अब गन्ना देगा ज्यादा मिठास और मुनाफा! बिजनौर में बिंदल शुगर मिल से शुरू हुई खेती की नई क्रांति
बिजनौर न्यूज़ डेस्क | कृषि एक्सक्लूसिव रिपोर्ट
बिजनौर के गन्ना किसानों के लिए यह खबर किसी गेम चेंजर से कम नहीं है। आने वाले समय में न सिर्फ गन्ने की पैदावार बढ़ेगी, बल्कि चीनी परता और किसानों की आमदनी में भी बड़ा उछाल देखने को मिलेगा। गन्ना एवं चीनी आयुक्त, उत्तर प्रदेश के निर्देशों के तहत बिंदल शुगर मिल, चांगिपुर (नूरपुर) में “गन्ना प्रजाति पहचान, रोग प्रबंधन एवं आधुनिक खेती” विषय पर आयोजित वृहद प्रशिक्षण कार्यशाला ने जनपद में गन्ना खेती की दिशा और दशा दोनों बदलने का संकेत दे दिया है।
इस उच्चस्तरीय प्रशिक्षण में जिला गन्ना अधिकारी, मिल प्रबंधन, गन्ना विकास विभाग के अधिकारी-कर्मचारी सहित करीब 65 कार्मिकों ने हिस्सा लिया। उद्देश्य साफ था—बसंतकालीन बुवाई से पहले वैज्ञानिक खेती को पूरी ताकत के साथ लागू करना।
एलईडी स्क्रीन पर लाइव डेमो, खेतों में उतरेगी तकनीक
कार्यशाला का सबसे खास आकर्षण रहा वैज्ञानिकों का लाइव डेमो सेशन।
कृषि विज्ञान केंद्र, नगीना के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. के.के. सिंह और गन्ना शोध परिषद, मुजफ्फरनगर के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. जे.पी. सिंह ने गन्ने की पत्तियों, मिडरिब, बड्स, पोरियों के रंग और ब्रिक्स के आधार पर प्रजातियों की ऐसी पहचान कराई, जो आम तौर पर सिर्फ शोध संस्थानों तक सीमित रहती है।
विशेषज्ञों ने स्पष्ट कहा कि गलत प्रजाति ही कम पैदावार और रोगों की सबसे बड़ी वजह है।
चार फॉर्मूले जो बदल देंगे किसान की तकदीर
वैज्ञानिकों ने गन्ना उत्पादन में क्रांतिकारी बदलाव के लिए चार निर्णायक उपाय बताए—
🔥 ड्रिप सिंचाई: कम पानी, ज्यादा उत्पादन
ड्रिप सिस्टम से 50% तक पानी की बचत और फर्टिगेशन से जड़ों तक सीधे पोषण, जिससे गन्ना मोटा, रसदार और ज्यादा चीनी देने वाला बनता है।
🐛 टॉप बोरर पर जैविक वार
रसायनों को अलविदा कहकर ट्राइकोग्रामा कार्ड अपनाने की सलाह, जो मित्र कीटों के जरिए फसल की प्राकृतिक सुरक्षा करता है।
लाइट और फेरोमोन ट्रैप से कीटों पर लगाम
यांत्रिक नियंत्रण को बढ़ावा देते हुए रोगग्रस्त पौधों को जड़ से उखाड़कर नष्ट करने के निर्देश दिए गए।
प्राकृतिक खेती: मिट्टी जिंदा, मुनाफा दोगुना
जीवामृत और घनजीवामृत से मिट्टी की ताकत बढ़ाने और खेती की लागत घटाने पर विशेष जोर।
को-0238 पर पूरी तरह ब्रेक, नई प्रजातियों को हरी झंडी
कार्यशाला के समापन पर जिला गन्ना अधिकारी, बिजनौर ने बसंतकालीन बुवाई को लेकर सख्त लेकिन जरूरी फैसले सुनाए—
- रेड रॉट का खतरा:
जनपद में को-0238 प्रजाति पर पूरी तरह रोक, गांव-गांव जागरूकता अभियान चलेगा। - प्रजातीय संतुलन अनिवार्य:
कोई भी प्रजाति 50% से ज्यादा क्षेत्र में नहीं बोई जाएगी। - नई अगेती प्रजातियां होंगी प्राथमिकता:
कोएस 13235, 17231, 18231, 19231, को 0118, कोल 14201, कोल 16202 को बढ़ावा। - जलभराव क्षेत्रों के लिए अलग रणनीति:
को 98014 और कोएस 13231 को अपनाने की सिफारिश।
खेतों की होगी डिजिटल निगरानी, ऐप पर अपलोड होगा पूरा डेटा
20 जनवरी से 5 फरवरी 2026 तक चलने वाले खड़े गन्ने के सत्यापन अभियान के दौरान नर्सरी, डेमो प्लॉट और फसलों का भौतिक सत्यापन कर सीड ट्रैकिंग ऐप पर रियल टाइम डेटा फीड किया जाएगा। इससे पारदर्शिता और योजना दोनों मजबूत होंगी।
क्यों खास है यह कार्यशाला?
यह कार्यशाला केवल एक औपचारिक आयोजन नहीं, बल्कि बिजनौर में गन्ना खेती की दिशा बदलने वाला ब्लूप्रिंट है।
अगर यह रणनीति जमीन पर पूरी तरह लागू होती है, तो आने वाले सीजन में बिजनौर न सिर्फ उत्पादन में, बल्कि गुणवत्ता और लाभ में भी प्रदेश में मिसाल बनेगा।
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