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डिजिटल अरेस्ट के नाम पर साइबर लूट: 18 से 196 तक पहुँचे केस, जानिए ठगों का पूरा नेटवर्क और बचाव के तरीके

डिजिटल अरेस्ट के नाम पर साइबर लूट: 18 से 196 तक पहुँचे केस, जानिए ठगों का पूरा नेटवर्क और बचाव के तरीके

वीडियो कॉल पर फर्जी पुलिस, CBI-ED की धमकी और मिनटों में खाली हो रहा बैंक अकाउंट — यही है डिजिटल अरेस्ट स्कैम
विश्लेषणात्मक रिपोर्ट | साइबर डेस्क         अवनीश त्यागी 

देश में साइबर अपराध का एक नया और बेहद खतरनाक रूप सामने आया है, जिसे ‘डिजिटल अरेस्ट साइबर स्कैम’ कहा जा रहा है। यह ठगी न केवल तकनीकी रूप से उन्नत है, बल्कि मानसिक दबाव, डर और सरकारी एजेंसियों के नाम के दुरुपयोग पर आधारित है।

सरकारी आंकड़े बताते हैं कि जहां वर्ष 2023 में डिजिटल अरेस्ट से जुड़े सिर्फ 18 मामले दर्ज हुए थे, वहीं 2024 में इनकी संख्या बढ़कर 196 हो गई। यह वृद्धि इस बात का संकेत है कि साइबर अपराधी अब आम जनता की कमजोरियों को और ज्यादा सुनियोजित तरीके से निशाना बना रहे हैं।

क्या है ‘डिजिटल अरेस्ट स्कैम’?

डिजिटल अरेस्ट स्कैम में साइबर ठग खुद को—

  • पुलिस अधिकारी
  • CBI / ED / नारकोटिक्स / एयरपोर्ट अथॉरिटी
  • साइबर क्राइम अधिकारी

बताकर फोन कॉल, वीडियो कॉल, व्हाट्सऐप या स्काइप के जरिए संपर्क करते हैं।

झूठा आरोप, असली डर

पीड़ित को बताया जाता है कि वह—

  • मनी लॉन्ड्रिंग
  • ड्रग्स तस्करी
  • अवैध बैंक लेन-देन

जैसे गंभीर अपराधों में शामिल है और उसे तुरंत डिजिटल अरेस्ट किया जा रहा है।

फर्जी वर्दी, नकली कोर्ट और वीडियो कॉल का जाल

डिजिटल अरेस्ट गिरोह के तरीके चौंकाने वाले हैं—

  • फर्जी पुलिस स्टेशन और कोर्ट रूम का वीडियो बैकग्राउंड
  • नकली गिरफ्तारी वारंट
  • फर्जी दस्तावेज़ और सरकारी लेटरहेड
  • वीडियो कॉल पर वर्दी में बैठे लोग

इन सबका मकसद सिर्फ एक — डर पैदा कर पैसे ऐंठना

‘जमानत राशि’ के नाम पर लूट

ठग पीड़ित को बताते हैं कि—

“अगर अभी जमानत/फाइन नहीं दिया गया तो तुरंत गिरफ्तारी होगी”

डर के मारे लोग—

  • बैंक अकाउंट
  • UPI
  • डिजिटल वॉलेट

के ज़रिये लाखों रुपये ट्रांसफर कर देते हैं।

विदेशों से संचालित हो रहे हैं नेटवर्क

जांच एजेंसियों के अनुसार, डिजिटल अरेस्ट के अधिकांश गिरोह—

  • म्यांमार
  • लाओस
  • कंबोडिया

जैसे दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों से संचालित हो रहे हैं।
भारत में फर्जी सिम कार्ड और बैंक खातों का इस्तेमाल किया जाता है।

सरकार और एजेंसियां अलर्ट मोड में

डिजिटल अरेस्ट स्कैम की गंभीरता को देखते हुए कई केंद्रीय एजेंसियां सक्रिय हैं—

🔹 गृह मंत्रालय (MHA)

  • I4C के जरिए फर्जी नंबर और स्काइप ID ब्लॉक
  • राज्यों को एडवाइजरी जारी

🔹 राष्ट्रीय साइबर अपराध पोर्टल

🔹 CERT-In (MeitY)

  • तकनीकी विश्लेषण
  • साइबर हमलों की पहचान

🔹 RBI

  • फर्जी खातों को फ्रीज़
  • संदिग्ध ट्रांजैक्शन पर नजर

🔹 CBI

  • अंतरराष्ट्रीय साइबर सिंडिकेट पर कार्रवाई

प्रधानमंत्री की चेतावनी: ‘रुको, सोचो, कार्रवाई करो’

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 27 अक्टूबर 2024 को मन की बात कार्यक्रम में डिजिटल अरेस्ट स्कैम पर विशेष रूप से जनता को आगाह किया था।

उन्होंने साफ कहा—

“डिजिटल अरेस्ट जैसा कोई कानूनी प्रावधान नहीं है। डर के बजाय समझदारी जरूरी है।”

कैसे पहचानें डिजिटल अरेस्ट स्कैम ?

✔️ कोई भी सरकारी एजेंसी वीडियो कॉल पर गिरफ्तारी नहीं करती
✔️ पुलिस कभी पैसे या बैंक डिटेल नहीं मांगती
✔️ धमकी और जल्दबाज़ी — ठगी का पहला संकेत
✔️ अनजान नंबर से आई कॉल पर भरोसा न करें

ठगी हो जाए तो क्या करें ?

Golden Hour में तुरंत शिकायत करें

  • 📞 साइबर हेल्पलाइन: 1930
  • 🌐 पोर्टल: cybercrime.gov.in

जितनी जल्दी शिकायत, उतनी ज्यादा पैसे की रिकवरी की संभावना

डिजिटल अरेस्ट: आंकड़े जो डराते हैं

वर्ष दर्ज मामले
2023 18
2024 196

डर से नहीं, जागरूकता से रुकेगा साइबर अपराध

डिजिटल अरेस्ट स्कैम साबित करता है कि साइबर अपराध अब सिर्फ तकनीकी नहीं, बल्कि मनोवैज्ञानिक युद्ध बन चुका है।
सरकार, पुलिस और एजेंसियां अपना काम कर रही हैं, लेकिन सबसे बड़ा हथियार है – जागरूक नागरिक

डिजिटल अरेस्ट का डर दिखाने वाला हर कॉल ठगी नहीं, लेकिन हर धमकी भरी कॉल को सच मान लेना सबसे बड़ी भूल हो सकती है।

👉 रुको। सोचो। फिर कार्रवाई करो।

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