दिल्ली ब्लास्ट मॉड्यूल का पर्दाफाश: उमर नबी का घर उड़ा, 600 से ज्यादा हिरासत में — क्या बड़ी साजिश टली?
IED धमाके से घर ध्वस्त, DNA से हुई पुष्टि • 6 दिसंबर पर सीरियल ब्लास्ट की तैयारी • 32 कारें ब्लास्ट के लिए तैयार की गई थीं
दिल्ली में 10 नवंबर को हुए विनाशकारी ब्लास्ट के बाद सुरक्षा एजेंसियों ने आतंकवादियों के नेटवर्क को तोड़ने के लिए अभियान तेज कर दिया है। गुरुवार रात पुलवामा के कोइल इलाके में सुरक्षा बलों ने IED धमाका कर आतंकी डॉ. उमर नबी के घर को ध्वस्त कर दिया।
DNA जांच में यह पुष्टि हो चुकी है कि ब्लास्ट में इस्तेमाल कार में उमर नबी ही मौजूद था और इसी के बाद उस पर शिकंजा और कस गया।
600 से ज्यादा लोग हिरासत में, 500 लोकेशन पर छापेमारी
पिछले तीन दिनों में सुरक्षाबलों ने कश्मीर में 500 से अधिक ठिकानों पर ताबड़तोड़ छापे मारे हैं।
लगभग 600 लोगों को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया गया है।
उमर नबी के माता-पिता और भाइयों से भी पूछताछ जारी है।
गिरफ्तार आतंकियों का खुलासा— 6 दिसंबर को ‘सीरियल ब्लास्ट प्लान’ तैयार था
खुफिया एजेंसियों के अनुसार, अब तक गिरफ्तार 8 आतंकियों ने एक बड़े खुलासे में बताया है कि—
- 6 दिसंबर (बाबरी मस्जिद विध्वंस की बरसी) पर
- दिल्ली सहित देशभर में कई धमाकों की योजना बनाई गई थी
- इसके लिए 32 कारों को IED से लैस करने की तैयारी थी
यह साफ संकेत है कि ब्लास्ट मॉड्यूल का लक्ष्य केवल दिल्ली नहीं बल्कि पूरे देश को दहलाना था।
दिल्ली ब्लास्ट: अब तक 13 मौतें, 20 घायल — कई की हालत गंभीर
10 नवंबर की शाम हुए धमाके में—
- 13 लोगों की मौत हो चुकी है
- 20 लोग घायल, जिनमें 3 की हालत नाज़ुक बताई जा रही है
यह हमला हाल के वर्षों की सबसे गंभीर आतंकी घटनाओं में से एक माना जा रहा है।
फंडिंग पर सबसे बड़ा सवाल — किसने चलाया इतना बड़ा नेटवर्क?
एजेंसियां इस बात की तफ्तीश में जुटी हैं कि—
- उमर नबी और उसके मॉड्यूल को वित्तीय मदद कहाँ से मिल रही थी?
- क्या पैसा विदेशी हैंडलर्स के जरिए हवाला मार्ग से आया?
- या क्रिप्टो चैनल, NGO फंडिंग, या ड्रग-टेरर नेटवर्क से लिंक था?
फंडिंग सोर्स ही इस मॉड्यूल का सबसे मजबूत आधार था, जिसकी परतें अब खुलनी शुरू हो चुकी हैं।
पहली नजर में सामने आईं संभावित फंडिंग चैनल्स
जांच एजेंसियों की प्रारंभिक दिशा इस ओर है कि—
- हवाला नेटवर्क के जरिए घाटी में पैसा आया
- ड्रग तस्करी से नकदी को मॉड्यूल ने ऑपरेशनल खर्च में बदला
- कुछ क्रिप्टो लेन-देन भी संदिग्ध बताए जा रहे हैं
- मॉड्यूल को विदेशी स्लीपर सेल से लॉजिस्टिकल सपोर्ट मिला
फाइनल रिपोर्ट आने में समय लगेगा, लेकिन संकेत बेहद गंभीर और बड़े नेटवर्क की ओर इशारा करते हैं।
निष्कर्ष: भारत के सामने ‘हाई-टेक आतंकवाद’ की नई चुनौती
दिल्ली ब्लास्ट और उसके बाद जुड़े खुलासे बताते हैं कि आतंकवादी मॉड्यूल अब—
- टेक्नोलॉजी-ड्रिवन,
- वित्तीय रूप से मजबूत,
- और देशव्यापी हमलों की क्षमता वाला हो चुका है।
उमर नबी का मारा जाना भले ही एक बड़ी सफलता है, लेकिन इस मॉड्यूल की फंडिंग, संपर्क और विदेशी लिंक की जांच अभी तय करेगी कि खतरा कितना बड़ा था — और कितना बचा हुआ है।











