बिजनौर में गन्ना तौल पर महाबवाल: घटतौली के आरोपों के बीच किसान नेताओं पर केस, मिल प्रबंधन पर साजिश के सवाल
40 किलो घटतौली के आरोप, वायरल वीडियो, SDM की छापेमारी और ‘कांटा खराब’ बहानों ने खोली गन्ना तौल व्यवस्था की पोल
बिजनौर | डिजिटल डेस्क
जनपद बिजनौर में गन्ना तौल को लेकर उठा विवाद अब केवल एक हंगामे तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह किसानों बनाम मिल प्रबंधन के बीच विश्वास की गहरी खाई को उजागर कर रहा है। मंडावर स्थित बरकातपुर चीनी मिल के मंडावर-ए गन्ना क्रय केंद्र पर हुए घटनाक्रम ने पूरे जिले में गन्ना तौल की पारदर्शिता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
किसान संगठनों का आरोप है कि घटतौली की घटनाओं को दबाने के लिए मिल प्रबंधन सुनियोजित तरीके से बहाने गढ़ रहा है, जबकि प्रशासनिक जांच में फिलहाल कोई कमी सामने नहीं आई है। इसी टकराव के बीच मामला अब पुलिस केस, वायरल वीडियो और राजनीतिक बयानबाजी का रूप ले चुका है।
क्या है पूरा मामला?
बीते बृहस्पतिवार को लायकपुरी गांव का एक किसान गन्ना लेकर मंडावर-ए क्रय केंद्र पहुंचा। इसी दौरान भाकियू लोकशक्ति के जिलाध्यक्ष वीर सिंह अन्य किसानों के साथ मौके पर पहुंचे और 40 किलोग्राम घटतौली का आरोप लगाते हुए विरोध शुरू कर दिया।
स्थिति तब और तनावपूर्ण हो गई जब क्रय केंद्र पर 50 से अधिक तौल लिपिक एकत्र हो गए। दोनों पक्षों के बीच तीखी नोकझोंक हुई, मारपीट के आरोप लगे और पूरे घटनाक्रम का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया, जिससे मामला और भड़क गया।
किसान संगठनों का दावा है कि यह कोई पहली घटना नहीं है। वीर सिंह पहले भी एक अन्य क्रय केंद्र पर घटतौली पकड़े जाने का दावा कर चुके हैं।
केस दर्ज, आरोप गंभीर
घटना के बाद तौल लिपिक नितिन कुमार की तहरीर पर लायकपुरी निवासी अमित, रामौतार, चमरौला गांव के वीर सिंह, हिमांशु और मायापुरी निवासी नितिन समेत आठ लोगों के खिलाफ मारपीट, धमकी और अन्य गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया।
इस कार्रवाई के बाद किसान संगठनों में आक्रोश है और वे इसे घटतौली के मुद्दे से ध्यान भटकाने की कोशिश बता रहे हैं।
प्रशासन एक्शन में: SDM की छापेमारी
मामले की गंभीरता को देखते हुए एसडीएम सदर रितु चौधरी के नेतृत्व में गठित टीम ने शनिवार को कई गन्ना क्रय केंद्रों पर औचक निरीक्षण किया।
निरीक्षण किए गए केंद्र:
- बरकातपुर चीनी मिल – मुजफ्फरपुर केशो
- बिलाई चीनी मिल – मंडावली क्रय केंद्र
- बिजनौर चीनी मिल – काजीवाला क्रय केंद्र
ज्येष्ठ गन्ना विकास निरीक्षक दलेश्वर मिश्रा के अनुसार, तीनों केंद्रों की बारीकी से जांच की गई, लेकिन घटतौली की कोई पुष्टि नहीं हुई।
हालांकि, किसान संगठनों का कहना है कि जांच औपचारिक रही, जबकि जमीनी हकीकत कुछ और है।
मिल प्रबंधन का पक्ष और उठते सवाल
बरकातपुर उत्तम शुगर मिल के यूनिट हेड नरपत सिंह राठौर ने घटतौली के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि
“जोन ऑफिस मंडावर में ही है। घटना की सूचना पर सभी तौल लिपिक वहां पहुंचे थे। कोई घटतौली नहीं पकड़ी गई। कांटा खराब होने के कारण तौल बंद की गई थी।”
लेकिन मीडिया रिपोर्ट्स में आए इस बयान के बाद कई सवाल खड़े हो रहे हैं—
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क्या तौल लिपिक वास्तव में दोपहर में तौल कार्य बंद कर जोनल ऑफिस में रिपोर्ट जमा करने आते हैं?
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हर बार “कांटा खराब” या “मशीन टूट गई” जैसे बहाने क्यों सामने आते हैं?
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क्या यह संयोग है या एक पूर्व नियोजित रणनीति?
किसान संगठन का पलटवार
भाकियू लोकशक्ति के जिलाध्यक्ष वीर सिंह ने आरोप लगाया कि—
“मंडावर-ए क्रय केंद्र पर तौल लिपिकों ने खुद मशीन तोड़कर किसानों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई। मकसद साफ है—किसानों को डराकर दबाना, ताकि बिना विरोध के गन्ने के वजन में घटतौली की जा सके।”
उन्होंने यह भी कहा कि पहले भी चीनी मिल गेट और नांगल क्रय केंद्र पर घटतौली पकड़ी जा चुकी है, और किसान इसे किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं करेंगे।
घटतौली या किसानों को दबाने की साजिश?
पूरा घटनाक्रम कई अहम सवाल छोड़ता है—
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क्या गन्ना तौल में वास्तव में घटतौली हो रही है?
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क्या मशीन खराब होने और तौल रोकने के बहाने सच्चाई छुपाने की कोशिश हैं?
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या फिर यह किसान संगठनों को कानूनी दबाव और मुकदमों से डराने की रणनीति है?
फिलहाल, मामला पुलिस जांच, प्रशासनिक रिपोर्ट और राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के बीच उलझा हुआ है। वायरल वीडियो और आगे की जांच ही यह तय करेगी कि सच किसानों के पक्ष में है या मिल प्रबंधन के।
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