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NHAI के नाम पर अवैध खनन का खेल: बिजनौर में कौन दे रहा है संरक्षण ?

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NHAI के नाम पर अवैध खनन का खेल: बिजनौर में कौन दे रहा है संरक्षण ?

(परत-दर-परत खुलती कहानी)

फाइल फोटो

मामला क्या है? (What’s the Issue)

बिजनौर जनपद में NHAI के सब-कॉन्ट्रेक्टर्स द्वारा बिना वैध अनुमति बड़े पैमाने पर मिट्टी का खनन किया जा रहा है। यह खनन किसी छुपे इलाके में नहीं, बल्कि जनपद मुख्यालय की सड़कों पर ओवरलोड डंपरों के जरिए खुलेआम हो रहा है। इसके बावजूद प्रशासनिक तंत्र खामोश दिखाई देता है।

कहां-कहां हो रहा है अवैध खनन?

  • चांदपुर रोड, बिजनौर से भारी मात्रा में मिट्टी से भरे डंपर
  • दिन के उजाले में आवाजाही
  • न कोई रोक-टोक, न कोई चेकिंग

यह सब तब, जब खुद खनन विभाग मानता है कि पूरे जनपद में सिर्फ 5 स्थानों पर ही मिट्टी खनन की अनुमति है।

सरकारी रिकॉर्ड बनाम जमीनी हकीकत

खनन अधिकारी सुभाष रंजन के अनुसार:

  • जनपद में लगभग 5 वैध परमिशन
  • इनमें से 1–2 की अवधि समाप्त
  • बिजनौर तहसील में सिर्फ 1 वैध अनुमति

👉 लेकिन सवाल यह है कि
अगर परमिशन सीमित है, तो सैकड़ों डंपर कहां से आ रहे हैं?

सवाल पूछे गए, जवाब नहीं मिले

  • जब अवैध डंपरों की जानकारी खनन अधिकारी को दी गई → निरुत्तर
  • ADM वान्या सिंह को पूरे तथ्य बताए गए → स्पष्ट जवाब नहीं
  • खनन विभाग के वरिष्ठ लिपिक से पूछा गया कि
    “बिना परमिशन खनन क्यों?”चुप्पी

यह चुप्पी महज संयोग है या सिस्टम की कमजोरी?

 किसे फायदा, किसे नुकसान?

फायदा:

  • NHAI के सब-कॉन्ट्रेक्टर्स
  • अवैध खनन माफिया
  • सरकारी रॉयल्टी से बचाव

नुकसान:

  • सरकारी राजस्व
  • पर्यावरण संतुलन
  • स्थानीय सड़कें और ग्रामीण क्षेत्र
  • आम जनता की सुरक्षा

 कानून क्या कहता है?

  • बिना अनुमति खनन खनन अधिनियम का सीधा उल्लंघन
  • ओवरलोड डंपर चलाना मोटर व्हीकल एक्ट का अपराध
  • पर्यावरणीय क्षति पर NGT तक कार्रवाई संभव

फिर भी कार्रवाई शून्य क्यों?

जांच का सबसे अहम सवाल

क्या—

  • प्रशासन को सब दिख रहा है लेकिन कार्रवाई नहीं हो रही?
    या
  • NHAI के नाम पर चल रहे इस खेल को अघोषित संरक्षण प्राप्त है?

जब अधिकारी सवालों पर चुप हों, तो शक गहराना स्वाभाविक है।

एक्सप्लेनर निष्कर्ष

इस पूरे प्रकरण में सब कुछ रिकॉर्ड में है, सिवाय जवाब के
यह मामला सिर्फ अवैध खनन का नहीं, बल्कि प्रशासनिक जवाबदेही,
कानून के राज और सार्वजनिक हित का है।

अब जरूरत है—

  • उच्चस्तरीय जांच की
  • परमिशन की सार्वजनिक सूची की
  • डंपरों की GPS व चालान जांच की

वरना सवाल यही रहेगा:
बिजनौर में कानून खामोश क्यों है?

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