22 फरवरी को बिजनौर में न्याय का महासंग्राम, एक ही मंच पर सुलझेंगे वैवाहिक, संपत्ति, दुर्घटना और चेक बाउंस जैसे सैकड़ों विवाद
विशेष विश्लेषणात्मक समाचार। अवनीश त्यागी
बिजनौर | न्याय पाने की जटिल प्रक्रिया से जूझ रहे आम नागरिकों के लिए जिला बिजनौर में उम्मीद की बड़ी किरण दिखाई दे रही है। 22 फरवरी 2026 को राजा ज्वाला प्रसाद आर्य इंटर कॉलेज, बिजनौर में आयोजित होने जा रहा मेगा/वृहद विधिक सहायता एवं सेवा शिविर जिले के हजारों लोगों को त्वरित, निःशुल्क और मानवीय न्याय उपलब्ध कराने का माध्यम बनेगा। यह आयोजन केवल एक शिविर नहीं, बल्कि न्याय को अदालत से निकालकर आम आदमी के द्वार तक लाने की ठोस पहल माना जा रहा है।
क्यों ऐतिहासिक है यह मेगा विधिक सहायता शिविर
प्रभारी सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण एवं सिविल जज (सीडी) अंशुमन्न धुन्ना के नेतृत्व में इस शिविर की तैयारियां अंतिम चरण में हैं। सिविल कोर्ट परिसर स्थित एडीआर भवन में हुई उच्चस्तरीय बैठक में स्पष्ट किया गया कि यह आयोजन कागजी कार्रवाई तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि वास्तविक लाभार्थियों को केंद्र में रखकर किया जाएगा।
शिविर का उद्देश्य
- आम नागरिकों को निःशुल्क कानूनी सलाह देना
- वर्षों से लंबित मामलों का आपसी समझौते से निस्तारण
- सरकारी जनकल्याणकारी योजनाओं का सीधा लाभ दिलाना
- न्यायालयों पर बढ़ते बोझ को व्यावहारिक रूप से कम करना
मध्यस्थता अभियान 2.0 से बदलेगा न्याय का चेहरा
यह शिविर राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (नालसा), नई दिल्ली, उत्तर प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, लखनऊ तथा सुप्रीम कोर्ट की मीडिएशन एंड कंसिलिएशन प्रोजेक्ट कमेटी के तत्वावधान में चल रहे ‘राष्ट्र के लिए मध्यस्थता अभियान-2.0’ से जुड़ा हुआ है।
इस अभियान के तहत 02 जनवरी से 15 फरवरी 2026 तक देशभर में लंबित मामलों को सुलह-समझौते से निपटाने का प्रयास किया जा रहा है, ताकि न्याय तेज, सस्ता और तनावमुक्त हो सके।
इन मामलों का मिलेगा त्वरित समाधान
शिविर में निम्नलिखित मामलों को प्राथमिकता दी जाएगी—
- वैवाहिक विवाद और पारिवारिक कलह
- सड़क दुर्घटना दावा प्रकरण
- उपभोक्ता फोरम से जुड़े विवाद
- संपत्ति बंटवारा और उत्तराधिकार मामले
- बेदखली और भूमि अधिग्रहण विवाद
- घरेलू हिंसा से जुड़े प्रकरण
- चेक बाउंस मामले
- उपयुक्त दीवानी एवं आपराधिक मामले
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इन मामलों का समाधान मध्यस्थता से हो जाता है, तो पीड़ितों को वर्षों की कानूनी लड़ाई से राहत मिल सकती है।
सरकारी योजनाओं का लाभ एक ही छत के नीचे
शिविर की एक बड़ी खासियत यह भी है कि इसमें उत्तर प्रदेश सरकार के अधीन संचालित विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी मौके पर ही दी जाएगी।
विभिन्न विभाग—
- पोस्टर, बैनर और पंपलेट के माध्यम से
- मौके पर परामर्श देकर
- पात्र लाभार्थियों की पहचान कर
यह सुनिश्चित करेंगे कि कोई भी जरूरतमंद व्यक्ति योजना के लाभ से वंचित न रहे।
प्रशासनिक भागीदारी से बढ़ेगी विश्वसनीयता
बैठक में अपर पुलिस अधीक्षक ग्रामीण, परियोजना निदेशक डीआरडीए, तहसीलदार सदर सहित कई विभागों के प्रतिनिधियों की मौजूदगी यह दर्शाती है कि यह शिविर केवल न्यायिक नहीं, बल्कि प्रशासनिक रूप से भी मजबूत होगा।
आम आदमी के लिए क्यों जरूरी है यह शिविर
आज जब न्यायालयों में मुकदमों का अंबार लगा है, ऐसे में यह मेगा शिविर वैकल्पिक विवाद समाधान (ADR) की ताकत को जमीन पर उतारने का प्रयास है। यह पहल साबित करती है कि न्याय केवल फैसलों से नहीं, बल्कि समझौते, संवेदना और संवाद से भी मिल सकता है।
यदि यह मॉडल सफल रहता है, तो बिजनौर का यह शिविर प्रदेश ही नहीं, देशभर के लिए मिसाल बन सकता है।
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