारदर्शिता पर भी सवाल खड़े करते हैं।

क्या है पूरा मामला: शिकायत से खुला ‘फर्जी जॉब कार्ड सिंडिकेट’

ग्राम नूरपुर अरब निवासी प्रमोद की शिकायत पर शुरू हुई जांच में सामने आया कि ग्राम रोजगार सेवक शहबाज ने:

  • अपने परिवार के लोगों के फर्जी जॉब कार्ड बनाए
  • बिना काम कराए मस्टररोल भरकर भुगतान कराया
  • दूसरी बिरादरी के जॉब कार्ड में अपने परिवारजनों के नाम जोड़ दिए
  • यहां तक कि काल्पनिक व्यक्तियों के नाम पर भी जॉब कार्ड बनाकर पैसा निकाला

जांच में कुल ₹4,67,436 (चार लाख सड़सठ हजार चार सौ छत्तीस रुपये) के सरकारी धन के दुर्विनियोग की पुष्टि हुई।

आंगनबाड़ी सहायिका भी जांच के घेरे में, फर्जी भुगतान का आरोप

मामले में एक और गंभीर पहलू सामने आया है। नियमित संविदा पर कार्यरत आंगनबाड़ी सहायिका श्रीमती यशोदा को भी फर्जी मस्टररोल के जरिए भुगतान किया गया।

जिलाधिकारी ने जिला कार्यक्रम अधिकारी को निर्देश दिए हैं कि:

  • संबंधित आंगनबाड़ी सहायिका पर कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए
  • सरकारी धन की वसूली सुनिश्चित की जाए

FIR, बर्खास्तगी और रिकवरी: प्रशासन का ताबड़तोड़ एक्शन

जिलाधिकारी ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि:

  • रोजगार सेवक के खिलाफ FIR दर्ज की जाए
  • संविदा तत्काल समाप्त की जाए
  • ग्राम पंचायत की बैठक बुलाकर नियमानुसार कार्रवाई पूरी की जाए
  • दोषियों से सरकारी धन की रिकवरी की जाए

प्रशासन ने इस पूरे मामले को “अत्यंत गंभीर वित्तीय अनियमितता” माना है।

विश्लेषण: क्या मनरेगा में जमीनी स्तर पर है ‘फर्जीवाड़े का नेटवर्क’?

यह मामला केवल एक ग्राम पंचायत तक सीमित नहीं माना जा रहा। विशेषज्ञों के अनुसार, मनरेगा जैसी बड़ी योजना में:

  • जॉब कार्ड सत्यापन की कमी
  • स्थानीय स्तर पर निगरानी कमजोर होना
  • डिजिटल मॉनिटरिंग के बावजूद मैन्युअल हेरफेर

जैसी खामियां भ्रष्टाचार को बढ़ावा देती हैं।

यदि समय रहते शिकायत नहीं होती, तो यह घोटाला लंबे समय तक चलता रह सकता था।

प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती: भरोसा बचाना या सिस्टम बदलना?

यह कार्रवाई प्रशासन की सख्ती जरूर दिखाती है, लेकिन यह भी सवाल उठाती है कि:

  • इतने समय तक फर्जीवाड़ा कैसे चलता रहा?
  • जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय होगी या नहीं?
  • क्या अन्य ग्राम पंचायतों की भी जांच होगी?

जनता के लिए संदेश: शिकायत करें, कार्रवाई होगी

इस मामले ने यह भी साबित किया कि यदि ग्रामीण स्तर पर लोग जागरूक होकर शिकायत करें, तो बड़े से बड़ा भ्रष्टाचार भी उजागर हो सकता है।

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