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10 महिला खिलाड़ियों को मिला सम्मान, खेलों में बेटियों की उड़ान को प्रशासन का संबल

           मिशन शक्ति से मैदान तक मजबूती

बिजनौर में 10 महिला खिलाड़ियों को मिला सम्मान, खेलों में बेटियों की उड़ान को प्रशासन का संबल

बिजनौर | 22 दिसंबर 2025
महिला सशक्तिकरण को ज़मीनी स्तर पर मजबूती देते हुए मिशन शक्ति कार्यक्रम के अंतर्गत बिजनौर में खेल प्रतिभाओं को नई ऊर्जा मिली। जिलाधिकारी श्रीमती जसजीत कौर ने खेलों में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रही 10 प्रतिभावान महिला खिलाड़ियों को ₹25,000 की प्रोत्साहन राशि वितरित कर न केवल उनका हौसला बढ़ाया, बल्कि यह संदेश भी दिया कि बेटियाँ हर मैदान में आगे बढ़ने को तैयार हैं—बस उन्हें अवसर और समर्थन चाहिए।

खेल और सशक्तिकरण का सशक्त संगम

यह आयोजन महज़ आर्थिक सहायता तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह नीतिगत प्रतिबद्धता और प्रशासनिक संकल्प का प्रतीक बना। मिशन शक्ति के जरिए खेलों को महिला सशक्तिकरण से जोड़ते हुए प्रशासन ने यह स्पष्ट किया कि खेल अनुशासन, आत्मविश्वास और नेतृत्व का सबसे सशक्त माध्यम हैं।

जिलाधिकारी श्रीमती जसजीत कौर ने कहा—

“मिशन शक्ति के माध्यम से हमारी बेटियाँ खेलों में नए आयाम स्थापित कर रही हैं। उनका समर्पण और जोश काबिले तारीफ है। जिला प्रशासन ज़िले की खेल प्रतिभाओं को निरंतर प्रोत्साहित करता रहेगा ताकि वे राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर बिजनौर का नाम रोशन करें।”

ये हैं वे चेहरे, जो बनेंगी प्रेरणा

प्रोत्साहन पाने वाली महिला खिलाड़ियों में—
कु. साक्षी, कु. तनीशा, कु. तनु, कु. तानिया, कु. सोनी, कु. शालिनी रावत, कु. सारिका रावत, कु. विधि चौहान, कु. भूमि चन्द्रा और कु. परी चन्द्रा शामिल रहीं।
इन खिलाड़ियों की उपलब्धियाँ आने वाले समय में युवा बालिकाओं के लिए रोल मॉडल बनेंगी।

तकनीकी मार्गदर्शन और प्रशिक्षण का मजबूत तंत्र

कार्यक्रम में राजकुमार (जिला क्रीड़ाधिकारी, बिजनौर), हिमांशु (सहायक जिला खेल कार्यालय), चित्रा चौहान (हॉकी प्रशिक्षिका) और फिरोज खान (कायकिंग/कैनोइंग प्रशिक्षक) की उपस्थिति ने यह संकेत दिया कि प्रशासन कोचिंग, प्रशिक्षण और संरचना—तीनों स्तरों पर निवेश कर रहा है।

विश्लेषण: छोटी सहायता, बड़ा संदेश

₹25,000 की राशि भले ही प्रतीकात्मक लगे, लेकिन इसका प्रभाव दूरगामी है। यह पहल बताती है कि प्रोत्साहन समय पर मिले तो प्रतिभा निखरती है। मिशन शक्ति के तहत ऐसे कार्यक्रम ग्रामीण व अर्ध-शहरी क्षेत्रों में छुपी प्रतिभाओं को सामने लाने में निर्णायक साबित हो सकते हैं।

बिजनौर में यह आयोजन स्पष्ट संकेत देता है कि खेलों के माध्यम से महिला सशक्तिकरण अब केवल नारा नहीं, बल्कि कार्रवाई में बदलता संकल्प है। यदि यह निरंतरता बनी रही, तो वह दिन दूर नहीं जब बिजनौर की बेटियाँ राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय पदकों के साथ देश का नाम रोशन करेंगी।

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