8वें वेतन आयोग पर पेंशनर्स का आक्रोश: बिजनौर में सिविल इंजीनियर्स और सेवानिवृत्त कर्मचारियों ने खोला मोर्चा

क्लॉज F-03 और वित्त विधेयक 2025 के खिलाफ सड़कों पर उतरे पेंशनर्स, प्रधानमंत्री के नाम सौंपा गया ज्ञापन
विश्लेषणात्मक समाचार अवनीश त्यागी
बिजनौर।
केंद्र सरकार द्वारा गठित 8वें वेतन आयोग को लेकर जारी नोटिफिकेशन अब देशभर के पेंशनर्स के लिए चिंता का बड़ा कारण बनता जा रहा है। पेंशन पुनरीक्षण और अन्य पेंशनरी लाभों को स्पष्ट रूप से शामिल न किए जाने से नाराज सिविल इंजीनियर्स और सेवानिवृत्त कर्मचारी अब आंदोलन की राह पर हैं। इसी क्रम में बिजनौर जिला मुख्यालय पर सिविल डिप्लोमा इंजीनियर्स संघ और सेवानिवृत्त कर्मचारी एवं पेंशनर्स एसोसिएशन के संयुक्त तत्वावधान में एक प्रभावी ध्यानाकर्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया।
इस दौरान जिलाधिकारी बिजनौर के प्रतिनिधि के माध्यम से भारत के प्रधानमंत्री को संबोधित ज्ञापन सौंपा गया, जिसमें 8वें वेतन आयोग के नोटिफिकेशन में पेंशनर्स की कथित अनदेखी पर कड़ा विरोध दर्ज कराया गया।
क्या है पेंशनर्स की नाराजगी की असली वजह?
3 नवंबर को जारी सरकारी नोटिफिकेशन में शामिल क्लॉज F-03 को लेकर पेंशनर्स में सबसे अधिक रोष है। इस क्लॉज में पेंशन को गैर-अंशदायी एवं गैर-वित्त पोषित बताया गया है। पेंशनर्स का कहना है कि यह परिभाषा न केवल पेंशन की संवैधानिक भावना के विपरीत है, बल्कि इससे भविष्य में पेंशन पुनरीक्षण पर भी नकारात्मक असर पड़ सकता है।
इसके साथ ही वित्त विधेयक 2025 में तिथि के आधार पर पेंशनर्स में भेदभाव पैदा करने वाले प्राविधानों को भी अन्यायपूर्ण बताया गया। संगठनों का कहना है कि समान सेवा अवधि और समान पद पर कार्य करने वाले कर्मचारियों को अलग-अलग पेंशन देना सामाजिक न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ है।
सरकार को चेतावनी: नहीं सुनी गई मांगें तो तेज होगा आंदोलन
प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि 8वें वेतन आयोग के दायरे में पेंशन पुनरीक्षण, डीए मर्जर, समान पेंशन और सभी पेंशनरी लाभों को स्पष्ट रूप से शामिल किया जाए। पदाधिकारियों ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि सरकार ने शीघ्र निर्णय नहीं लिया, तो यह आंदोलन जिला स्तर से निकलकर राज्य और राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचेगा।
बड़ी संख्या में जुटे इंजीनियर्स और पेंशनर्स
इस कार्यक्रम में सिविल डिप्लोमा इंजीनियर्स संघ के उप महासचिव मनोज कुमार, जनपद अध्यक्ष लक्खी सिंह, जनपद सचिव अंकित कुमार कपासिया, पेंशनर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष शिवध्यान सिंह, जिला मंत्री योगेश्वर सिंह, उ.प्र. डिप्लोमा इंजीनियर्स महासंघ के पदाधिकारी सहित बड़ी संख्या में सिविल इंजीनियर्स, सेवानिवृत्त कर्मचारी और पेंशनर्स मौजूद रहे। सभी ने एक स्वर में पेंशनर्स के हितों की रक्षा की मांग उठाई।
क्यों अहम है 8वें वेतन आयोग में पेंशन का मुद्दा?
विशेषज्ञों के अनुसार, भारत में लाखों सेवानिवृत्त कर्मचारी पूरी तरह पेंशन पर निर्भर हैं। ऐसे में यदि वेतन आयोग में पेंशन पुनरीक्षण को स्पष्ट स्थान नहीं मिलता, तो यह भविष्य में आर्थिक असमानता और सामाजिक असंतोष को जन्म दे सकता है। यही कारण है कि पेंशनर्स इस मुद्दे को केवल आर्थिक नहीं, बल्कि सम्मान और अधिकार से जुड़ा प्रश्न मान रहे हैं।
आगे की रणनीति क्या होगी?
संगठनों ने संकेत दिए हैं कि यदि केंद्र सरकार ने समय रहते संवाद की पहल नहीं की, तो चरणबद्ध आंदोलन, धरना-प्रदर्शन और ज्ञापन अभियान को और व्यापक रूप दिया जाएगा।
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