70+ बुजुर्गों के आयुष्मान कार्ड पर डीएम सख्त, एंबुलेंस सेवा की होगी औचक जांच
102-108 में देरी पर कार्रवाई, विशेष कैंप लगाकर लक्ष्य पूरा करने के निर्देश
बिजनौर | 18 दिसंबर 2025
जिले में स्वास्थ्य सेवाओं की रफ्तार बढ़ाने और योजनाओं को जमीन पर उतारने के लिए जिला प्रशासन ने सख्त तेवर अपना लिए हैं। जिलाधिकारी जसजीत कौर ने 70 वर्ष से अधिक आयु के सभी पात्र नागरिकों के आयुष्मान कार्ड शत-प्रतिशत बनाने के निर्देश देते हुए ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में विशेष कैंप आयोजित करने को कहा है। प्रगति धीमी मिलने पर डीएम ने नाराजगी जताते हुए संबंधित अधिकारियों को लक्ष्य के अनुरूप परिणाम सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
कलेक्ट्रेट सभागार में आयोजित जिला स्वास्थ्य समिति की समीक्षा बैठक में जिलाधिकारी ने स्वास्थ्य विभाग के विभिन्न कार्यक्रमों की गहन समीक्षा की और स्पष्ट संदेश दिया कि अब लापरवाही नहीं, परिणाम चाहिए।
102-108 एंबुलेंस सेवा पर कसा शिकंजा
आपातकालीन एंबुलेंस सेवाओं 102 व 108 की गुणवत्ता पर असंतोष व्यक्त करते हुए जिलाधिकारी ने नोडल अधिकारी को निर्देश दिए कि सेवाओं का मानकों के अनुरूप संचालन सुनिश्चित कराया जाए। उन्होंने कहा कि आपात स्थिति में विलंब करने वाले वाहन चालकों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए और इसके लिए औचक निरीक्षण नियमित रूप से किए जाएं।
मातृ-शिशु स्वास्थ्य पर विशेष जोर
जिलाधिकारी ने प्रसव सेवाओं को पूरी गंभीरता से संचालित करने के निर्देश दिए। साथ ही कहा कि—
- बच्चों और गर्भवती महिलाओं का रूटीन टीकाकरण अनिवार्य रूप से समय पर हो
- बच्चों में कुपोषण की नियमित जांच कर समीक्षा की जाए
- प्रधानमंत्री जननी सुरक्षा योजना के अंतर्गत लाभार्थियों को समय से भुगतान सुनिश्चित किया जाए
उन्होंने स्पष्ट किया कि आमजन को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराना ही स्वास्थ्य विभाग का मूल उद्देश्य है।
अस्पतालों में दवाएं और आधारभूत सुविधाएं दुरुस्त हों
डीएम ने जिला चिकित्सालय सहित सभी सीएचसी व पीएचसी में आधारभूत सुविधाओं की समीक्षा करते हुए निर्देश दिए कि यदि कहीं भी कमी है तो तत्काल सुधारात्मक कार्रवाई की जाए।
उन्होंने जीवन रक्षक दवाओं, एंटी-स्नेक वेनम इंजेक्शन, आशा कार्यकर्ताओं के भुगतान और आयुष्मान भारत योजना की प्रगति की भी विस्तार से समीक्षा की।
आशा-एएनएम की भूमिका की अनिवार्य समीक्षा
ग्रामीण स्तर पर कार्यरत आशा और एएनएम की कार्यप्रणाली और प्रशिक्षण पर भी जिलाधिकारी ने विशेष जोर दिया। उन्होंने निर्देशित किया कि स्वास्थ्य विभाग की जिन योजनाओं का सीधा संबंध इन स्वास्थ्य कार्यकत्रियों से है, उनकी नियमित समीक्षा संबंधित चिकित्सा अधिकारी द्वारा अनिवार्य रूप से की जाए, ताकि संस्थागत प्रसव और ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावी बन सकें।
टीबी उन्मूलन में उत्कृष्ट कार्य पर सम्मान
बैठक के दौरान राष्ट्रीय क्षयरोग उन्मूलन कार्यक्रम के अंतर्गत बेहतर कार्य करने वाले स्वास्थ्य कर्मियों को शील्ड और प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया, जिससे कर्मचारियों का उत्साह बढ़ा।
प्रशासन का साफ संदेश
बैठक में मुख्य विकास अधिकारी रणविजय सिंह, मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. कौशलेंद्र सिंह, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. मनोज सेन, डॉ. उर्मिला कार्या, महिला अस्पताल की डॉ. प्रभा रानी सहित सभी अपर मुख्य चिकित्साधिकारी और एमओआईसी मौजूद रहे।
निष्कर्षतः, जिला प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है कि स्वास्थ्य सेवाओं में किसी भी स्तर पर ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। आयुष्मान कार्ड, एंबुलेंस सेवा, मातृ-शिशु स्वास्थ्य और ग्रामीण स्वास्थ्य ढांचे—हर मोर्चे पर अब सख्त निगरानी और ठोस कार्रवाई होगी।











