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बिजनौर शुगर मिल में किसानों का गुस्सा फूटा! गन्ना रिजेक्ट करने पर भड़के किसान, बीकेयू ने मिल अधिकारियों को बनाया बंधक

बिजनौर शुगर मिल में किसानों का गुस्सा फूटा! गन्ना रिजेक्ट करने पर भड़के किसान, बीकेयू ने मिल अधिकारियों को बनाया बंधक
बिजनौर, 08 नवंबर 2025 (विशेष संवाददाता)

बिजनौर शुगर मिल में आज दिनभर हंगामा, नारेबाजी और धरने का माहौल देखने को मिला। किसानों का आरोप है कि मिल प्रशासन ने गन्ना वैरायटी 5009 को “रिजेक्ट” कर दिया और तोलने से इंकार कर दिया, जिससे सैकड़ों किसान आक्रोशित हो उठे। मामला इतना बढ़ गया कि भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) के जिला अध्यक्ष सुनील प्रधान को खुद मौके पर पहुंचना पड़ा।

 मिल प्रशासन और किसानों में टकराव

सुबह जैसे ही किसानों के ट्रॉली भर गन्ने शुगर मिल पहुंचे, मिल कर्मियों ने 5009 वैरायटी का गन्ना लेने से इनकार कर दिया।

  • किसानों ने इसे “शोषण की शुरुआत” बताया।
  • मौके पर ही किसान एकजुट होकर धरने पर बैठ गए।
  • मिल प्रशासन से बातचीत विफल रही, तो आंदोलन ने जोर पकड़ लिया।

 सुनील प्रधान का सख्त रुख — “गन्ना तोले बिना अधिकारी बाहर नहीं जाएंगे”

दोपहर बाद जिला अध्यक्ष सुनील प्रधान धरना स्थल पर पहुंचे।
उन्होंने मिल गेट पर जीएम और यूनिट हेड को रोकते हुए दो टूक कहा—

“जब तक किसानों का गन्ना तौलना शुरू नहीं होगा, तब तक कोई भी अधिकारी इस परिसर से बाहर नहीं जाएगा।”

किसानों ने नारे लगाए — “किसान एकता जिंदाबाद!”
सुनील प्रधान ने चेताया कि अगर किसी भी किसान का गन्ना रिजेक्ट किया गया तो भाकियू झंडा और डंडा लेकर शुगर मिल का इलाज करेगी।

 वार्ता सफल — गन्ना तोल शुरू

करीब दो घंटे तक चले तनाव के बाद जिला प्रशासन की मौजूदगी में भाकियू नेताओं और मिल प्रबंधन के बीच समझौता हुआ।
मिल प्रबंधन ने किसानों का गन्ना तोलना शुरू कर दिया, जिससे धरना स्थल पर मौजूद किसानों ने राहत की सांस ली।

 सुनील प्रधान की चेतावनी

वार्ता के बाद जिला अध्यक्ष सुनील प्रधान ने कहा —

“किसान का हर एक गन्ना शुगर मिल में तौला जाएगा। बिजनौर जिले की किसी भी मिल ने अगर किसान का शोषण किया तो उसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।”

धरना स्थल पर मौजूद रहे किसान नेता

धरना स्थल पर बड़ी संख्या में किसान और यूनियन पदाधिकारी मौजूद रहे। प्रमुख नामों में शामिल हैं:
मनप्रीत सिंह सिंधु, वीरेंद्र सिंह, अमित बालियान, हर्षवर्धन, दीपक तोमर, विनीत चौधरी, महावीर सिंह, कोमन सिंह, डॉ. विजय सिंह, मुनेंद्र काकरान, रजनीश अहलावत, शक्ति शालान, दिनेश कुमार, नरदेव सिंह, कीरत बालियान, जय सिंह, मुनिदेव, मास्टर पंकज शेरावत, रवि शेखर तोमर, चांद वीर सिंह, आकाश चौधरी, कपिल चौधरी आदि।

 किसानों का संदेश स्पष्ट — “अब और नहीं चलेगा शोषण”

किसानों ने कहा कि यह आंदोलन केवल गन्ने की तोल का नहीं, बल्कि किसानों की इज्जत और अधिकारों की लड़ाई है।
अब किसान जागरूक हैं और अपने हक के लिए किसी भी स्तर तक जाने को तैयार हैं।

 निष्कर्ष

बिजनौर शुगर मिल का यह विवाद भले ही अस्थायी रूप से सुलझ गया हो, लेकिन इसने जिले की सभी मिलों को चेतावनी दे दी है कि —
“किसान अब दबेगा नहीं, लड़ेगा भी और जीतेगा भी।”
भारतीय किसान यूनियन का यह रुख भविष्य में गन्ना किसानों की आवाज को और मजबूत करने वाला साबित हो सकता है।

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