बिजनौर की 14 वर्षीय तीरंदाज निष्ठा गुप्ता का इंटरनेशनल सेलेक्शन: तुर्की कैंप तक का सफर, जिले के खेल भविष्य का संकेत

बिजनौर | स्पोर्ट्स डेस्क के लिए अवनीश त्यागी| 25 जनवरी 2026
उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले से एक प्रेरक और उम्मीद जगाने वाली खबर सामने आई है। ग्राम शादीपुर की 14 वर्षीय तीरंदाज निष्ठा गुप्ता का चयन भारतीय सब-जूनियर नेशनल तीरंदाजी टीम के कोचिंग कैंप और अंतरराष्ट्रीय प्रशिक्षण शिविर (तुर्की) के लिए हुआ है। यह उपलब्धि न केवल निष्ठा के व्यक्तिगत संघर्ष और प्रतिभा को दर्शाती है, बल्कि बिजनौर जैसे अपेक्षाकृत छोटे जिले में उभर रही खेल संस्कृति का भी मजबूत संकेत देती है।
क्यों खास है निष्ठा गुप्ता का चयन?
निष्ठा का चयन किसी एक प्रतियोगिता तक सीमित उपलब्धि नहीं है, बल्कि यह उनके लगातार प्रदर्शन की श्रृंखला का परिणाम है।
पिछले महीने छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में आयोजित जूनियर नेशनल तीरंदाजी प्रतियोगिता में कंपाउंड वर्ग में उपविजेता बनने के बाद उन्हें यह अवसर मिला। इसके अतिरिक्त, हाल ही में रांची में आयोजित एसजीएफआई खेलों में निष्ठा ने स्वर्ण सहित कुल तीन पदक जीतकर अपनी तकनीकी दक्षता और मानसिक मजबूती का परिचय दिया था।
राष्ट्रीय से अंतरराष्ट्रीय मंच तक की तैयारी
आर्चरी एसोसिएशन ऑफ इंडिया के अनुसार, निष्ठा पहले देश में एक माह का विशेष प्रशिक्षण प्राप्त करेंगी। इसके बाद
16 मार्च से 26 मार्च 2026 तक
📍 तुर्की (विदेशी प्रशिक्षण कैंप)
में अंतरराष्ट्रीय कोचों की देखरेख में उन्नत तकनीक, खेल रणनीति और मानसिक प्रशिक्षण लेंगी। यह कैंप भविष्य की भारतीय राष्ट्रीय टीम के लिए संभावित खिलाड़ियों को तैयार करने की दिशा में बेहद अहम माना जाता है।
बिजनौर बन रहा है खेल प्रतिभाओं की नर्सरी
जिला क्रीड़ा अधिकारी राजकुमार सिंह के अनुसार, बीते कुछ वर्षों में बिजनौर से कई खिलाड़ी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उभरकर सामने आए हैं। निष्ठा गुप्ता का चयन इस बात का प्रमाण है कि यदि प्रतिभा को सही मंच और मार्गदर्शन मिले, तो ग्रामीण पृष्ठभूमि से भी अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंच संभव है।
प्रशासन का संदेश: खेल प्रतिभाओं को मिलेगा पूरा सहयोग
जिलाधिकारी जसजीत कौर ने निष्ठा की सफलता को जिले के लिए गर्व का विषय बताते हुए कहा कि
“निष्ठा गुप्ता जैसी बेटियां आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा हैं। प्रशासन खेल प्रतिभाओं को हरसंभव सहयोग देने के लिए प्रतिबद्ध है।”
यह बयान इस ओर भी इशारा करता है कि भविष्य में जिले में खेल अधोसंरचना और प्रशिक्षण सुविधाओं को और मजबूत किया जा सकता है।
सिर्फ एक चयन नहीं, सोच में बदलाव का संकेत
निष्ठा गुप्ता की कहानी सिर्फ एक खिलाड़ी की सफलता नहीं है, बल्कि यह
- बेटियों के प्रति बदलती सामाजिक सोच
- ग्रामीण क्षेत्रों में खेलों की बढ़ती स्वीकार्यता
- और कम उम्र में अंतरराष्ट्रीय एक्सपोज़र की अहमियत
को भी रेखांकित करती है।
यदि ऐसे खिलाड़ियों को निरंतर समर्थन मिला, तो आने वाले वर्षों में बिजनौर का नाम खेल मानचित्र पर और मजबूती से उभर सकता है।
14 साल की उम्र में अंतरराष्ट्रीय प्रशिक्षण कैंप तक पहुंचना आसान नहीं होता। निष्ठा गुप्ता ने यह साबित कर दिया है कि प्रतिभा, अनुशासन और अवसर मिलकर असाधारण परिणाम दे सकते हैं। अब निगाहें तुर्की कैंप और उसके बाद अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं पर होंगी, जहां निष्ठा से देश को बड़ी उम्मीदें हैं।
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