कलम बनाम सत्ता: 1780 से आज तक प्रेस की निर्भीक लड़ाई, अमरोहा में मना भारतीय समाचार पत्र दिवस
अमरोहा, 29 जनवरी। विशेष रिपोर्ट। डिजिटल डेस्क
लोकतंत्र की आत्मा कही जाने वाली पत्रकारिता के ऐतिहासिक संघर्ष और गौरवशाली विरासत को याद करते हुए अमरोहा में आज भारतीय समाचार पत्र दिवस पूरे उत्साह और वैचारिक गंभीरता के साथ मनाया गया। यह अवसर न केवल भारत में प्रिंट पत्रकारिता की शुरुआत को रेखांकित करता है, बल्कि प्रेस की स्वतंत्रता, साहस और जिम्मेदारी पर गहन मंथन का भी मंच बना।
कार्यक्रम में वक्ताओं ने स्पष्ट किया कि पत्रकारिता केवल समाचार देने का माध्यम नहीं, बल्कि सत्ता से सवाल पूछने और समाज की आवाज बनने का साहसी संकल्प है।
1780: जब एक अख़बार सत्ता से टकरा गया
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए डॉ. महताब अमरोहवी ने कहा कि 29 जनवरी 1780 भारतीय पत्रकारिता के इतिहास में क्रांति का दिन है। इसी दिन कोलकाता (तत्कालीन कलकत्ता) से जेम्स ऑगस्टस हिक्की ने ‘हिक्कीज़ बंगाल गजट’ का प्रकाशन शुरू किया, जो भारत ही नहीं बल्कि एशिया का पहला मुद्रित समाचार पत्र था।
यह साप्ताहिक अख़बार अंग्रेज़ी भाषा में प्रकाशित हुआ और ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी के शासनकाल में सत्ता की नीतियों, भ्रष्टाचार और अन्याय के विरुद्ध खुलकर लिखा। हिक्की का नारा था—
“यह अख़बार सबके लिए है, लेकिन किसी के दबाव में नहीं।”
सच लिखने की सज़ा: जेल और प्रेस जब्ती
उत्तर प्रदेश मान्यता प्राप्त पत्रकार समिति के संरक्षक तुलाराम ठाकुर ने कहा कि हिक्की की निर्भीक पत्रकारिता ब्रिटिश हुकूमत को रास नहीं आई। 1782 में ईस्ट इंडिया कंपनी ने अख़बार का प्रेस जब्त कर लिया और हिक्की को जेल भेज दिया।
उन्होंने कहा कि भले ही अख़बार मात्र दो वर्ष चला, लेकिन इसने स्वतंत्र प्रेस की नींव रख दी, जिसने आगे चलकर भारतीय स्वतंत्रता संग्राम को वैचारिक शक्ति दी। इसी कारण हिक्की को “भारतीय प्रेस का जनक” कहा जाता है।
डिजिटल दौर में भी प्रिंट मीडिया की साख कायम
जिलाध्यक्ष महिपाल सिंह ने कहा कि भारतीय समाचार पत्र दिवस हमें यह याद दिलाता है कि पत्रकारिता समाज का दर्पण है। उन्होंने कहा—
“1780 में शुरू हुआ साहस का यह सफर आज भी जारी है। डिजिटल युग के बावजूद प्रिंट मीडिया की विश्वसनीयता, तथ्यपरकता और गहन विश्लेषण की अहमियत बनी हुई है।”
उन्होंने यह भी कहा कि अमरोहा जिले में पत्रकार संगठन निष्पक्ष, निर्भीक और जनहितकारी पत्रकारिता को मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
लोकतंत्र का चौथा स्तंभ आज भी चौकस
वक्ताओं ने एक स्वर में कहा कि आज जब सूचना का प्रवाह तेज़ है, तब जिम्मेदार और सत्यनिष्ठ पत्रकारिता की आवश्यकता पहले से कहीं अधिक बढ़ गई है। भारतीय समाचार पत्र दिवस प्रेस की आज़ादी, सूचना के अधिकार और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा का संकल्प दोहराने का दिन है।
पत्रकारों को शुभकामनाएं
इस अवसर पर सभी पत्रकारों, संपादकों और मीडिया कर्मियों को भारतीय समाचार पत्र दिवस की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दी गईं।
सत्य, साहस और सवाल पूछने की परंपरा को जीवित रखने में आपका योगदान अमूल्य है।
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