ओवरलोडिंग पर किसान बनाम सिस्टम !
बिजनौर में एआरटीओ कार्यालय घेराव, भाकियू भानू ने दी बड़े आंदोलन की चेतावनी

अवैध ओवरलोड ट्रक-डंपर बने किसानों की परेशानी की जड़, कार्रवाई नहीं हुई तो सड़कों पर उतरेगा पूरा पश्चिमी यूपी
बिजनौर | सिस्टम की चुप्पी के खिलाफ किसानों का खुला ऐलान
जनपद बिजनौर में अवैध ओवरलोड वाहनों को लेकर लंबे समय से पनप रहा किसानों का आक्रोश अब सड़कों पर साफ दिखाई देने लगा है।
भारतीय किसान यूनियन भानू ने प्रशासन को चेताने के उद्देश्य से उप-सम्भागीय परिवहन कार्यालय (एआरटीओ), बिजनौर पर जोरदार धरना-प्रदर्शन कर अपनी ताकत का अहसास करा दिया।
धरने का नेतृत्व कर रहे प्रदेश उपाध्यक्ष (पश्चिम उत्तर प्रदेश) श्री गौतम शर्मा ने साफ शब्दों में कहा कि
“अब सिर्फ ज्ञापन और आश्वासन से काम नहीं चलेगा, ठोस कार्रवाई चाहिए।”
ओवरलोडिंग: सड़कों की मौत, किसानों की तकलीफ
धरना-प्रदर्शन के दौरान किसानों ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि—
- ओवरलोड ट्रक और डंपर ग्रामीण व मुख्य सड़कों को पूरी तरह बर्बाद कर चुके हैं
- आए दिन दुर्घटनाओं में किसानों, मजदूरों और राहगीरों की जान जा रही है
- खेतों तक जाने वाले संपर्क मार्ग क्षतिग्रस्त हो चुके हैं
- शिकायतों के बावजूद अवैध वाहनों पर “चुनिंदा कार्रवाई” की जाती है
किसानों का कहना है कि
👉 यदि समय रहते ओवरलोडिंग पर लगाम नहीं लगी, तो हालात और भयावह होंगे।
धरने की अध्यक्षता, प्रशासन पर सवाल
धरना-प्रदर्शन की अध्यक्षता तहसील अध्यक्ष धामपुर श्री ठाकुर चेतन चौहान ने की।
उन्होंने कहा—
“किसान सड़क भी चाहता है, सुरक्षा भी चाहता है और कानून का पालन भी। अगर प्रशासन अपनी जिम्मेदारी नहीं निभाएगा तो संगठन को मजबूरन सड़क पर उतरना पड़ेगा।”
एआरटीओ अधिकारियों का आश्वासन, पर भरोसा सीमित
धरना बढ़ता देख मौके पर पहुंचे—
- एआरटीओ प्रशासन श्री शिव शंकर सिंह
- एआरटीओ प्रवर्तन श्री ठाकुर गौरी शंकर सिंह
अधिकारियों ने संगठन को भरोसा दिलाया कि—
- अवैध ओवरलोड वाहनों के विरुद्ध विशेष अभियान चलाया जाएगा
- किसी भी दबाव में आकर कार्रवाई नहीं रोकी जाएगी
- नियमों का उल्लंघन करने वालों पर कठोर दंडात्मक कार्रवाई होगी
हालांकि किसानों ने साफ कहा कि
👉 अब सिर्फ कागजी आश्वासन नहीं, ज़मीनी कार्रवाई चाहिए।
गौतम शर्मा का अल्टीमेटम: अब आंदोलन तय
धरने को संबोधित करते हुए प्रदेश उपाध्यक्ष श्री गौतम शर्मा ने तीखे तेवर दिखाए।
उन्होंने दो टूक कहा—
“अगर जल्द ही अवैध ओवरलोड ट्रक, डंपर और ट्रैक्टर-ट्रॉली पर प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई, तो भारतीय किसान यूनियन भानू पश्चिम उत्तर प्रदेश स्तर पर बड़ा आंदोलन करेगी। इसकी संपूर्ण जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।”
उनके इस बयान के बाद धरनास्थल पर मौजूद किसानों ने एक स्वर में समर्थन जताया।
संगठन की ताकत दिखी, बड़ी संख्या में कार्यकर्ता मौजूद
धरना-प्रदर्शन में संगठन की व्यापक भागीदारी देखने को मिली। प्रमुख रूप से मौजूद रहे—
- केफ मलिक – प्रदेश संगठन मंत्री, युवा पश्चिम उत्तर प्रदेश
- ठाकुर सचिन चौहान – जिला मीडिया प्रभारी एवं प्रदेश महासचिव, युवा पश्चिम उत्तर प्रदेश
इसके अतिरिक्त—
गुड्डू अफशार, खुर्शीद, राजीव शर्मा, राठी जी, बलवीर सिंह, देशराज सिंह, प्रणव कुमार, राहुल, कुलदीप, शौकत, इनाम अली, शोएब, कबीर, आकिव, जाकिर, शादिक, रजत, संदीप, विपिन, रोहित, आदिल सहित अनेक पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।
विश्लेषण | क्यों गंभीर है यह मुद्दा?
विशेषज्ञों के अनुसार—
- ओवरलोडिंग से सड़कें तय समय से पहले टूट जाती हैं
- हादसों में तेजी से इजाफा होता है
- सरकारी राजस्व को भी भारी नुकसान होता है
ऐसे में किसानों का यह आंदोलन सिर्फ संगठनात्मक विरोध नहीं, बल्कि जनहित और जनसुरक्षा का मुद्दा बनता जा रहा है।
📌 निष्कर्ष: चेतावनी या चिंगारी?
अब सवाल यह है कि—
👉 क्या प्रशासन समय रहते सख्ती दिखाएगा?
👉 या यह चेतावनी आने वाले दिनों में बड़े किसान आंदोलन की चिंगारी बनेगी?
फिलहाल बिजनौर में हालात साफ संकेत दे रहे हैं कि
अगर कार्रवाई नहीं हुई, तो किसान आंदोलन की अगली तस्वीर और भी बड़ी होगी।










