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ज़हर बन गया पीने का पानी: अमरोहा में किसानों का फूटा गुस्सा, किया पुतला दहन

ज़हर बन गया पीने का पानी: अमरोहा में किसानों का फूटा गुस्सा, किया पुतला दहन

“पीला पानी, बीमार बच्चे और 42 दिन का विद्रोह”

अमरोहा में ज़हरीले पानी के खिलाफ किसानों का आर-पार, ‘स्वस्थ उत्तर प्रदेश’ के दावे कटघरे में

अमरोहा, 31 जनवरी। रिपोर्टएम पी सिंह 
विकास और सरकारी योजनाओं के शोर के बीच अमरोहा जिले का गजरौला क्षेत्र ज़हरीले पानी की चुपचाप फैलती त्रासदी का गवाह बन गया है। हालात इतने भयावह हैं कि साफ पानी के लिए लोगों को अपनी जान दांव पर लगानी पड़ रही है। 31 जनवरी को प्रशासनिक लापरवाही के विरोध में किसानों ने पुतला दहन किया, जिसमें महिलाओं की बड़ी भागीदारी ने आंदोलन को जनविद्रोह का रूप दे दिया।

शहबाजपुर डोर गांव में भारतीय किसान यूनियन (संयुक्त मोर्चा) का बेमियादी धरना 42वें दिन भी जारी है। कड़ाके की ठंड, घना कोहरा और विपरीत मौसम भी किसानों के हौसले नहीं तोड़ सके। यह लड़ाई अब सिर्फ पानी की नहीं, बल्कि जीने के अधिकार की बन चुकी है।

जल नल योजना के दावे फेल, नाईपुरा में ज़हर बह रहा

सरकार जहां जल नल योजना को ऐतिहासिक उपलब्धि बता रही है, वहीं नाईपुरा गांव इसकी सच्चाई उजागर कर रहा है। यहां

  • हैंडपंप और ट्यूबवेल से पीला, केमिकल युक्त ज़हरीला पानी
  • गांव में कैंसर, दमा, श्वसन रोग जैसी बीमारियों का बढ़ता खतरा
  • फसलें बर्बाद, पशु बीमार, अकाल मौतों की आशंका

ग्रामीणों का कहना है कि वे रोज़ पानी नहीं, धीमा ज़हर पीने को मजबूर हैं।

इंदौर की त्रासदी से भी नहीं जागा प्रशासन

मध्य प्रदेश के इंदौर में दूषित पानी से हुई हालिया मौतों ने पूरे देश को झकझोरा, लेकिन नाईपुरा के लिए यह चेतावनी भी बेअसर साबित हो रही है।
किसानों का आरोप है कि बड़े कारखाने रासायनिक अपशिष्ट खुलेआम जलस्रोतों में छोड़ रहे हैं, और प्रशासन आंख मूंदे बैठा है।

‘स्वस्थ उत्तर प्रदेश’ पर तीखा सवाल

रायबरेली एम्स में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जगतप्रकाश नड्डा और उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक की मौजूदगी में किसान नेताओं ने सवाल दागा—

“अगर उत्तर प्रदेश स्वस्थ है, तो नाईपुरा के बच्चे क्यों बीमार हैं?”

नेताओं ने कहा कि स्थानीय लोग नहर, नदी और भूजल बचाने की कोशिश कर रहे हैं, जबकि औद्योगिक प्रदूषण उन्हें बीमार कर रहा है

विकास या विनाश? भविष्य दांव पर

वक्ताओं ने चेताया कि यह दौर तकनीकी प्रगति के साथ बढ़ते प्रदूषण और जलवायु संकट का है।
प्रश्न सीधा है—
नाईपुरा के मासूम बच्चे भविष्य की उम्मीद हैं या लापरवाही की बलि?
जब तक समाज और प्रशासन नहीं जागेगा, मिट्टी, पानी और जीवन सुरक्षित नहीं रह पाएंगे।

किसान एकजुट, आंदोलन मजबूत

इस आंदोलन में वयोवृद्ध किसान नेता चौधरी चरणसिंह, राष्ट्रीय प्रवक्ता डॉ. गौतम लम्बरदार, प्रमुख सचिव अरुण सिद्धू, राष्ट्रीय सचिव चंद्रपाल सिंह, प्रदेशाध्यक्ष रामकृष्ण चौहान, डॉ. जयपाल सिंह, एहसान अली, सुरेंद्र सिंह प्रधान, अब्दुल राशिद, दिलशाद चौधरी, अमरजीत देओल, आसिफ चौधरी, ओम प्रकाश, होमपाल सिंह, असगर चौधरी, अब्दुल रहीम, मनोहर लाल, आलम चौधरी, हरिद्वारी सिंह समेत बड़ी संख्या में किसान जत्थेबंदियां मौजूद रहीं।

निष्कर्ष

अमरोहा का यह आंदोलन अब सिर्फ स्थानीय विरोध नहीं, बल्कि देश में बढ़ते जल संकट और औद्योगिक प्रदूषण के खिलाफ चेतावनी है।
अगर अब भी ठोस कार्रवाई नहीं हुई, तो यह ज़हरीला पानी आने वाली पीढ़ियों के भविष्य को निगल सकता है।

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